आज के दौर में टीवी पर सैकड़ों धारावाहिक और वेब सीरीज मौजूद हैं, लेकिन भारतीय टेलीविजन के इतिहास में एक ऐसा शो भी रहा जिसने इस सफर की मजबूत नींव रखी. यह था दूरदर्शन का चर्चित धारावाहिक ‘हम लोग', जिसे भारत का पहला हिंदी टीवी सोप ओपेरा माना जाता है. साल 1984 में शुरू हुए इस सीरियल ने न सिर्फ दर्शकों को परिवार और समाज से जुड़े मुद्दों से जोड़ा, बल्कि टीवी देखने का अंदाज भी बदल दिया. इसकी सबसे खास बात यह थी कि हर एपिसोड के अंत में दिग्गज अभिनेता अशोक कुमार पर्दे पर आते थे और कहानी में हुए घटनाक्रम पर अपनी राय रखते हुए दर्शकों को सही और गलत का फर्क समझाते थे.
156 एपिसोड तक चला, आम परिवार की कहानी ने जीता दिल
‘हम लोग' का पहला प्रसारण 7 जुलाई 1984 को दूरदर्शन पर हुआ था. इस धारावाहिक को प्रसिद्ध लेखक मनोहर श्याम जोशी ने लिखा था, जबकि इसका निर्देशन पी. कुमार वासुदेव ने किया था. कुल 156 एपिसोड वाले इस शो की कहानी एक मध्यमवर्गीय भारतीय परिवार के इर्द-गिर्द घूमती थी. बेरोजगारी, महंगाई, दहेज, महिलाओं की शिक्षा, पारिवारिक जिम्मेदारियां और सामाजिक बदलाव जैसे मुद्दों को बेहद वास्तविक अंदाज में पेश किया गया. उस समय दर्शकों ने पहली बार टीवी पर अपनी ही जिंदगी से मिलती-जुलती कहानी देखी, जिसकी वजह से यह शो घर-घर में लोकप्रिय हो गया. इसकी सफलता ने भारतीय टेलीविजन पर धारावाहिकों के नए दौर की शुरुआत की और बाद में ‘बुनियाद', ‘रामायण' और ‘महाभारत' जैसे बड़े शो भी दर्शकों तक पहुंचे.
अशोक कुमार का अनोखा अंदाज बना शो की पहचान
‘हम लोग' की सबसे बड़ी खासियत इसकी कहानी के साथ-साथ उसका अनोखा प्रस्तुतीकरण भी था. हर एपिसोड समाप्त होने के बाद हिंदी सिनेमा के दिग्गज अभिनेता अशोक कुमार दर्शकों के सामने आते थे. वह एपिसोड में दिखाए गए किरदारों के फैसलों और घटनाओं पर चर्चा करते, उनसे जुड़ी सीख बताते और दर्शकों को सोचने के लिए प्रेरित करते थे.
उस दौर में यह प्रयोग बिल्कुल नया था और लोगों ने इसे खूब पसंद किया. शो की लोकप्रियता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि कलाकारों और दूरदर्शन को हजारों चिट्ठियां मिलने लगी थीं. कई दर्शक तो किरदारों को वास्तविक मानकर उन्हें सलाह और मदद के पत्र भी भेजते थे. ‘हम लोग' को भारत का पहला हिंदी टीवी धारावाहिक भी माना जाता है और आज भी इसे भारतीय टेलीविजन के इतिहास का मील का पत्थर समझा जाता है.