Chaitra Navratri 2026: चैत्र नवरात्र का पावन पर्व 19 मार्च से शुरू हो चुका है. इस दौरान भक्त मां दुर्गा की आराधना में विभिन्न फूल, फल और मिठाइयां चढ़ाते हैं, लेकिन शास्त्रों और धार्मिक मान्यताओं के अनुसार माता रानी को लाल-लाल दानों वाला फल दादिमा अत्यंत प्रिय है.
दादिमा या अनार का उल्लेख धर्म शास्त्रों में भी मिलता है, जिसके अनुसार सभी फलों में अनार देवी को सबसे अधिक प्रिय है. इसे अर्पित करने से सुख-समृद्धि, संतान सुख, आरोग्य और कर्ज मुक्ति का आशीर्वाद प्राप्त होता है. नवरात्रि के दौरान मां दुर्गा को अनार चढ़ाने की परंपरा बहुत पुरानी है, जो विशेष फलदायी माना जाता है. यह न केवल माता को प्रसन्न करता है, बल्कि परिवार के स्वास्थ्य और समृद्धि के लिए भी लाभकारी साबित होता है.
अनार की लालिमा शक्ति, जीवन ऊर्जा और सकारात्मकता का प्रतीक मानी जाती है. इसकी गहरी लाल रंगत मां दुर्गा की शक्ति और रौद्र रूप से भी जुड़ी हुई है.
धार्मिक महत्व के साथ सेहत के लिए भी फायदेमंद
धार्मिक मान्यता है कि नवरात्रि में अनार चढ़ाने से घर में सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है और परिवार में सौभाग्य बढ़ता है. कई भक्त इसे विशेष रूप से कर्ज से मुक्ति और आर्थिक समृद्धि के लिए अर्पित करते हैं. अनार को अखंड फल माना जाता है, जैसे नारियल या श्रीफल को बारह महीने का फल कहते हैं, वैसे ही अनार भी पूजा में अत्यंत शुभ फल है.
अनार केवल धार्मिक महत्व का ही नहीं, बल्कि औषधीय गुणों से भी भरपूर है. आयुर्वेदिक ग्रंथों और 12वीं शताब्दी के संस्कृत ग्रंथ 'मानसोल्लास' में अनार को पवित्र और अत्यधिक लाभकारी बताया गया है. यह फल रक्त शुद्ध करता है, एनीमिया या खून की कमी दूर करता है, पाचन तंत्र को मजबूत बनाता है, हृदय रोगों से बचाव करता है और इम्युनिटी बढ़ाता है.
अनार ऐसा फल है, जिसका सेवन साल भर किया जा सकता है. इसमें भरपूर मात्रा में विटामिन सी, एंटीऑक्सीडेंट, फाइबर और पोटैशियम पाए जाते हैं. गर्मी में यह ठंडक प्रदान करता है और त्वचा को स्वस्थ रखता है. अनार का जूस पीने से थकान दूर होती है और शरीर में नई ऊर्जा आती है.
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