ईरान में ऑइल डिपो पर हमलों के बाद ‘ब्लैक रेन’ का खतरा, स्वास्थ्य और पर्यावरण पर हो सकता है खतरनाक असर

ऑइल या रिफाइनरी में लगी आग से कई प्रकार की जहरीली गैसें और कण निकलते हैं. ये बादलों में जाकर बारिश की बूंदों के साथ मिल सकती हैं. इससे एसिड रेन या ब्लैक रेन बनती है, जो स्वास्थ्य के साथ-साथ पर्यावरण के लिए काफी हानिकारक है.

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क्या होती है ‘ब्लैक रेन’? ईरान में जिसके होने का खतरा बढ़ा

Iran Israel War: अमेरिका-इजराइल और ईरान के बीच जारी युद्ध ने फिलहाल खतरनाक मोड़ ले लिया है. हाल ही में ईरान के तेल भंडारण और रिफाइनरी को निशाना बनाया गया है, जिसके बाद बड़े पैमाने पर आग लग गई है. इस आग से निकलते हुए काले धुंए और जहरीले कणों की वजह से “ब्लैक रेन” का खतरा बढ़ गया है. इससे लाखों लोगों के स्वास्थ्य और पर्यावरण पर खतरनाक असर पड़ सकता है. 

ऑइल डिपो पर हमले से बढ़ा संकट

हालिया हमले में ईरान की राजधानी तेहरान और उसके आसपास कई तेल फैसिलिटीज को निशाना बनाया गया था. इनमें अकदसियेह ऑयल डिपो, शहरान ऑयल स्टोरेज, करज ऑयल डिपो और तेहरान की बड़ी ऑयल रिफाइनरी शामिल हैं. इन हमलों के बाद कई जगहों पर भीषण आग लग गई और आसमान में काले जहरीले धुएं के बड़े गुबार उठने लगे.

एक रिपोर्ट के मुताबिक, तेहरान की रिफाइनरी हर दिन लगभग 2.25 लाख बैरल ऑइल प्रोसेस करने की क्षमता रखती है. इस आग से निकलने वाला धुआं पूरे शहर में फैल गया है. इसके चलते करीब 90 लाख आबादी वाले तेहरान में स्वास्थ्य संबंधी खतरे बढ़ गए हैं.

क्या होती है ब्लैक रेन? (What is black rain?)

ऑइल या रिफाइनरी में लगी आग से कई प्रकार की जहरीली गैसें और कण निकलते हैं. इनमें कार्बन मोनोऑक्साइड, सल्फर डाइऑक्साइड, नाइट्रोजन ऑक्साइड और कई जहरीले ऑर्गेनिक कंपाउंड शामिल होते हैं. जब सल्फर से भरपूर कच्चा तेल जलता है, तो उससे निकलने वाली गैसें बादलों में जाकर बारिश की बूंदों के साथ मिल सकती हैं. इससे एसिड रेन या ब्लैक रेन बनती है. यह बारिश मिट्टी, पानी और हवा को प्रदूषित कर सकती है.

स्वास्थ्य पर खतरनाक असर

इस तरह के धुएं में मौजूद छोटे-छोटे कण फेफड़ों के अंदर तक पहुंच सकते हैं. इससे सांस लेने में दिक्कत, खांसी, आंखों और गले में जलन जैसी समस्याएं हो सकती हैं. अस्थमा, फेफड़ों या दिल की बीमारी और बुजुर्ग लोगों के लिए यह प्रदूषण और भी ज्यादा खतरनाक साबित हो सकता है. लंबे समय तक संपर्क में रहने से लोगों के बीच गंभीर श्वसन और हृदय संबंधी समस्याएं बढ़ सकती है.

पर्यावरण और पानी पर भी खतरा

ऑइल डिपो में आग के चलते निकले जहरीले कण शहर के ड्रेनेज सिस्टम में पहुंचकर पानी के स्रोतों को भी प्रदूषित कर सकते हैं. यह प्रदूषण जमीन और भूजल तक फैल सकता है, जिससे कृषि और पीने का पानी दोनों प्रभावित हो सकते हैं. एक्सपर्ट्स का कहना है कि इस तरह की आग से निकलने वाला काला कार्बन जलवायु पर भी गंभीर असर डाल सकता है और दूर-दराज के क्षेत्रों तक फैल सकता है.

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मौजूदा स्थिति ने यह साफ कर दिया है कि युद्ध का प्रभाव केवल सैन्य ठिकानों तक सीमित नहीं रहता. इसका असर आम नागरिकों के स्वास्थ्य, पर्यावरण और शहर जनजीवन पर भी पड़ता है. एक्सपर्ट्स का मानना है कि अगर आग जल्द नहीं बुझी तो इसका प्रभाव लंबे समय तक महसूस किया जा सकता है.

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