मियां-बीवी और AI, रिश्तों के बीच घुस आया आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, आधे से ज्यादा लोगों को डर, बिगड़ रहे हैं संबंध

AI in Relationships: कई लोग मानते हैं कि लोग अब बातचीत, सलाह या भावनात्मक सहारे के लिए भी AI पर निर्भर होने लगे हैं. ऐसे में सवाल उठ रहा है कि क्या AI धीरे-धीरे पति-पत्नी जैसे करीबी रिश्तों के बीच भी तीसरा व्यक्ति बनता जा रहा है?

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AI का एक बड़ा प्रभाव लोगों की सोचने की क्षमता पर भी पड़ रहा है.

Impact of AI on Relationships: आज की डिजिटल दुनिया में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) तेजी से हमारी जिंदगी का हिस्सा बनता जा रहा है. कामकाज से लेकर मनोरंजन, पढ़ाई और हेल्थ तक हर क्षेत्र में AI का उपयोग बढ़ रहा है. लेकिन अब यह तकनीक केवल मशीनों तक सीमित नहीं रही, बल्कि इंसानी रिश्तों को भी प्रभावित करने लगी है. हाल ही में हुए एक सर्वे में सामने आया कि करीब 53% लोगों का मानना है कि AI इंसानों की क्रिएटिव सोच और रिश्तों को कमजोर कर सकती है. कई लोग मानते हैं कि लोग अब बातचीत, सलाह या भावनात्मक सहारे के लिए भी AI पर निर्भर होने लगे हैं. ऐसे में सवाल उठ रहा है कि क्या AI धीरे-धीरे पति-पत्नी जैसे करीबी रिश्तों के बीच भी तीसरा व्यक्ति बनता जा रहा है?

रिश्तों में बढ़ रही AI की दखलंदाजी

पहले लोग अपनी समस्याएं दोस्तों, परिवार या जीवनसाथी से शेयर करते थे, लेकिन अब कई लोग चैटबॉट्स और AI टूल्स से सलाह लेने लगे हैं. इससे वास्तविक बातचीत कम हो रही है. जब भावनात्मक जरूरतों के लिए भी लोग मशीनों पर निर्भर होने लगते हैं, तो रिश्तों में दूरी बढ़ने लगती है.

सर्वे में सामने आई चिंता

प्यू रिसर्च सेंटर के एक बड़े सर्वे के अनुसार, करीब 50% लोगों का मानना है कि AI लोगों की मीनिंगफुल रिलेशनशिप बनाने की क्षमता को कमजोर कर सकता है, जबकि केवल 5% लोगों को लगता है कि यह इसे बेहतर बना सकता है. यानी लोगों के मन में AI को लेकर उत्साह से ज्यादा चिंता मौजूद है.

रचनात्मक सोच पर भी पड़ रहा असर

AI का एक बड़ा प्रभाव लोगों की सोचने की क्षमता पर भी पड़ रहा है. सर्वे में 53% लोगों ने कहा कि AI इंसानों की क्रिएटिविटी को कम कर सकता है, क्योंकि अब लोग खुद सोचने के बजाय AI से जवाब लेने लगे हैं. इससे धीरे-धीरे इंसानों की मौलिक सोच कमजोर हो सकती है.

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युवा सबसे ज्यादा कर रहे हैं AI का इस्तेमाल

30 साल से कम उम्र के युवा AI के बारे में ज्यादा जानते हैं और इसका इस्तेमाल भी ज्यादा करते हैं. लेकिन, दिलचस्प बात यह है कि यही युवा मानते हैं कि AI रिश्तों और रचनात्मकता दोनों को नुकसान पहुंचा सकता है. इसका मतलब है कि नई पीढ़ी AI के फायदे और नुकसान दोनों को समझ रही है.

लोग चाहते हैं AI पर ज्यादा कंट्रोल

करीब 60% लोगों का कहना है कि वे चाहते हैं कि AI उनके जीवन में कैसे इस्तेमाल हो, इस पर उनका ज्यादा कंट्रोल हो. लोग तकनीक से पूरी तरह दूर नहीं जाना चाहते, लेकिन वे चाहते हैं कि यह इंसानी जीवन और रिश्तों पर हावी न हो.

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कुछ क्षेत्रों में फायदेमंद भी है AI

हालांकि AI को लेकर चिंताएं हैं, लेकिन कई क्षेत्रों में इसे उपयोगी भी माना जा रहा है. जैसे, मौसम की भविष्यवाणी, नई दवाओं की खोज, फाइनेंशियल धोखाधड़ी पकड़ना, अपराध की जांच. इन क्षेत्रों में AI का एनालिटिकल काम इंसानों की मदद कर सकता है.

AI मॉडर्न तकनीक का एक शक्तिशाली उपकरण है, जो जीवन को आसान भी बना सकता है और जटिल भी. समस्या तब पैदा होती है जब लोग भावनात्मक जुड़ाव, कम्यूनिकेशन और रिश्तों की जगह मशीनों को देने लगते हैं. पति-पत्नी या परिवार के रिश्ते विश्वास, बातचीत और भावनाओं पर टिके होते हैं, जिन्हें कोई तकनीक पूरी तरह नहीं बदल सकती.

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