सर्जरी करते हुए डॉक्टर्स हरा या नीला रंग का सर्जिकल गाउन पहनते हैं. ऑपरेशन थियेटर में भी सभी कुछ इसी रंग का होता है. क्या आपको पता है कि केवल इन्हीं रंगों का प्रयोग क्यों किया जाता है. कुछ समय पहले तक ऑपरेशन करते हुए सफेद कपड़े क्यों पहने जाते थे, और अब इनकी जगह हरे व नीले रंग ने क्यों ले ली है. शायद आपको पता ना हो पर इसके पीछे का कारण ऐसा है, जो आपको चौंका देगा.
क्यों पहना जाता है हरा व नीला रंग
ऑपरेशन करते हुए डॉक्टर्स लंबे समय तक खून का लाल रंग देखते हैं. जब किसी इंसान की आंख लंबे समय तक लाल रंग देखती है, तो कलर फटीग यानी रंगों से थकान होने का खतरा होता है. जबकि लाल रंग के विपरीत रंग यानी हरा व नीला रंग देखने से आंखों को संतुलन मिलता है. इससे डॉक्टर्स व अन्य स्टाफ की विजुअल क्लैरिटी बनी रहती है.
दिमाग को सुकून देने वाले रंग
कई शोधों में ये बात सामने आई है कि हरा व नीला रंग तनाव को कम करने वाले रंग हैं. ये एकाग्रता को भी बढ़ाते हैं, जिससे सर्जरी के समय डॉक्टर्स बेहतर निर्णय ले पाते हैं.इसके अलावा ऑपरेशन थियेटर में तेज आर्टिफिशियल लाइट में हरे व नीले रंग कम रिफ्लेक्शन पैदा करते हैं, जिससे डॉक्टर्स लंबे समय तक बिना थकान के काम कर पाते हैं.
सफेद से हरे-नीले तक का सफर
पहले डॉक्टर सर्जरी करते हुए सफेद रंग के कोट पहना करते थे, लेकिन 1914 के आसपास डॉक्टर्स को लगा कि लगातार खून यानी लाल रंग देखने की वजह से उनकी आंखों पर जोर बढ़ता है. ऐसे में वे सफेद रंग पहने होते हैं तो लाल रंग आंख में अधिक चुभता है.
लाल या पीला रंग क्यों नहीं पहना जाता
लाल रंग को कभी भी सर्जरी करने के लिए उपयुक्त नहीं माना जाता. इसका कारण ये है कि सर्जरी के समय खून का रंग लाल होता है जिसे डॉक्टर लंबे समय तक देखते हैं. इससे खून और शरीर के ऊतकों में फर्क कर पाना मुश्किल हो सकता है. जहां तक पीले रंग की बात है तो ऑपरेशन थियेटर की तेज रोशनी में पीला रंग आंखों में चुभ सकता है.