Easy Writing Tips For Kids : छोटे बच्चों को कुछ नया सिखाना आसान काम नहीं होता है. खासकर जब बात लिखना सिखाने की हो, तो इसमें समय, धैर्य और समझदारी तीनों की जरूरत होती है. बच्चे जल्दी बोर हो जाते हैं और अगर उन पर दबाव डाला जाए तो वे सीखने से डरने लगते हैं. इसलिए लिखना सिखाने की शुरुआत किताब और पेंसिल से नहीं, बल्कि खेल और मजेदार एक्टिविटीज से करनी चाहिए. इस उम्र में बच्चों की उंगलियां और हाथ पूरी तरह मजबूत नहीं होते हैं, ऐसे में सीधे अक्षर लिखवाना उन्हें परेशान कर सकता है. अगर सही तरीके और सही स्टेप्स अपनाए जाएं, तो बच्चा न सिर्फ लिखना सीखता है बल्कि उसकी राइटिंग भी साफ और सुंदर बनती है. आइए जानते हैं बच्चों को लिखना सिखाने के आसान और असरदार तरीके.
फाइन मोटर स्किल्स (Fine Motor Skills)
लिखना सिखाने से पहले बच्चे की उंगलियों की पकड़ मजबूत करना बहुत जरूरी है. इसके लिए बच्चों को क्ले या आटे से छोटी आकृतियां बनाने दें. कागज फाड़ना और चिपकाना, मोतियों को धागे में पिरोना या छोटी चीजों को उठाकर रखना भी फायदेमंद होता है. इन एक्टिविटीज से उंगलियों की मांसपेशियां मजबूत होती हैं और बच्चा पेंसिल पकड़ने के लिए तैयार होता है.
ट्रेसिंग और डूडलिंग (Tracing And Doodling)
शुरुआत में बच्चे को खाली कागज और रंगीन क्रेयॉन दें. उसे अपनी मर्जी से टेढ़ी-मेढ़ी लाइनें बनाने दें. जब बच्चा रंगों और पेंसिल के साथ सहज हो जाए, तब डॉट्स जोड़कर लाइनें और आसान शेप्स बनवाएं. इससे बच्चे का हाथ चलना सीखता है और उसे लिखने में मजा आने लगता है.
लाइन्स बनाना सिखाएं (Practice With Lines)
बच्चे को कभी भी सीधे अक्षर लिखने के लिए मजबूर न करें. पहले सीधी, आड़ी, तिरछी और घुमावदार लाइन्स बनाना सिखाएं. ये लाइन्स ही आगे चलकर अक्षरों की नींव बनती हैं. जब बच्चा लाइन्स बनाने में कॉन्फिडेंट हो जाए, तभी उसे अक्षर सिखाने की शुरुआत करें.
संवेदी खेल (Sensory Play)
बच्चे छूकर और महसूस करके जल्दी सीखते हैं. एक प्लेट में रेत, नमक या सूजी फैलाकर बच्चे को उंगली से उस पर आकृतियां या अक्षर बनाने को कहें. हवा में उंगली से लिखना भी एक मजेदार तरीका है. इससे बच्चे पर कोई दबाव नहीं पड़ता और सीखना आसान हो जाता है.