Child Brain Development: आजकल के डिजिटल दौर में बच्चे मोबाइल और स्क्रीन के ज्यादा आदी हो गए हैं. हालांकि, टेक्नोलॉजी के अपने फायदे हैं, लेकिन जरूरत से ज्यादा मोबाइल का इस्तेमाल (Effects Of Mobile On Kids) बच्चों के मेंटल, फिजिकल और सोशल डेवलपमेंट को नुकसान पहुंचा सकता है. सिर्फ पढ़ाई ही नहीं, बच्चों के लिए प्यार, देखभाल और (Parenting Tips For Smart Kids) उनके साथ समय बिताना भी उतना ही जरूरी है. अगर आप चाहते हैं कि आपका बच्चा तेज दिमाग वाला और खुशहाल बने, तो (Emotional Bonding With Kids) इसके लिए कई बातों का ध्यान देना जरूरी है. आइए इस आर्टिकल में कुछ जरूरी बातों को जानते हैं.
1. प्यार और इमोशनल कनेक्शन जरूरी: एक्सपर्ट के अनुसार, सिर्फ अच्छे नंबर लाना ही सफलता की पहचान नहीं होती, बल्कि बच्चों को इमोशनल रूप से सेफ फील करना भी बहुत जरूरी है. जब बच्चे प्यार और अपनापन महसूस करते हैं, तो उनका कॉन्फिडेंस बढ़ता है. माता-पिता अगर बच्चों के साथ समय बिताएं, उनसे बातें करें और उनके छोटे-छोटे पलों में खुशी जताएं, तो यह उनके मेंटल डेवलपमेंट के लिए फायदेमंद होगा.
2. ज्यादा मोबाइल देखने से बच्चों पर असर: मोबाइल अब जिंदगी का जरूरी हिस्सा बन गया है, लेकिन बच्चों पर इसका ज्यादा इस्तेमाल गलत असर डाल सकता है. इससे ध्यान भटकता है, कॉन्सन्ट्रेशन कम होती है, नींद खराब होती है और सोशल स्किल्स भी कमजोर हो सकती हैं. इसलिए मोबाइल का ज्यादा इस्तेमाल न करने दें.
3. असली दुनिया की बातचीत और मोरल डेवलपमेंट: बच्चे अपने माता-पिता, दोस्तों और शिक्षकों से बातचीत करके ही जरूरी सोशल स्किल्स सीखते हैं. उन्हें ग्रुप एक्टिविटीज, कहानियों, मोरल वैल्यू से जुड़ी बातें सिखाएं.
4. दिमाग तेज करने के लिए क्या करें: बच्चों का दिमाग तेज करने के लिए इंटरैक्टिव और क्रिएटिव एक्टिविटी को बढ़ावा देना चाहिए. कहानियां पढ़ना, पहेलियां हल करना, बोर्ड गेम्स खेलना और तरह-तरह के अनुभवों से सीखना उनके सोचने-समझने की क्षमता को बढ़ाता है.
5. फिजिकल एक्टिविटी जरूरी: सिर्फ पढ़ाई से ही बच्चा सफल नहीं बनता, बल्कि उसका फिजिकल फिट रहना भी बहुत जरूरी है. मोबाइल देखने के बजाय अगर बच्चे खेल-कूद, योग, एक्सरसाइज और अन्य फिजिकल एक्टिविटी में भाग लें, तो उनकी फिटनेस के साथ-साथ कॉन्सन्ट्रेशन, और टीमवर्क की भावना भी मजबूत होगी.
6. क्रिएटिविटी और अलग तरह से सीखने के तरीके अपनाएं: बच्चों की सोच तभी बढ़ती है जब वे अलग-अलग तरीके से खुद को एक्सप्रेस कर पाते हैं. पेंटिंग, म्यूजिक, डांस, स्टोरी राइटिंग और अन्य क्रिएटिव एक्टिविटीज से उनकी सोचने-समझने की क्षमता बेहतर होती है. स्कूल और माता-पिता को भी रटने वाली पढ़ाई की बजाय एक्सपेरिमेंटल लर्निंग को बढ़ावा देना चाहिए ताकि पढ़ाई मजेदार और असरदार हो.
7. मोबाइल के इस्तेमाल के लिए नियम बनाएं: मोबाइल को पूरी तरह से हटाना संभव नहीं है, लेकिन इसके इस्तेमाल के लिए कुछ नियम बनाए जा सकते हैं. जैसे- खाने के समय मोबाइल न चलाना, सोने से पहले स्क्रीन से दूर रहना और ज्यादा देर तक मोबाइल न देखने देना. ‘डिजिटल डिटॉक्स डे' यानी ऐसा दिन जब परिवार बिना मोबाइल के साथ समय बिताए, यह भी एक अच्छा तरीका हो सकता है.
8. पेरेंट्स और टीचर का रोल : पेरेंट्स और टीचर्स की ये जिम्मेदारी बनती है कि वे बच्चों के आगे बढ़ने में मदद करें. अगर बच्चे अपने बड़ों को बिना मोबाइल के ज्यादा समय बिताते हुए देखेंगे, तो वे भी ऐसा करने के लिए सोचेंगे. आउटडोर लर्निंग को बढ़ावा देने और ग्रुप डिस्कशन जैसे तरीकों से बच्चों को बेहतर एजुकेशन दी जा सकती है.
क्या करना चाहिए?
- अच्छे नंबर लाना जरूरी है, लेकिन उससे भी ज्यादा जरूरी है कि बच्चे खुश और मेंटली मजबूत रहें.
- अगर आप चाहते हैं कि आपका बच्चा समझदार, होशियार और खुशहाल बने, तो मोबाइल के बजाय असली दुनिया दिखाएं.
- स्क्रीन से दूरी बनाकर और प्यार व देखभाल देकर ही हम बच्चों को सही मायनों में सफल बना सकते हैं.
अस्वीकरण: सलाह सहित यह सामग्री केवल सामान्य जानकारी प्रदान करती है. यह किसी भी तरह से योग्य चिकित्सा राय का विकल्प नहीं है. अधिक जानकारी के लिए हमेशा किसी विशेषज्ञ या अपने चिकित्सक से परामर्श करें. एनडीटीवी इस जानकारी के लिए ज़िम्मेदारी का दावा नहीं करता है.