Work Life Balance: आज के समय में महिलाएं की बात करें तो वो इंडिपेंडेंट रहना पसंद करती हैं. अपनी चीजों के लिए दूसरे की तरफ देना और अपनी जरूरतें पूरी करने के लिए दूसरे पर निर्भर होना छोड़ दिया है. अगर कहा जाए कि महिलाएं सिर्फ बदल नहीं रही हैं, बल्कि इस बदलाव के साथ ही वो सालों पुरानी सोच और सीमाओं को भी तोड़ रही हैं. वो समय अब पीछे छूटता जा रहा है जब महिलाएं केवल घर की चारदीवारी तक सीमित रहती थीं. आज के समय में इसे इक्वैलिटी का नाम दिया जा रहा है.
जो महिलाओं और पुरुषों के बीच बने एक पुराने ब्रिज को तोड़ती हैं जो महिलाओं को घर के काम और पुरुषों को बाहर के काम करने के लिए बना हुआ था. तब महिलाएं घर के काम करती थीं. उनका काम सिर्फ बच्चे, घर की देखभाल और परिवार की जरूरतों को पूरा करना होता था. दुर्भाग्य की बात तो ये थी कि इसे पूरे दिन किए गए काम को ना तो मेहनत का काम माना गया और ना ही कभी उनको वो सम्मान मिला जिसकी वो हरदार थीं. उनको ताना मिलता था कि “पूरा दिन करती ही क्या हो, घर पर ही तो रहती हो”.
जबकि सच्चाई ये है कि घर चलाना सबसे बड़ी जिम्मेदारी होती है जो उनके कंधों पर होती है. लेकिन आज के समय में महिलाएं घर और बाहर दोनों की ही जिम्मेदारियां संभाल रही हैं. आज की महिला इंडिपेंडेंट होना चुन रही है, और यह चुनाव किसी के खिलाफ नहीं, बल्कि खुद के हक में है.
आज के समय की महिला ना सिर्फ घर को संभाल रही है बल्कि वो ऑफिस के कामों में भी आगे हैं. उन्होंने हर उस क्षेत्र में अपनी जगह बना ली है जहां पर कभी सिर्फ पुरुषों का बोलबाला था. फिर वो चाहे सावित्री बाई फूले हों जो 1848 में पहली महिला शिक्षिका बनी थीं, आनंदी गोपाल जोशी 1887 में पहली महिला डॉक्टर बनीं और किरण बेदी को कोई कैसे भूल सकता है. वो साल 1972 में पहली महिला आईपीएस बनीं. इस तरह कई क्षेत्र में महिलाओं ने अपने कदम जमाए हैं और खुद को प्रूफ भी किया है.
आज की महिला है सुपरवुमैन
आज के समय में महिला अपने घर का काम संभालने के साथ ही अपने ऑफिस के काम भी बहुत अच्छे तरीके से करती हैं. अगर कहा जाए की अगर आज की महिला सुपरवुमैन है तो ऐसा कहना गलत नहीं होगा. वो एक साथ कई भूमिकाएं निभा रही है. घर की जिम्मेदारी संभालना हो या फिर ऑफिस की डेडलाइंस पूरी करनी है और उसके लिए लंबा काम करना है. हर काम में परफेक्ट बैलेंस और समझदारी से वो काम करती हैं और आगे बढ़ती हैं.
कोट - हमारी साथी आराधना ने बताया कि उनके लिए बाहर निकल कर काम करना अपने घर के बच्चों के लिए उन दरवाजों को खोलना था, जो मेरी बड़ी बहनों के लिए बंद थे. हालांकि घर के साथ ऑफिस के काम, बच्चा संभालना थकान से भरा होता है. लेकिन इन सबके बावजूद भी मैंने हिम्मत नहीं हारी और घर की जिम्मेदारियों के साथ ऑफिस के काम को भी बखूबी कर रही हूं.
इमोशनल एंगल
सुबह घर के कामों से दिन की शुरुआत करने से लेकर बच्चों की देखभाल, परिवार की जरूरतों का ध्यान और फिर प्रोफेशनल जिंदगी में पूरे कांफिडेंस के साथ काम- ये सब उनके रोजमर्रा की कहानी है. वो ना सिर्फ ऑफिस जाती नहीं, बल्कि अपने काम में टॉप पर रहती है, फैसले लेती है, टीम लीड करती है और अपनी मेहनत से पहचान बनाती है. आज के समय में महिला एक भूमिका में नही है- वो घर की रीढ़ है और ऑफिस की ताकत भी. यही वजह है कि महिला सिर्फ महिला नहीं, बल्कि सुपरवुमैन है, जो हर दिन बिना शोर किए असाधारण काम कर रही है.
मुझे इंडिपेंटेड रहना पसंद है, क्योंकि मुझे कुछ भी करने से पहले किसी से पूछना नहीं होता है. क्योंकि मैं फैमिली से दूर रहती हूं तो घर पर कोई होता नहीं है. लेकिन ऑफिस में कई बार लंबे समय तक काम करने की वजह से थकान इतनी हो जाती है कि फिर घर पर जाकर कोई काम करने का मन नहीं होता. खाना बाहर से मंगाकर खाकर सोने चली जाती हूं. इन सबके बीच कभी-तभी घर की याद आती है कि अगर मां होती तो खाना बना हुआ मिलता. नाश्ते से लेकर से लंच और डिनर के लिए सोचना नहीं पड़ता. घर पहुंच कर ये नहीं सोचना होता कि क्या बनाएं. ऐसे में कभी-कभी इमोशनल हो जाती हूं और मन करता है सब छोड़कर वापस चली जाऊं. हालांकि कुछ समय में ठीक होकर वापस से अपनी इंडिपेंडेंट लाइफ को एंजॉय करने निकल जाती हूं.- दीक्षा सिंह
सेहत से समझौता
इन सब बातों को भी हमने जान लिया, सुनकर और पढ़कर अच्छा भी लगा होगा. इसको पढ़ते हुए अगर आपके चेहरे पर एक हल्की सी मुस्कान आई है तो बात साफ है कि आप इन सभी बातों से रिलेट कर पा रहे हैं. लेकिन इन सबके बीच एक चीज जो कुछ महिलाएं पीछे छोड़ देती हैं वो होता है अपनी सेहत.
रितु शर्मा- हमारी साथी रितु शर्मा ने बताया कि, लंबे समय तक काम करने से तनाव और थकान बढ़ जाती. कई बार इसका असर नींद पर भी पड़ता है. इतना ही नहीं लंबे घंटों तक काम करने के कारण परिवार के साथ समय बिताने का मौका नहीं मिलता है. सोशल लाइफ काफी प्रभावित होती है.
लंबे समय तक काम करने का सबसे ज़्यादा असर हमारी हेल्थ पर दिखने लगता है. लगातार स्ट्रेस, नींद पूरी न होना और थकान की वजह से एनर्जी लेवल गिरने लगता है और मूड भी चिड़चिड़ा हो जाता है. कई बार मैंने खुद महसूस किया है कि इससे मेरा फोकस भी डगमगाने लगता है और छोटी-छोटी चीज़ें भी भारी लगने लगती हैं. एक विवाहित महिला और मां होने के कारण, लंबे समय तक काम करने से सिर्फ मेरी सेहत ही नहीं, बल्कि मेरी पर्सनल लाइफ भी प्रभावित होती है. धीरे-धीरे परिवार, पार्टनर और दोस्तों के लिए समय और मानसिक स्पेस कम हो जाता है, जिसके कारण रिश्तों में दूरी, कम्युनिकेशन की कमी और इमोशनल थकावट बढ़ने लगती है. बच्चों को भी हम समय नहीं दे पाते. बढ़ती उम्र में बच्चे भी हमारा सपोर्ट चाहते हैं, लेकिन काम की जिम्मेदारियों के चलते हम अकसर उन्हें इग्नोर करने लगते हैं, जिसका असर समय के साथ नजर आने लगता है- शिखा शर्मा
उर्वशी नौटियाल- हेल्थ पर असर ये कह सकते हैं कि टाइम पर खाना नहीं खा पाते. ब्रेकफास्ट से लेकर लंच तक डिस्टर्ब रहता है. डायबिटिक लोगों के लिए मैनेज करना ज्यादा मुश्किल हो सकता है.
घर परिवार और अकेलापन
घंटों तक काम करते रहने और लांग शिफ्ट के बाद घरों के काम के बीच और परिवार की देखभाल के बीच वो अपनी सेहत के साथ समझौता करती हैं. वहीं कई बार ऑफिस में ज्यादा काम का असर उनकी पर्सनल लाइफ पर भी पड़ता है. ऐसे में ही हमने अपने साथियों से एक सवाल किया और पूछा कि आखिर वो ऑफिस में लांग वर्किंग हार्स में काम करने का उनकी पर्सनल लाइफ और हेल्थ पर क्या असर पड़ता है.
हमारी साथी अनिता शर्मा ने भी अपने घर और ऑफिस के काम को बैलेंस करती हैं और उन्होंने बताया कि वो इस काम को बखूबी कैसे कर रही हैं.
काम के लंबे घंटे मुझे भावनात्मक तौर पर तोड़ते हैं. मेरे लिए काम एक नशे की तरह है. एक ऐसा नशा जो आपमें नहीं, जिसमें आप घुलना चाहते हैं, पिघलना, बनना और संवरना चाहते हैं. जिसमें आपको असीम आनंद आता है. लेकिन एक शाश्वत सत्य है, नशा कितना ही तेज हो, उतरता जरूर है. और जब आप किसी नशे से उबरते हैं, तो आपको वो हर भावनात्मक रिश्ता नजर आने लगता है जो आपके नशे की लत के चलते सफर कर रहा है. आप परेशान होते हैं और खुद को कोसते हैं कि आगे से नशा नहीं करेंगे. सीमा में रहकर आनंद लेंगे…
मेरे बच्चे हैं, लंबे काम के घंटों का सीधा असर उन पर होता है. जिस क्षेत्र में मैं कार्यरत हूं वहां आपको घंटों का भान नहीं होता. लेकिन उन दो नन्हीं जानों को हर उस एक क्षण का होता है जब वे इंतजार में होती हैं या अपनी किसी समस्या के लिए मुझ तक पहुंचना चाहती हैं और मैं अनुपस्थित ही उनके हाथ लगती है. बस, इतना ही कि सेहत तो आप सुधार सकते हैं, लेकिन बीते समय को दोबारा नहीं ला सकते. बच्चों के उस खालीपन की भरपाई ताउम्र किसी दूसरी चीज से नहीं की जा सकेगी.
ऐश्वर्या ने अपने विचार व्यक्त करते हुए बताया, आज की तेज रफ्तार जिंदगी में काम का दबाव इतना बढ़ गया है कि हम अपनी लाइफ को जीना ही भूलने लगे हैं. लगातार लंबे समय तक काम करते‑करते हमारी एनर्जी ही नहीं, बल्कि खुशियां भी धीरे‑धीरे खत्म होने लगी हैं. ऑफिस की भागदौड़ में हम फैमिली के साथ बिताने वाले कीमती पल भी खो रहे हैं, और अपने लिए टाइम निकालना तो अब लगभग नामुमकिन सा हो गया है. इसका असर सिर्फ हमारी पर्सनल लाइफ पर नहीं, बल्कि हमारी फिजिकल और मेन्टल हेल्थ पर भी गहराई से पड़ने लगा है. लंबे समय तक बैठकर काम करना हमारी हेल्थ और लाइफस्टाइल को धीरे‑धीरे नुकसान पहुंचा रहा है. ऐसे में यह समझना बेहद जरूरी है कि काम जरूरी है, लेकिन खुद को खोकर नहीं.- ऐश्वर्या
पलक ने बताया कि लांग वर्किंग हॉर्स का मेरी हेल्थ और पर्सनल लाइफ पर काफी असर पड़ रहा है. ज्यादा देर तक काम करने की वजह से मुझे थकान, स्ट्रेस और नींद की कमी महसूस होती है. कभी-कभी सरदर्द, मूड स्विंग्स और वीकनेस भी हो जाती है. वहीं फिजिकल और मेंटल हेल्थ दोनों पर असर पड़ता है. पर्सनल लाइफ का बात करते हुए पलक ने बताया कि देर तक काम करने की वजह से मुझे अपनी फैमिली और दोस्तों के साथ समय नहीं मिल पाता है. अपने लिए समय निकालना, सेल्फ केयर करना और हॉबीस फॉलो करना मुश्किल हो जाता है. जिस वजह से कभी-कभी फ्रेस्टेशन भी हो जाता है.- पलक सिंह