Phone Addiction In Kids: युवाओं और बच्चों के बीच सोशल मीडिया और फोन का इस्तेमाल काफी ज्यादा बढ़ गया है. हेल्थ एक्सपर्ट्स भी बच्चों में बढ़ते स्क्रीन टाइम को लेकर लगातार चेतावनी देते रहते हैं. लंबे समय से तक स्क्रीन देखने से इसका बच्चों और बड़ों के दिमाग के साथ ही शरीर पर भी बुरा असर पड़ता है, साथ ही और भी कई तरह की समस्याओं का सामना करना पड़ता है. आज युवाओं और बच्चों में मोबाइल फोन और सोशल मीडिया की लत देखी जा रही है. देश में तेजी से बढ़ती इस समस्या को देखते हुए संसद में 29 जनवरी को पेश इकोनॉमिक सर्वे में लोगों की शारीरिक और मानसिक सेहत पर भी ध्यान दिया गया है. सर्वे में सोशल मीडिया का इस्तेमाल करने के लिए उम्र सीमा तय करने की भी मांग की गई है.
सोशल मीडिया के लिए उम्र सीमा तय करने की जरूरत
इकोनॉमिक सर्वे में सोशल मीडिया का इस्तेमाल करने के लिए उम्र सीमा तय करने की सिफारिश की गई है. सर्वे के मुताबिक, उम्र के आधार पर ही सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म तक पहुंच सीमित की जानी चाहिए, ताकि बच्चे कम उम्र में डिजिटल दबाव और ऑनलाइन कंटेंट के नेगेटिव असर से बच सकें. इसके साथ ही ऑनलाइन प्लेटफॉर्म्स को एज वेरिफिकेशन (Age Verification) लागू करने के लिए जिम्मेदार बनाने की बात भी कही गई है.
सर्वे में बताया गया है कि लंबे समय तक सोशल मीडिया के इस्तेमाल से अनिद्रा, चिंता और स्ट्रेस जैसी समस्याएं तेजी से बढ़ रही हैं. सर्वे में उदाहरण के तौर पर ऑस्ट्रेलिया का जिक्र किया गया है, जहां 16 साल से कम उम्र के बच्चों के लिए सोशल मीडिया पर कानूनी रोक लगाई गई है.
बच्चों को दें पढ़ाई के लिए सिंपल फोन
इकोनॉमिक सर्वे में यह भी कहा गया है कि सोशल मीडिया और फोन की लत का सीधा असर पढ़ाई और वर्कप्लेस प्रोडक्टिविटी पर पड़ रहा है. सर्वे के आंकड़ों के अनुसार, करीब 75 फीसदी छात्रों ने माना कि वे पढ़ाई के दौरान भी सोशल मीडिया का इस्तेमाल करते हैं, जिससे उन्हें फोकस करने में दिक्कत होती है.
इस समस्या से निपटने के लिए सर्वे में सुझाव दिया गया है कि छात्रों को सिंपल मोबाइल फोन दिए जाएं या फिर ऐसे टैबलेट दिए जाए, जो सिर्फ पढ़ाई के काम आएं. इससे बच्चों का ध्यान पढ़ाई पर रहेगा और वो बेवजह सोशल मीडिया में समय बर्बाद करने से बच सकेंगे.