क्या मलासन कब्ज में मदद करता है? 5 मिनट में पेट साफ करने के लिए क्या करें

अगर आप कब्ज की समस्या से जूझ रहे हैं तो मलासन आपके लिए किसी चमत्कार से कम नहीं है. इस आसन को दिन में बस एक बार करने से आप कब्ज की समस्या से छुटकारा पा सकते हैं.

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आजकल की भागती-दौड़ती जिंदगी में लोगों के पास अपनी सेहत के लिए समय निकालना सबसे बड़ी चुनौती बन गया है. ऑफिस का प्रेशर, लंबा स्क्रीन टाइम और अनियमित खानपान सीधे पाचन तंत्र पर असर डाल रहा है. बाहर का तला-भुना और प्रोसेस्ड फूड रोजमर्रा की आदत बन चुका है, जिसकी वजह से कब्ज जैसी समस्या तेजी से बढ़ रही है. कब्ज सिर्फ पेट की परेशानी नहीं है, बल्कि ये पूरे शरीर की एनर्जी, मूड और इम्युनिटी को प्रभावित करता है. अगर पेट साफ नहीं रहता तो दिनभर भारीपन, सुस्ती और चिड़चिड़ापन बना रहता है. ऐसे में योग का एक सरल आसन आपकी इस बड़ी समस्या का आसान समाधान बन सकता है. रोजाना कुछ मिनट का अभ्यास आपके डाइजेशन सिस्टम को फिर से सही ट्रैक पर ला सकता है.

मलासन क्या है और क्यों खास है (What Is Malasana And Why It Is Important)

Malasana benefits for constipation : मलासन एक पारंपरिक योगासन है जिसे स्क्वाट पोज भी कहा जाता है. ये आसन पाचन तंत्र को एक्टिव करने में अहम भूमिका निभाता है. मलासन करने से पेट के अंगों पर हल्का दबाव पड़ता है, जिससे पाचन क्रिया तेज होती है. ये बड़ी आंत यानी कोलन को सही पोजिशन में लाने में मदद करता है, जिससे पेट साफ करना आसान हो जाता है. कब्ज, गैस और ब्लोटिंग जैसी समस्याओं में ये आसन काफी फायदेमंद माना जाता है. इसके अलावा ये पेल्विक फ्लोर को रिलैक्स करता है, जिससे खासतौर पर महिलाओं की पेल्विक हेल्थ बेहतर होती है.

मलासन करने के फायदे (Benefits Of Doing Malasana)

मलासन रोज करने से डाइजेशन मजबूत होता है. पेट साफ रहने से शरीर हल्का महसूस करता है और एनर्जी लेवल बेहतर होता है. ये आसन आंतों की मूवमेंट को बेहतर करता है, जिससे कब्ज की समस्या धीरे-धीरे कम होती है. साथ ही कमर, कूल्हों और जांघों की मांसपेशियां मजबूत होती हैं. लंबे समय तक बैठकर काम करने वालों के लिए ये आसन खासतौर पर फायदेमंद है.

मलासन कैसे और कब करें (How And When To Do Malasana)

मलासन करने के लिए सुबह का समय सबसे बेहतर माना जाता है. खाली पेट मैट पर खड़े होकर पैरों को थोड़ा चौड़ा रखें. अब धीरे-धीरे स्क्वाट पोज में आएं और हिप्स को जमीन की ओर झुकाएं. दोनों हाथों को छाती के सामने जोड़कर प्रार्थना की मुद्रा में रखें. ध्यान रखें कि रीढ़ की हड्डी सीधी रहे और एड़ियां जमीन पर टिकी रहें. इस पोज में 2 से 5 मिनट तक आराम से सांस लेते रहें. शुरुआत में कम समय रखें और धीरे-धीरे अवधि बढ़ाएं. नियमित अभ्यास से इसका असर साफ नजर आने लगता है.

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