कुत्तों को सिर्फ प्यार करने के लिए न पालें, घर लाने से पहले जान लें उनका मेडिकल खर्च कितना

आज अमेरिका में पालतू जानवर सिर्फ जानवर नहीं, बल्कि परिवार के सदस्य माने जाते हैं. लेकिन, इसी भावनात्मक रिश्ते के कारण लोग कर्ज, तनाव और यहां तक कि दिल तोड़ने वाले फैसलों तक पहुंच जाते हैं.

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अमेरिका में करीब 6 से 6.8 करोड़ घरों में कम से कम एक कुत्ता है.

अमेरिका को दुनिया के सबसे विकसित देशों में गिना जाता है, जहां बड़ी आबादी के पास हेल्थ इंश्योरेंस है. इसके बावजूद सच्चाई यह है कि बहुत से अमेरिकी अपने और अपने परिवार के इलाज का खर्च उठाने में ही जूझ रहे हैं. ऐसे में जब घर का सबसे प्यारा सदस्य कुत्ता बीमार पड़ता है या उसकी सालाना जांच का समय आता है, तो यह प्यार एक बड़ी आर्थिक परीक्षा बन जाता है. आज अमेरिका में पालतू जानवर सिर्फ जानवर नहीं, बल्कि परिवार के सदस्य माने जाते हैं. लेकिन, इसी भावनात्मक रिश्ते के कारण लोग कर्ज, तनाव और यहां तक कि दिल तोड़ने वाले फैसलों तक पहुंच जाते हैं.

अमेरिका में कुत्ते सिर्फ पालतू नहीं, परिवार

अमेरिका में करीब 6 से 6.8 करोड़ घरों में कम से कम एक कुत्ता है. यानी लगभग हर दूसरा घर कुत्ता पालता है. 2018 के एक सर्वे में 73% कुत्ता पालने वालों ने साफ कहा कि वे अपने पालतू जानवरों को परिवार का हिस्सा मानते हैं. वहीं 2023 में Pew रिसर्च सेंटर के सर्वे में 51% लोगों ने माना कि वे अपने जानवरों को इंसानी रिश्तेदारों जितना ही अहम मानते हैं.

यही वजह है कि जब कुत्ते की जान बचाने की बात आती है, तो लोग हरसंभव कोशिश करना चाहते हैं चाहे उसकी कीमत कितनी भी भारी क्यों न हो.

कुत्तों की देखभाल पर हर साल बढ़ता खर्च

आंकड़े बताते हैं कि अमेरिका में लोग अपने कुत्तों के भोजन और देखभाल पर औसतन 1,700 डॉलर यानि 1,55,941 रुपये प्रति वर्ष खर्च करते हैं. साल 2025 में अमेरिकी नागरिकों ने पालतू जानवरों की पशु चिकित्सा देखभाल पर 41 अरब डॉलर से अधिक खर्च किए, जिनमें सबसे बड़ा हिस्सा कुत्तों और बिल्लियों का रहा.

आज किसी कुत्ते को पशु चिकित्सक के पास ले जाने का औसत खर्च 214 डॉलर है, जबकि नियमित जांच का खर्च 70 से 174 डॉलर तक हो सकता है.

जब बीमारी बन जाए आर्थिक संकट:

कुछ बीमारियों का इलाज तो आम परिवारों के लिए लगभग असंभव हो जाता है.

  • गैस्ट्रोएंटेराइटिस: 3,000 डॉलर
  • आंतों की सर्जरी: 7,000 डॉलर
  • पैन्क्रियाज की गंभीर बीमारी: 5,000 डॉलर
  • पेट फूलना (ब्लोट): 8,000 डॉलर
  • कैंसर का इलाज (कीमो/रेडिएशन): 10,000 डॉलर से ज्यादा

अगर कुत्ते को रात भर अस्पताल में रखना पड़े, तो एक रात का खर्च 1,500 डॉलर तक हो सकता है.

बचत नहीं, तो कर्ज ही सहारा:

अमेरिका में सिर्फ 41% लोग ही अपनी बचत से 1,000 डॉलर का अचानक खर्च उठा सकते हैं. ऐसे में भारी पशु चिकित्सक बिल चुकाने के लिए लोगों को कर्ज लेना पड़ता है. MetLife के पालतू बीमा सर्वे के अनुसार, 39% पालतू जानवर रखने वालों ने इलाज के लिए कर्ज लिया.

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जब मजबूरी बन जाए सबसे कठिन फैसला:

जो लोग खर्च या समय नहीं निकाल पाते, वे कुत्तों को किसी और को देने, आश्रय गृह में छोड़ने या इच्छामृत्यु जैसे दर्दनाक फैसले लेते हैं. अनुमान है कि वित्तीय कारणों से हर साल 3.3 लाख से ज्यादा कुत्तों को अमेरिका में इच्छामृत्यु दी जाती है.

डॉग इकोनॉमिक्स क्या बताती है?

कनाडा के लोक नीति विद्वान एडन विनिंग ने अपनी 2024 की किताब Dog Economics में बताया है कि अर्थशास्त्र हमारे कुत्तों के साथ रिश्तों को गहराई से प्रभावित करता है जहां भावनाएं और पैसे टकराते हैं.

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अमेरिका में कुत्तों से प्यार कम नहीं हुआ है, लेकिन उनका इलाज अब इंसानी इलाज से भी महंगा होता जा रहा है. यह कहानी सिर्फ पालतू जानवरों की नहीं, बल्कि उस समाज की है जहां प्यार और आर्थिक हकीकत आमने-सामने खड़े हैं.

भारत में एक कुत्ता पालने पर औसत कितना खर्च होता है?

1. कुत्ते का खाना (Food Cost)

  • देसी या इंडियन ब्रीड: 1,500 - 3,000 रुपये महीना
  • विदेशी नस्ल (Labrador, German Shepherd आदि): 3,000 - 6,000 रुपये महीना

सालाना खर्च: 20,000 - 60,000 रुपये.

2. वैक्सीनेशन और मेडिकल खर्च

  • शुरुआती वैक्सीनेशन (पहले साल): 3,000 - 6,000 रुपये
  • सालाना बूस्टर डोज: 1,000 - 2,000 रुपये
  • सामान्य बीमारियां / दवाएं: 2,000 - 5,000 रुपये

सालाना औसत मेडिकल खर्च: 4,000 - 10,000 रुपये

3. पशु चिकित्सक (Vet Visit)

  • सामान्य चेकअप: 300 - 800 रुपये प्रति विजिट
  • साल में 2-4 विजिट आम हैं.

सालाना खर्च: 1,000 - 3,000 रुपये

4. ग्रूमिंग और सफाई

  • नहलाना, कटिंग, नेल ट्रिमिंग
  • घर पर: 500 – 1,000 रुपये महीना
  • पेट सैलून: 1,500 - 3,000 रुपये महीना

सालाना खर्च: 6,000 - 30,000 रुपये

जरूरी बात

कुत्ता सिर्फ खर्च नहीं, भावनात्मक जिम्मेदारी भी है. समय, प्यार, ट्रेनिंग और ध्यान, ये सब पैसे से भी ज्यादा जरूरी हैं.

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