Dandeshwar Mahadev Temple: उत्तराखंड के अल्मोड़ा जिले की पहाड़ियों में, घने देवदार के पेड़ों के बीच जागेश्वर धाम स्थित है. इसी जगह पर दंडेश्वर महादेव मंदिर (Shiv Mandir) भी है. पहाड़ों की ठंडी हवा, पेड़ों की खुशबू और चारों ओर फैली शांति इस जगह को खास बनाती है. यहां पहुंचते ही आपको एक अलग सा माहौल देखने को मिलता है. इस मंदिर (Shiv Mandir Uttarakhand) का माहौल और वातावरण को अलग हैं ही इसका इतिहास और भी निराला है. यहां वो हुआ था जो इतिहास में कभी नहीं हुआ. सबसे पालनहार, सबके कर्मों का लेखा जोखा रखने वाले भोलेनाथ शिवजी (Bholenath Mandir) को यहां श्राप मिला था.
यहां ने शिवजी को मिला श्राप
स्थानीय मान्यताओं के अनुसार, यह वही जगह है जहां भगवान शिव तपस्या करने आए थे. उनके साथ सप्तऋषि भी यहां ध्यान में लीन थे. कहते हैं कि तपस्या में लीन शिव का नीलवर्ण स्वरूप इतना आकर्षक और अलौकिक था कि ऋषियों की पत्नियां उन्हें छुपकर देखने लगीं और उनके रूप से मोहित हो गईं.
जब ऋषियों ने यह देखा तो वे क्रोधित हो उठे. गुस्से में आकर उन्होंने शिव को श्राप दे दिया. मान्यता है कि उसी श्राप के कारण शिव शिला रूप में परिवर्तित हो गए. यही कारण है कि इस मंदिर में शिव का स्वरूप अलग और अनोखा माना जाता है.
यहां मिलती है मन को शांति
दंडेश्वर महादेव मंदिर परिसर में बैठकर ध्यान लगाने की परंपरा भी है. यहां आने वाले श्रद्धालु कुछ समय शांत बैठकर ध्यान करते हैं. उनका मानना है कि इस जगह की ऊर्जा मन को शांति देती है. मंदिर का वातावरण बहुत शांत और सुकून देने वाला है. शहर की भागदौड़ से दूर यह जगह सुकून देने वाली है.
जागेश्वर धाम का महत्व
दंडेश्वर महादेव मंदिर, जागेश्वर धाम क्षेत्र का हिस्सा है, जो उत्तराखंड के प्रमुख शिव स्थलों में गिना जाता है. यहां कई प्राचीन मंदिर मौजूद हैं. धार्मिक दृष्टि से यह स्थान शिव भक्तों के लिए विशेष महत्व रखता है. हर साल बड़ी संख्या में श्रद्धालु यहां दर्शन के लिए पहुंचते हैं, खासकर सावन और महाशिवरात्रि के दौरान.