तलाकशुदा सिंगल मदर हूं, 10 साल से अकेले घूम रही हूं, सेफ्टी के लिए करती हूं ये, आज तक कहीं नहीं फंसी

Real Life Experience of a Single Mother and Solo Traveler: अर्चना को लगा कि उनकी लाइफ बस यही सब करते खत्म हो जाएगी. अर्चना कहती हैं, लेकिन ऐसा नहीं है, मैं जिंदगी से हारी नहीं और मैंने जॉब तलाशी, काम शुरू किया और धीरे-धीरे बेटे के साथ ट्रेवल शुरू किया. और अब वे तकरीबन पूरा भारत घूम चुकी हैं.

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Real Life Experience of a Single Mother: अर्चना सिंघल एक कॉर्पोरेट कर्मचारी हैं और वे एक सिंगल मदर हैं. हाल ही में वे मुझे एक छोटी सी ट्रिप के दौरान मिलीं. जब उनसे बात हुई तो उनकी कहानी ने मुझे हैरान कर दिया. अर्चना बीते 10 साल से सोलो ट्रेवल करती हैं. उनकी कहानी आपके दिल को छू लेगी. अर्चना सिंघल को शादी के कुछ महीनों बाद ही दहेज के लिए प्रताड़ित किया जाने लगा था. वे अक्सर अपने ससुराल की तरफ से इस बात का दबाव झेलती थीं कि उनके पति का बिजनेस सेट करने के लिए वे अपने मायके से पैसे लाएं. अर्चना की मानसिक हालत शादी के महज 6 महीने के अंदर खराब हो चुकी थी. वे अपनी जॉब में ठीक तरह से परफॉर्म नहीं कर पा रही थीं और दबाव में आकर उनको वह नौकरी भी छोड़नी पड़ी थी.

अर्चना ने बताया कि शादी को आठ महीने हुए तो दबाव बनाने के लिए उनके पति उन्हें मायके छोड़ गए कि अगर पैसे नहीं दिए तो वे अर्चना को वापस नहीं लेकर जाएंगे. मां के पास आकर अर्चना को पता चला कि वे गर्भवती हैं. इसके बाद उन्होंने खुद ही ठान लिया कि वे अब ससुराल वापस नहीं जाएंगी. उसके बाद तलाक की लंबी जंग और सिंगल मदर होने के नाते जिम्मेदारियों का बड़ा तांता.

अर्चना को लगा कि उनकी लाइफ बस यही सब करते खत्म हो जाएगी. अर्चना कहती हैं, लेकिन ऐसा नहीं है, मैं जिंदगी से हारी नहीं और मैंने जॉब तलाशी, काम शुरू किया और धीरे-धीरे बेटे के साथ ट्रेवल शुरू किया. और अब वे तकरीबन पूरा भारत घूम चुकी हैं.

अर्चना ने कहा -

मैं एक सिंगल मदर हूं और मुझे घूमना फिरना बहुत पसंद है. मेरा बेटा आज 18 साल का हो गया है. जब वह 8 साल का था तबसे मैंने अकेले ट्रेवल करना शुरू किया था और आज मुझे सोलो ट्रेवल करते हुए 10 साल हो गए हैं.

मेरे बेटे को मैं उसके पापा जैसा नहीं बनाना चाहती. मैं चाहती हूं कि वह किसी पर निर्भर न हो और दूसरे के स्पेस की रिस्पेक्ट करे. इसलिए मैंने निकलना शुरू किया और अपने शौक को भी समय दिया.

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अर्चना ने अपने सोलो ट्रेवल के कुछ टिप्स साझा किए:

  • हमेशा अपने गंतव्य के बारे में जानकारी रखें
  • अपने फोन में इमर्जेंसी नंबर रखें
  • अपने साथ जरूरी दस्तावेज रखें
  • अपने आसपास के लोगों से सतर्क रहें
  • अपने शेड्यूल को फ्लेक्सिबल रखें

पहले मैं बेटे के साथ जाती थी. मां और परिवार के दूसरे लोगों को फ्री होने का वेट करती थी कि कब कोई फ्री होगा तो मेरे साथ चलेगा. लेकिन जब मुझे यह समझ आया कि दूसरों के साथ समय सिंक करने के इंतजार में तो मैं जा ही नहीं पाऊंगी, तबसे मैंने अकेले जाना शुरू कर दिया.

हमने अर्चना से पूछा कि उन्हें अकेले जाने से डर नहीं लगता तो अर्चना ने कहा- 

डर, अरे मन कैसे करूं. लगता था न. बहुत लगता था. मैं तो एक पापा की परी थी. लेकिन जब पति ने सपनों की दुनिया से निकाला तो समझ आया कि असली दुनिया कितनी डरावनी है. लेकिन अब जब इस दुनिया में आ गई हूं तो लड़ना तो है...

अर्चना ने बताया कि वे कुछ टिप्स फॉलो करती हैं. हर बार ट्रेवल से पहले उनके कुछ चेक प्वाइंट्स हैं, जिन्हें वे मिस नहीं करतीं. ये टिप्स उन्होंने हमारे साथ भी साझा किए :

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सोलो ट्रेवलर महिलाओं के लिए सेफ्टी टिप्स

  1. अपने पेपर पूरे रखें : जब आप अकेले होती हैं तो आपके डॉक्यूमेंट्स ही आपकी पहचान होते हैं. आधार कार्ड, पासपोर्ट और होटल की बुकिंग की हार्ड कॉपी हमेशा साथ रखें. सिर्फ फोन के भरोसे न रहें क्योंकि नेटवर्क कभी भी धोखा दे सकता है. मैंने हमेशा अपने बैग के एक गुप्त पॉकेट में इन पेपर्स की फोटोकॉपी रखी है जो मुसीबत में काम आती है.
  2. लोकल लैंग्वेज के बेसिक फ्रेज सीख लें : जहां भी जा रही हैं वहां की भाषा के कुछ शब्द जैसे नमस्ते, मदद, रास्ता, और शुक्रिया जरूर सीख लें. जब आप किसी लोकल इंसान से उनकी भाषा में बात करती हैं तो एक कनेक्शन बनता है. इससे लोग आपकी मदद करने में ज्यादा दिलचस्पी दिखाते हैं और आप वहां के माहौल में जल्दी घुल मिल जाती हैं.
  3. पानी की कमी कभी न होने दें : ट्रेवलिंग के दौरान हम अक्सर पानी पीना भूल जाते हैं. हाइड्रेटेड रहना बहुत जरूरी है क्योंकि थकान से दिमाग धीमा काम करने लगता है. हमेशा एक अच्छी क्वालिटी की बोतल साथ रखें. साफ पानी पीना आपकी सेहत के लिए सबसे पहली प्राथमिकता होनी चाहिए.
  4. चार्जर, पावरबैंक और टॉर्च हमेशा साथ रखें : आजकल के जमाने में फोन ही हमारा मैप है और हमारा बटुआ भी. मैंने देखा है कि पहाड़ों या जंगलों में बिजली अक्सर चली जाती है. ऐसे में पावरबैंक और एक छोटी टॉर्च आपकी जान बचा सकती है. रात के वक्त अगर कहीं रुकना पड़े तो टॉर्च बहुत काम आती है.
  5. कैबिन बैग स्मार्टली बनाएं : फ्लाइट या बस में अपना कैबिन बैग ऐसा रखें कि उसमें आपकी दवाइयां, एक जोड़ी एक्स्ट्रा कपड़े और कीमती सामान हो. अगर आपका मुख्य बैग कहीं मिसप्लेस हो जाये तो भी आपके पास सर्वाइव करने का सामान होना चाहिए. मैंने अपनी लाइफ में कई बार देखा है कि स्मार्ट पैकिंग ही आधे तनाव को खत्म कर देती है.
  6. लाइव लोकेशन शेयर करना न भूलें : अपने किसी भरोसेमंद दोस्त या घर वाले के साथ हमेशा अपनी लाइव लोकेशन शेयर करके रखें. उन्हें पता होना चाहिए कि आप इस वक्त कहां हैं. गूगल मैप्स का यह फीचर सोलो ट्रेवलर्स के लिए किसी वरदान से कम नहीं है.
  7. जगह के बारे में पूरी जांच कर लें : निकलने से पहले उस शहर या गांव के बारे में इंटरनेट पर रिसर्च करें. वहां के कौन से इलाके सेफ हैं और कहां रात को नहीं जाना चाहिए यह सब पहले से पता होना चाहिए. रिव्यूज पढ़ना कभी न भूलें खासकर सोलो फीमेल ट्रेवलर्स के लिखे हुए रिव्यूज.
  8. स्थानीय खबरों से अवगत रहें : आप जहां जा रही हैं वहां का मौसम कैसा है या वहां कोई प्रोटेस्ट तो नहीं चल रहा यह जानना जरूरी है. लोकल न्यूज़ ऐप या ट्विटर पर उस जगह का नाम सर्च करती रहें. इससे आप अनचाही मुसीबतों से बची रहेंगी.
  9. हेल्पलाइन नंबर नोट कर लें : अपने फोन में और एक डायरी में वहां के लोकल पुलिस, एम्बुलेंस और टूरिस्ट हेल्पलाइन के नंबर सेव कर लें. मुसीबत के वक्त इंटरनेट ढूंढने का समय नहीं होता इसलिए ये नंबर आपकी उंगलियों पर होने चाहिए.
  10. रात को सावधानी बरतें : रात के वक्त अनजान रास्तों पर जाने से बचें. अगर आपको देर हो रही है तो हमेशा रजिस्टर्ड कैब या पब्लिक ट्रांसपोर्ट का ही इस्तेमाल करें. होटल वापस आने का समय फिक्स रखें और कोशिश करें कि अंधेरा होने से पहले आप सेफ जगह पहुंच जायें.
  11. एल्कोहल का ध्यान रखें : अगर आपको ड्रिंक करना पसंद है तो मेरा सुझाव यही है कि इसे अपने होटल के कमरे में ही एन्जॉय करें. अनजान जगह पर और अनजान लोगों के साथ ड्रिंक करना रिस्की हो सकता है. होश में रहना ही आपकी सबसे बड़ी सुरक्षा है.
  12. अंजान लोगों से प्राइवेसी बनाए रखें : सफर में नए लोग मिलते हैं बातें होती हैं और अच्छा भी लगता है. पर अपनी निजी जानकारी जैसे कि आप किस होटल में रुकी हैं या आपका कमरा नंबर क्या है कभी किसी से शेयर न करें. अपनी नीजता बनाए रखना बहुत जरूरी है.
  13. जैसा देश वैसा भेष : ट्रेवलिंग का मतलब सिर्फ स्टाइल मारना नहीं है बल्कि वहां के कल्चर का सम्मान करना भी है. ऐसी जगह जहां रूढ़िवादी सोच है वहां वैसे ही कपड़े पहनें जो आपको भीड़ में अलग न दिखाएं. जब आप वहां के लोगों की तरह दिखती हैं तो आप पर बुरी नजर पड़ने के चांस कम हो जाते हैं.

सोलो ट्रेवलिंग आपको एक नया इंसान बनाती है. यह आपको खुद पर भरोसा करना सिखाती है. अर्चना का तो यही कहना है कि डर को डस्टबिन में डालो और निकल पड़ो अपनी अगली ट्रिप पर बस इन छोटी छोटी बातों का ख्याल रखना. अर्चना की कहानी उन सभी महिलाओं के लिए प्रेरणा है जो अपने जीवन को बदलना चाहती हैं और अपने शौक को समय देना चाहती हैं.

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