IND vs PAK T20 World Cup Match: क्रिकेट सिर्फ तकनीक, फिटनेस और रणनीति का खेल नहीं है, यह मानसिक मजबूती का भी इम्तिहान है. खासकर बड़े मुकाबलों में जब स्टेडियम खचाखच भरा हो और करोड़ों दर्शक टीवी पर नजरें गड़ाए बैठे हों, तब खिलाड़ी सिर्फ गेंद और बल्ले से नहीं, अपने मन से भी लड़ रहा होता है. ऐसे में कई खिलाड़ी अपने-अपने लकी टोटकों का सहारा लेते हैं. ये टोटके अंधविश्वास से ज्यादा एक मानसिक सहारा होते हैं, जो उन्हें आत्मविश्वास और स्थिरता देते हैं. आइए जानते हैं मैदान पर उतरने से पहले खिलाड़ियों के कुछ मशहूर और दिलचस्प टोटके.
मैच से पहले खिलाड़ी अपनाते हैं ये गुप्त टोटके | Players use These Secret Tricks Before a Match
1. लकी पैड और खास गियर का राज
कई खिलाड़ी अपने एक खास पैड, ग्लव्स या बैट को लकी मानते हैं. अगर उसी गियर के साथ उन्होंने अच्छा प्रदर्शन किया हो, तो वे उसे बार-बार इस्तेमाल करना पसंद करते हैं.
सचिन तेंदुलकर का लेफ्ट पैड पहले
सचिन तेंदुलकर (Sachin Tendulkar) हमेशा अपना लेफ्ट पैड पहले पहनते थे. यह उनका एक निजी रूटीन था, जिसे वे मैच दर मैच फॉलो करते थे. यह टोटका नहीं, बल्कि एक तय क्रम (रूटीन) था, जो उन्हें मानसिक रूप से तैयार करता था. कई खिलाड़ी मानते हैं कि एक ही क्रम में तैयारी करने से दिमाग शांत रहता है और फोकस बढ़ता है.
2. मैदान पर पहला कदम, दायां या बायां?
आपने शायद गौर नहीं किया होगा, लेकिन कुछ खिलाड़ी मैदान में उतरते समय इस बात का ध्यान रखते हैं कि पहला कदम दायां रखें या बायां.
सौरव गांगुली और दायां कदम
सौरव गांगुली (Sourav Ganguly) के बारे में कहा जाता है कि वे मैदान में उतरते समय अक्सर अपना दायां कदम पहले रखते थे. उनके लिए यह शुभ संकेत था. बड़े मैचों में जब दबाव ज्यादा होता है, तो ऐसे छोटे-छोटे रिवाज खिलाड़ी को आत्मविश्वास देते हैं, जैसे कि आज सब सही होगा.
3. जेब में लाल रंग का रुमाल
भारतीय क्रिकेट में एक दिलचस्प किस्सा जुड़ा है लाल रुमाल से. मोहम्मद अजहरुद्दीन (Mohammad Azharuddin) अक्सर अपनी जेब में लाल रंग का रुमाल रखते थे. यह उनकी पहचान भी बन गया था. कई लोगों ने इसे उनका लकी चार्म कहा. हालांकि उन्होंने कभी इसे अंधविश्वास नहीं बताया, लेकिन यह साफ था कि यह उनके आत्मविश्वास का हिस्सा बन चुका था.
4. बैटिंग ऑर्डर और समय की पाबंदी
कुछ खिलाड़ी मैदान में जाने से पहले एक खास समय पर पैड पहनते हैं या ड्रेसिंग रूम में एक निश्चित जगह पर बैठते हैं. राहुल द्रविड़ (Rahul Dravid) अपने शांत स्वभाव के लिए मशहूर थे. वे मैदान में जाने से पहले कुछ मिनट अकेले बैठकर खुद को मानसिक रूप से तैयार करते थे. यह कोई टोटका नहीं, बल्कि मानसिक अनुशासन था. लेकिन, कई युवा खिलाड़ियों ने इसे उनका लकी रिचुअल माना.
5. जर्सी, मोजे और नंबर का कमाल
कई खिलाड़ी अपने जर्सी नंबर को बेहद खास मानते हैं. कुछ खिलाड़ी मैच के दौरान मोजे या ग्लव्स नहीं बदलते, भले ही वे पुराने हो जाएं. ये सभी आदतें एक तरह से दिमाग को स्थिर रखने का तरीका हैं. जब सब कुछ अनिश्चित हो, पिच कैसी होगी, गेंद कैसे स्विंग करेगी, तो कम से कम अपनी तैयारी तय और परिचित हो.
क्या ये सच में असर करते हैं?
वैज्ञानिक रूप से देखें तो इन टोटकों का खेल के नतीजे पर कोई सीधा असर नहीं पड़ता. लेकिन, खेल मनोविज्ञान कहता है कि अगर कोई रूटीन खिलाड़ी को आत्मविश्वास देता है, तो वह प्रदर्शन बेहतर कर सकता है. मतलब लकी पैड नहीं, बल्कि उससे जुड़ा भरोसा काम करता है.