Mahatma Gandhi Death Anniversary: जब कविता बनी अहिंसा की आवाज, शहीद दिवस पर पढ़ें वो कविताएं जो आज भी हमें रुला देती हैं

Gandhi Non-violence Poetry: गांधी जी की शहादत के बाद देश ही नहीं, दुनिया भर के कवियों, लेखकों और साहित्यकारों ने अपनी कलम के जरिए उन्हें श्रद्धांजलि दी. यही वजह है कि गांधी पर लिखी कविताएं आज भी पढ़ी जाती हैं, शेयर की जाती हैं और दिल को छू जाती हैं.

विज्ञापन
Read Time: 4 mins
Shaheed Diwas 2026: 30 जनवरी को शहीद दिवस के रूप में मनाया जाता है.

Mahatma Gandhi Death Anniversary: हर साल 30 जनवरी का दिन भारत के इतिहास में एक गहरे दर्द और आत्ममंथन के साथ आता है. यही वह दिन है, जब राष्ट्रपिता महात्मा गांधी को गोली मार दी गई थी. यह सिर्फ एक व्यक्ति की मृत्यु नहीं थी, बल्कि सत्य, अहिंसा और मानवता के प्रतीक पर किया गया हमला था. इसी कारण 30 जनवरी को शहीद दिवस के रूप में मनाया जाता है. इस दिन देश न सिर्फ गांधी जी को याद करता है, बल्कि यह भी सोचता है कि क्या हम उनके दिखाए रास्ते पर चल पा रहे हैं या नहीं.

गांधी जी की शहादत के बाद देश ही नहीं, दुनिया भर के कवियों, लेखकों और साहित्यकारों ने अपनी कलम के जरिए उन्हें श्रद्धांजलि दी. किसी ने उन्हें युगपुरुष कहा, तो किसी ने चलती-फिरती करुणा, इन कविताओं में सिर्फ दुख नहीं था, बल्कि एक सवाल भी था क्या हिंसा से कभी शांति आ सकती है? यही वजह है कि गांधी पर लिखी कविताएं आज भी पढ़ी जाती हैं, शेयर की जाती हैं और दिल को छू जाती हैं.

कविता बनी अहिंसा की सबसे सशक्त भाषा

गांधी जी खुद शब्दों से ज्यादा कर्म में विश्वास रखते थे, लेकिन उनकी शहादत के बाद कविता वह माध्यम बनी, जिसने उनके विचारों को जन-जन तक पहुंचाया. कवियों ने अहिंसा को नारे की तरह नहीं, बल्कि संवेदना की तरह पेश किया. कविता में गांधी सिर्फ़ नेता नहीं रहे, बल्कि एक ऐसा इंसान बन गए, जो हर ज़ुल्म के सामने खड़ा दिखाई देता है निहत्था, लेकिन अडिग.

क्यों रुला देती हैं गांधी पर लिखी कविताएं?

गांधी पर लिखी कविताएं हमें इसलिए रुला देती हैं, क्योंकि उनमें सिर्फ इतिहास नहीं, हमारी सामूहिक पीड़ा छिपी है. एक ऐसा आदमी, जिसने पूरी जिंदगी दूसरों के लिए जिया, उसे नफरत ने मार डाला यह सच्चाई दिल को चीर देती है. इन कविताओं में वह खालीपन महसूस होता है, जो आज भी समाज में दिखाई देता है संवाद की कमी, सहनशीलता की कमी और बढ़ती हिंसा.

शहीद दिवस का असली अर्थ

30 जनवरी हमें यह याद दिलाता है कि गांधी को मारने वाली गोली एक शरीर को खत्म कर सकी, विचार को नहीं. कविता ने उस विचार को संभाल लिया, सहेज लिया और आने वाली पीढ़ियों तक पहुंचा दिया. जब-जब समाज हिंसा की तरफ झुकता है, गांधी पर लिखी कविताएं हमें रोकती हैं और कहती हैं रास्ता यही नहीं है.

महात्मा गांधी की शहादत और अहिंसा के विचार पर आधारित कविताएं:

जब बापू गिरे थे…

गोली चली थी एक शरीर पर,
पर घायल हुआ था पूरा देश.
न हाथ में हथियार था उनके,
फिर भी डरता था हिंसा का वेश.

Advertisement

नफरत जीती एक पल को,
पर हार गई इतिहास में.
बापू गिरे थे जमीन पर,
पर उठे हर इंसान में.

अहिंसा की आवाज...

वो बोले नहीं,
पर उनकी चुप्पी ने सिखाया
लड़ाई तलवार से नहीं,
सच और संयम से जीती जाती है.

जब-जब दुनिया चीखी,
उन्होंने मौन चुना.
और उसी मौन ने
हिंसा को सबसे ज्यादा डराया.

30 जनवरी...

यह सिर्फ एक तारीख नहीं,
यह आत्मा का सवाल है.
क्या आज भी जिंदा है
वो रास्ता, जो बापू ने दिखाया था?

अगर जवाब हां है,
तो गांधी आज भी हमारे साथ हैं.
अगर जवाब नहीं है,
तो उनकी शहादत हमें आज भी पुकारती है.

Advertisement

गांधी आज भी चलते हैं...

वे मंदिर में नहीं,
न तस्वीरों में कैद हैं.
वे चलते हैं
हर उस कदम में
जो कमजोर के लिए उठता है.

शहीद दिवस पर गांधी को याद करने का सबसे सच्चा तरीका यही है कि हम उनकी कविताएं पढ़ें, समझें और कोशिश करें कि उनके बताए अहिंसा और मानवता के रास्ते को अपने जीवन में थोड़ा-सा ही सही, अपनाएं.

Advertisement
Featured Video Of The Day
Mahatma Gandhi की 78वीं पुण्यतिथि! राष्ट्रपति Murmu, PM Modi ने राजघाट पर दी श्रद्धांजलि | Delhi