5 दिन में 4 राज्यों की यात्रा कर ब्रिटिश यूट्यूबर ने दुनिया को दिखाया भारत का असली और खूबसूरत चेहरा

इस 5-दिवसीय यात्रा ने एक बात साफ कर दी, भारत विरोधाभासों से भरा देश है. यहां बर्फीली सीमाएं हैं, सुनहरे रेगिस्तान हैं, हरे-भरे बैकवाटर्स हैं और पहाड़ियों में बसे जनजातीय गांव हैं.

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यात्रा की शुरुआत उन्होंने नागालैंड से की, जिसे वे अपना दूसरा घर कहते हैं.

सोशल मीडिया के दौर में किसी भी देश की छवि कुछ मिनटों के वीडियो से बनती और बिगड़ती है. पिछले कुछ समय से भारत को लेकर कई विदेशी व्लॉगर्स ने ऐसे वीडियो बनाए हैं जिनमें भीड़, गंदगी या अव्यवस्था को बढ़ा-चढ़ाकर दिखाया गया. इन वीडियो ने ऑनलाइन एक तरह की हेट नैरेटिव यानी नकारात्मक धारणा को जन्म दिया. इसी माहौल में 29 वर्षीय ब्रिटिश यूट्यूबर माइक ओके ने एक अलग रास्ता चुना. उन्होंने तय किया कि वह भारत को समझने और दिखाने के लिए खुद यहां आएंगे, वो भी सिर्फ 5 दिनों में 4 अलग-अलग राज्यों की यात्रा करके. उनका मकसद साफ था भारत को एक ही रंग में रंगना गलत है, क्योंकि यह देश परतों से बना है, संस्कृति, मौसम, भाषा और अनुभवों की परतों से.

नागालैंड मेरा दूसरा घर

यात्रा की शुरुआत उन्होंने नागालैंड से की, जिसे वे अपना दूसरा घर कहते हैं. यहां वे अपने दोस्त रेनी से मिले और एक गांव में रहे, जहां जीवन पूरी तरह प्रकृति और परंपराओं से जुड़ा है. वीडियो का सबसे भावुक पल तब आया जब उन्होंने एक सामुदायिक सूअर वध (pig slaughter) देखा. वे खुद स्वीकार करते हैं कि यह अनुभव उनके लिए आसान नहीं था. लेकिन, उन्होंने कहा कि अगर हम मांस खाते हैं, तो हमें उस प्रक्रिया को समझने से भागना नहीं चाहिए.

यह हिस्सा दिखाता है कि भारत सिर्फ शॉक वैल्यू नहीं है, बल्कि यहां की जमीनी सच्चाइयों को समझना भी जरूरी है. उन्होंने नागालैंड की ईसाई पहचान और उसके इतिहास पर भी बात की, जिससे पता चलता है कि भारत के पूर्वोत्तर राज्यों की संस्कृति कितनी अलग और समृद्ध है.

कश्मीर और द्रास: बर्फ, सीमा और बहादुरी

इसके बाद वे पहुंचे श्रीनगर और वहां से द्रास की ओर बढ़े, जो Drass के नाम से जाना जाता है और दुनिया के सबसे ठंडे आबाद स्थानों में से एक है. बर्फ से ढकी सड़कें, हिमस्खलन का खतरा और भारी सैन्य मौजूदगी यहां का माहौल नागालैंड से बिल्कुल अलग था. स्थानीय लोगों से बातचीत में 1999 के कारगिल का जिक्र भी आया.

लेकिन, यूट्यूबर का फोकस संघर्ष नहीं, बल्कि हिमालय की खूबसूरती पर था. उनका कहना था कि जब लोग हिमालय की बात करते हैं, तो वे नेपाल को याद करते हैं, लेकिन भारतीय हिमालय भी उतना ही सुंदर और कम भीड़भाड़ वाला है.

जैसलमेर: सुनहरा राजस्थान

तीसरा पड़ाव था जैसलमेर. सुनहरे किले, थार रेगिस्तान और ऊंटों की सवारी यह वही भारत था जिसे दुनिया अक्सर पोस्टकार्ड में देखती है. उन्होंने मजाक में कहा कि अगर किसी को राजस्थान पसंद नहीं आता, तो वह केरल जाए; अगर वहां भी अच्छा न लगे तो पहाड़ या पूर्वोत्तर जाए. भारत को एक शहर या एक अनुभव से नहीं परखा जा सकता. यहां उन्होंने यह भी समझाया कि भारत को सिर्फ गंदगी या भीड़ तक सीमित करना वैसा ही है जैसे पेरिस देखकर पूरे यूरोप को नकार देना.

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केरल: पानी, प्रकृति और प्रगति

अंतिम पड़ाव था केरल. यहां उन्होंने बैकवाटर्स में हाउसबोट की सवारी की और ताजा सी-फूड का आनंद लिया. उन्होंने केरल की उच्च साक्षरता दर और बेहतर स्वास्थ्य सुविधाओं की भी तारीफ की. उनके मुताबिक, भारत का हर राज्य एक अलग देश जैसा अनुभव देता है भाषा, खानपान और सोच सब अलग.

लो-हैंगिंग फ्रूट कंटेंट पर सवाल

वीडियो के अंत में उन्होंने खुलकर कहा कि कई वायरल वीडियो लो-हैंगिंग फ्रूट यानी आसान और सनसनीखेज विषय चुनते हैं, जैसे झुग्गियां या अस्वच्छ स्ट्रीट फूड. क्योंकि ऐसी चीजें जल्दी वायरल होती हैं. लेकिन, उनका तर्क है कि भारत को समझने के लिए समय चाहिए. भारत 5 दिनों के लिए नहीं बना है. यहां एक या दो महीने बिताइए उन्होंने कहा.

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विरोधाभासों का देश

इस 5-दिवसीय यात्रा ने एक बात साफ कर दी, भारत विरोधाभासों से भरा देश है. यहां बर्फीली सीमाएं हैं, सुनहरे रेगिस्तान हैं, हरे-भरे बैकवाटर्स हैं और पहाड़ियों में बसे जनजातीय गांव हैं.

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