सूरजकुंड मेले के ल‍िए हो जाइए तैयार, ट्रड‍िशनल फूड से लेकर कल्‍चर का अनोखा संगम द‍िखेगा एक जगह

Surajkund mela stall booking 2026 : सूरजकुंड अंतर्राष्ट्रीय शिल्प मेला 2026 में 39वें सीजन के साथ लौट रहा है, जहां भारत और दुनिया की कला, संस्कृति, लोक नृत्य, संगीत और पारंपरिक स्वाद एक ही मंच पर देखने को मिलेंगे.

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सूरजकुंड मेला 2026 कहां है?

What is the stall booking price of Surajkund Mela 2025 : : भारत अपनी कला, संस्कृति और परंपराओं के लिए पूरी दुनिया में जाना जाता है. हर राज्य की अपनी अलग पहचान है, अपनी अलग कारीगरी है और अपनी अलग कहानी है. इन्हीं कहानियों को एक ही जगह पर देखने और महसूस करने का सबसे बड़ा मौका देता है सूरजकुंड अंतर्राष्ट्रीय शिल्प मेला. साल 2026 में इसका 39वां सीजन आयोजित किया जा रहा है, जिसे दुनिया का सबसे बड़ा क्राफ्ट फेयर कहा जाता है. ये मेला सिर्फ खरीदारी की जगह नहीं है, बल्कि ये भारत और कई देशों की सांस्कृतिक विरासत को करीब से जानने और समझने का अनुभव देता है. यहां कदम रखते ही रंग, संगीत, खुशबू और परंपरा सब कुछ एक साथ नजर आता है, जो हर उम्र के लोगों को अपनी ओर खींच लेता है.

कहां और कब लगेगा सूरजकुंड मेला (Venue And Dates)

सूरजकुंड अंतर्राष्ट्रीय शिल्प मेला हरियाणा के फरीदाबाद में स्थित सूरजकुंड मेला मैदान में आयोजित होता है. साल 2026 में इसका आयोजन 31 जनवरी से 15 फरवरी तक किया जाएगा. मेला रोज सुबह 10 बजे से रात 8 बजे तक खुला रहेगा. यहां पहुंचते ही ऐसा लगता है जैसे देश और दुनिया की संस्कृतियां एक साथ सांस ले रही हों. इस मेले में प्रवेश के लिए किसी तरह का टिकट नहीं लिया जाता, जिससे हर कोई आसानी से इसका हिस्सा बन सकता है.

शिल्प और हस्तकला की असली पहचान (Handicrafts And Artisans)

सूरजकुंड शिल्प मेले की सबसे बड़ी खासियत यहां मिलने वाली हस्तशिल्प की विविधता है. भारत के अलग-अलग राज्यों से आए कारीगर अपने हाथों से बनाई गई चीजें यहां प्रदर्शित करते हैं. मिट्टी के बर्तन, लकड़ी की नक्काशी, हाथ से बुने कपड़े, कढ़ाई, ज्वेलरी, प्रिंटेड फैब्रिक और होम डेकोर की अनोखी चीजें यहां देखने को मिलती हैं. हर स्टॉल के पीछे एक मेहनत, एक परंपरा और एक कहानी छुपी होती है.

लोक नृत्य, संगीत और स्वाद का संगम (Folk Dance Music And Food)

सूरजकुंड मेला लोक नृत्य और लोक संगीत के बिना अधूरा है. हर दिन अलग-अलग राज्यों के कलाकार अपनी रंगीन प्रस्तुतियों से माहौल को जीवंत बना देते हैं. इसके साथ ही यहां भारत के कोने-कोने के पारंपरिक व्यंजन भी मिलते हैं. राजस्थान की दाल बाटी, उत्तर प्रदेश की कचौड़ी, साउथ इंडिया का डोसा, नॉर्थ ईस्ट के खास पकवान और कई विदेशी डिशेज भी लोगों को खूब पसंद आती हैं.

क्यों जरूर जाएं सूरजकुंड शिल्प मेला (Why You Should Visit)

अगर आप भारत और दुनिया की संस्कृति को करीब से देखना चाहते हैं, पारंपरिक कला से जुड़ना चाहते हैं और एक यादगार अनुभव लेना चाहते हैं, तो सूरजकुंड अंतर्राष्ट्रीय शिल्प मेला जरूर जाएं. ये मेला सिर्फ एक इवेंट नहीं, बल्कि परंपरा, कला और संस्कृति का जीवंत उत्सव है.

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