हाल ही में अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप (Donald Trump) ने अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर भारत के ऐतिहासिक इंडिया गेट (India Gate) की एक तस्वीर साझा की. उन्होंने इसे भारत का खूबसूरत विजय द्वार (India's beautiful triumphal arch) कहा और साथ ही यह घोषणा भी कर दी हमारा वाला उन सब में सबसे महान होगा! इस एक लाइन ने पूरी दुनिया का ध्यान खींच लिया. दरअसल, ट्रंप की यह टिप्पणी अमेरिका की राजधानी वाशिंगटन डी.सी. में एक विशाल विजय द्वार (Triumphal Arch) बनाने की उनकी योजना से जुड़ी थी. देखते ही देखते यह पोस्ट वायरल हो गई और इतिहास, राजनीति व प्रतीकों (Symbolism) पर एक नई बहस छिड़ गई. आइए जानते हैं इस वायरल पोस्ट से जुड़े ऐसे 5 रोचक फैक्ट्स, जो शायद आप पहले से नहीं जानते होंगे.
डोनाल्ड ट्रंप की पोस्ट से जुड़े 5 अनसुने फैक्ट्स | 5 Little-known Facts Related to Donald Trump's Post
1. इंडिया गेट सिर्फ एक मेहराब नहीं, इतिहास की पहचान है
इंडिया गेट नई दिल्ली का एक प्रतिष्ठित युद्ध स्मारक है, जिसे ब्रिटिश वास्तुकार एडविन लुटियंस ने डिजाइन किया था. इसका उद्घाटन 1931 में हुआ था. यह स्मारक प्रथम विश्व युद्ध और तृतीय एंग्लो-अफगान युद्ध में शहीद हुए लगभग 70,000 भारतीय सैनिकों की याद में बनाया गया. इसके नीचे जलती अमर जवान ज्योति उन बलिदानों की शाश्वत गवाही है.
2. वॉशिंगटन डी.सी. में अब तक कोई विजय द्वार नहीं है
यह जानकर हैरानी होती है कि दुनिया की सबसे चर्चित राजधानियों में से एक वॉशिंगटन डी.सी. में आज तक कोई भी ट्रायम्फल आर्च नहीं है. दुनिया के लगभग 57 शहरों में ऐसे विजय द्वार मौजूद हैं, लेकिन अमेरिकी राजधानी इस लिस्ट में शामिल नहीं रही, शायद इसी कमी को ट्रंप सबसे महान आर्च बनाकर पूरा करना चाहते हैं.
3. इस प्रस्तावित स्मारक का नाम बताया जा रहा है इंडिपेंडेंस आर्च
ट्रंप की कल्पना में बन रहे इस स्मारक को लोग इंडिपेंडेंस आर्च कह रहे हैं. यह नाम अमेरिका की स्वतंत्रता की भावना को दर्शाता है और 2026 में मनाई जाने वाली अमेरिकी स्वतंत्रता की 250वीं वर्षगांठ से भी जुड़ता है.
4. ऊंचाई में इंडिया गेट से भी बड़ा होगा आर्च
इंडिया गेट की ऊंचाई लगभग 42 मीटर (138 फीट) है. ट्रंप की योजना के अनुसार अगर यह आर्च बना, तो यह इंडिया गेट से भी ऊंचा होगा और दुनिया के सबसे ऊंचे विजय द्वारों में गिना जाएगा.
5. इंडिया गेट का ज़िक्र, भारत की कल्चरल सिग्निफिकेंट का कन्फेशन
ट्रंप द्वारा इंडिया गेट को उदाहरण के रूप में सामने रखना सिर्फ एक वास्तुकला तुलना नहीं है. यह भारत की ऐतिहासिक और सांस्कृतिक पहचान को वैश्विक मंच पर स्वीकार करने जैसा भी है. एक तस्वीर और एक नारा कैसे बड़े नेता प्रतीकों और स्मारकों के जरिए संदेश देते हैं इस पोस्ट ने यही दिखाया.
डोनाल्ड ट्रंप की यह वायरल पोस्ट सिर्फ एक आर्च की बात नहीं करती, बल्कि इतिहास, राष्ट्रवाद और सांस्कृतिक प्रतीकों पर वैश्विक चर्चा को जन्म देती है. इंडिया गेट से शुरू हुई यह बातचीत दुनिया को यह याद दिलाती है कि स्मारक सिर्फ पत्थर नहीं होते, वे यादें, विचार और पहचान भी होते हैं.