Mahashivratri Celebration 2026: महाशिवरात्रि केवल एक पर्व नहीं, बल्कि चेतना के जागरण और आत्मिक विश्राम की पावन रात्रि मानी जाती है. इस साल यह पावन अवसर और भी खास होने जा रहा है, जब 180 से ज्यादा देशों से लाखों श्रद्धालु बेंगलुरु स्थित आर्ट ऑफ लिविंग फाउंडेशन के अंतरराष्ट्रीय केंद्र में एकत्रित होंगे. वैश्विक आध्यात्मिक गुरु श्री श्री रविशंकर की दिव्य उपस्थिति में आयोजित यह महोत्सव भक्ति, ध्यान और वैदिक अनुष्ठानों से ओत-प्रोत एक गहन आध्यात्मिक संध्या का साक्षी बनेगा.
आयोजकों के अनुसार, इस साल का महाशिवरात्रि उत्सव आध्यात्मिक उत्साह और भव्यता के नए आयाम स्थापित करेगा. केवल भारत ही नहीं, बल्कि दुनिया भर से लाखों दर्शक विशेष वेबकास्ट के माध्यम से इस आयोजन से जुड़ेंगे. अनुमान है कि विश्वभर में करोड़ों लोग इस दिव्य रात्रि के साक्षी बनेंगे.
महाशिवरात्रि का आध्यात्मिक महत्व
वैदिक परंपरा में महाशिवरात्रि को अत्यंत पवित्र रात्रि माना गया है. यह वह समय है जब मनुष्य बाहरी व्यस्तताओं से हटकर अपने भीतर की यात्रा पर निकल सकता है. यह रात्रि गहन विश्राम, जागृत चेतना और आंतरिक रूपांतरण का अवसर प्रदान करती है.
गुरुदेव श्री श्री रवि शंकर कहते हैं, "शिवरात्रि इस भौतिक संसार और आपके अंतर्मन के सूक्ष्म लोक के बीच एक सेतु है. यह आंतरिक जुड़ाव का क्षण है, मनोरंजन का नहीं. शिवरात्रि ध्यानमय जागरूकता का पर्व है आनंद और भक्ति में पूर्णतः निमग्न होने का अवसर."
उनके अनुसार, जब व्यक्ति कुछ समय अपने आत्मस्वरूप में विश्राम करता है, तो वह नई ऊर्जा से भर जाता है. यही ऊर्जा जीवन में शक्ति, आनंद और प्रसन्नता लाती है.
कार्यक्रम की प्रमुख झलकियां
आर्ट ऑफ लिविंग अंतरराष्ट्रीय केंद्र में पूरी रात चलने वाला यह उत्सव शक्तिशाली मंत्रोच्चारण, विस्तृत वैदिक अनुष्ठानों और भावपूर्ण संगीत से सुसज्जित होगा.
कार्यक्रम समय-सारिणी:
- सायं 7:15 - 7:45: भजन (भक्ति संगीत)
- सायं 7:45 - 9:30: पवित्र रुद्र होम
- रात्रि 9:30 - 10:30: भजन एवं गुरुदेव का संबोधन
- रात्रि 11:30: गुरुदेव के साथ विशेष मध्यरात्रि ध्यान
- प्रातः 4:00 से: रुद्र होम
इस अवसर का मुख्य आकर्षण रहेगा पवित्र रुद्र होम, जो भगवान रुद्र भगवान शिव के कल्याणकारी स्वरूप की उपासना हेतु संपन्न किया जाएगा. श्री रुद्रम के प्राचीन वैदिक मंत्रों पर आधारित यह अनुष्ठान वातावरण की शुद्धि और सामूहिक चेतना के उत्थान का प्रतीक माना जाता है.
विशाल आयोजन और सेवा-भाव
आयोजन के दिन लगभग 2.5 से 3 लाख श्रद्धालुओं के लिए प्रसाद की व्यवस्था की जा रही है. यह केवल एक धार्मिक कार्यक्रम नहीं, बल्कि सेवा और समन्वय का अद्भुत उदाहरण भी है. हजारों स्वयंसेवक इस आयोजन को सफल बनाने में जुटे हैं.
भारत के 150 से अधिक स्थलों पर भी रुद्र पूजा आयोजित की जाएगी, जिससे लाखों श्रद्धालु अपने-अपने शहरों में इस आध्यात्मिक अनुभव का हिस्सा बन सकेंगे.
वैश्विक वेबकास्ट से जुड़ेंगे लाखों दर्शक
जो श्रद्धालु व्यक्तिगत रूप से उपस्थित नहीं हो पाएंगे, वे विशेष वेबकास्ट के माध्यम से इस दिव्य रात्रि से जुड़ सकेंगे. आयोजकों का अनुमान है कि विश्वभर से लाखों दर्शक ऑनलाइन इस कार्यक्रम का सीधा प्रसारण देखेंगे और ध्यान, भजन तथा मंत्रोच्चारण में सहभागी बनेंगे.
आर्ट ऑफ लिविंग अंतरराष्ट्रीय केंद्र में आयोजित यह महाशिवरात्रि उत्सव केवल एक धार्मिक आयोजन नहीं, बल्कि सकारात्मकता, सामूहिक चेतना और गहन आध्यात्मिक ऊर्जा का विराट संगम होगा. 180 देशों से उमड़ती आस्था की यह धारा एक बार फिर यह संदेश देगी कि भक्ति, ध्यान और सेवा के माध्यम से पूरी मानवता को एक सूत्र में पिरोया जा सकता है.