नहीं बदल रही पुरुषों की सोच? 33 फीसदी Gen-Z लड़के चाहते हैं आज्ञाकारी पत्नी, जो मिलाएं हां में हां, आदम‍ियों को लग रहा ताकत घटने का ड़र

यह रिसर्च इप्सोस ने किंग्स कॉलेज लंदन ने ग्लोबल इंस्टीट्यूट फॉर विमेन लीडरशिप के साथ पार्टनरशिप में की थी. सर्वे में 29 देशों के लगभग 23,000 लोगों ने हिस्सा लिया, जिसमें जेंडर इक्वालिटी और रिश्तों में भूमिकाओं के प्रति लोगों के रवैये को देखा गया.

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आमतौर पर यहीं धारणा है कि जेन जी के लोग प्रोग्रेसिव विचारों वाले हैं और महिलाओं-पुरुषों में बराबरी की बात का समर्थन करते हैं. लेकिन एक ताजा सर्वे रिपोर्ट ने कुछ ऐसे खुलासे किए हैं जो चौंकाने वाले हैं. जेन-जी यानी 1997 से 2012 के बीच पैदा हुए युवा, कुछ ऐसी सोच रखते हैं जो पुराने विचारों से प्रभावित है. ये नए जमाने के तो हैं लेकिन इनके विचार अब भी पुरानी पीढ़ियों की तरह हैं. आइए जानते हैं कि सर्वे में वो कौन सी बातें सामने आईं जो चौंका रही हैं.

यह रिसर्च इप्सोस ने किंग्स कॉलेज लंदन ने ग्लोबल इंस्टीट्यूट फॉर विमेन लीडरशिप के साथ पार्टनरशिप में की थी. सर्वे में 29 देशों के लगभग 23,000 लोगों ने हिस्सा लिया, जिसमें जेंडर इक्वालिटी और रिश्तों में भूमिकाओं के प्रति लोगों के रवैये को देखा गया.

पत्नी को माननी चाहिए पति की बात

इंटरनेशनल विमेंस डे 2026 से पहले जारी इस स्टडी में पाया गया कि Gen Z के 31% पुरुषों का कहना है कि पत्नी को हमेशा अपने पति की बात माननी चाहिए, जिससे इस बात पर बहस छिड़ गई है कि यंग लोग बराबरी, शादी और मर्दानगी को कैसे देखते हैं.

Gen Z के 33% पुरुषों ने ये भी कहा कि ज़रूरी मसलों पर आखिरी फैसला पति का होना चाहिए. नतीजों ने ध्यान खींचा है क्योंकि यंग जेनरेशन से अक्सर ज्यादा प्रोग्रेसिव सोच रखने की उम्मीद की जाती है. सर्वे में Gen Z के पुरुषों और महिलाओं के बीच साफ फ़र्क भी दिखा. सिर्फ़ 18% Gen Z महिलाएं इस बात पर सहमत थीं कि पत्नियों को अपने पतियों की बात माननी चाहिए.

वर्किंग महिलाओं पर पुरुषों की सोच

साथ ही, रिसर्च ने Gen Z के नज़रिए का एक अलग पहलू भी दिखाया. कई जवान पुरुषों ने यह भी कहा कि वे उन महिलाओं की तारीफ़ करते हैं जो अपने करियर में सफल हैं. Gen Z के लगभग 41% पुरुषों ने कहा कि सफल करियर वाली महिलाएं अधिक आकर्षक होती हैं, जबकि बेबी बूमर (1946-64 के बीच जन्में) पुरुषों में से 27% ने ऐसा कहा.

स्टडी में महिलाओं की आज़ादी को लेकर भी पुरुषों की राय सामने आई है. Gen Z के लगभग 24% पुरुषों ने कहा कि एक महिला को बहुत ज़्यादा इंडिपेंडेंट या सेल्फ-सफिशिएंट नहीं दिखना चाहिए, जबकि बेबी बूमर पुरुषों में से 12% ने ऐसा कहा. जबकि महिलाओं में ऐसा मानने वाली की संख्या कम है. Gen Z की लगभग 15% महिलाओं और बेबी बूमर की 9% महिलाओं ने कहा कि वे इस विचार से सहमत हैं.

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मैस्कुलिनिटी पर जेन-जी

सर्वे में यह भी पता लगाया गया कि Gen Z पुरुष मैस्कुलिनिटी को कैसे देखते हैं. कई जवाब देने वालों ने कहा कि पुरुषों को कुछ ऐसे बिहेवियर फॉलो करने चाहिए जो अक्सर मैस्कुलिन होने के ट्रेडिशनल विचारों से जुड़े होते हैं. Gen Z के 43% पुरुषों ने कहा कि यंग पुरुषों को फिजिकली टफ बनने की कोशिश करनी चाहिए, भले ही यह उनकी नेचुरल पर्सनैलिटी न हो. दूसरे 30% ने कहा कि पुरुषों को मेल फ्रेंड्स को “आई लव यू” नहीं कहना चाहिए, जिससे पता चलता है कि पुरुषों के बीच इमोशनल एक्सप्रेशन को अभी भी कुछ लोग अनकम्फर्टेबल मानते हैं.

पेरेंटिंग को लेकर चौंकाने वाला खुलासा

पेरेंटिंग के बारे में भी ऐसे ही विचार दिखे. Gen Z के लगभग 21% पुरुषों ने कहा कि जो पुरुष चाइल्डकेयर में हिस्सा लेते हैं, वे कम मैस्कुलिन होते हैं, जबकि बेबी बूमर पुरुषों में से 8% ने ऐसा कहा. ये आंकड़े बताते हैं कि भले ही ऑनलाइन आकर लोग बराबरी को लेकर बड़ी-बड़ी बातें करते हों लेकिन उनकी सोच अब भी पुरानी है.

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