Bahumul Shakti Vikasak: अनियमित जीवनशैली कई मानसिक और शारीरिक समस्याओं को जन्म देने में अहम भूमिका निभाते हैं. हालांकि, योगासन को दिनचर्या में शामिल कर राहत पाई जा सकती है. ऐसी ही एक योग क्रिया का नाम स्कन्ध तथा बाहुमूल-शक्ति-विकासक है. मोरारजी देसाई नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ योगा ने स्कन्ध तथा बाहुमूल-शक्ति-विकासक क्रिया को सूक्ष्म व्यायाम के रूप में प्रचारित किया है. यह योग अभ्यास विशेष रूप से कंधों (Shoulders), बाहुमूल (Armpit) और ऊपरी शरीर की मांसपेशियों (Muscles) को मजबूत बनाने के लिए डिजाइन किया गया है.
बाहुमूल-शक्ति-विकासक करने के फायदे (Benefits Of Bahumul Shakti Vikasak)
एक्सपर्ट के अनुसार, इस क्रिया के नियमित अभ्यास से पूरे शरीर को लाभ मिलता है और यह क्रिया मांसपेशियों को मजबूत करती है. इससे ऊपरी पीठ, गर्दन और कंधों में लचीलापन बढ़ता है, तनाव कम होता है और आराम मिलता है. अभ्यास के दौरान कोर (पेट की मांसपेशियां), ग्लूट्स (नितंब) और क्वाड्रिसेप्स (जांघ की सामने वाली मांसपेशियां) लंबे समय तक सक्रिय रहती हैं, जिससे शरीर का संतुलन और स्थिरता सुधरती है. यह शोल्डर, कंधों के दर्द, गर्दन के विकार और पीठ की समस्याओं में काफी राहत देता है. कंधे सुंदर, सुडौल और मजबूत बनते हैं.
कैसे करें बाहुमूल-शक्ति-विकासक? (How To Do Bahumul Shakti Vikasak)
यह व्यायाम आसान है और घर पर आसानी से किया जा सकता है. नियमित अभ्यास से पोस्चर सुधरता है, तनाव दूर होता है और ऊपरी शरीर की शक्ति बढ़ती है.
- इसके अभ्यास के लिए ताड़ासन पोज में सीधे खड़े हों.
- ठोड़ी को छाती से लगाएं और दोनों हाथों की मुट्ठी बंद करें.
- इसके बाद सांस अंदर लेते हुए कंधों को कान की ओर ऊपर उठाएं और कम से कम 3 सेकंड तक रोकें फिर सांस छोड़ते हुए कंधों को नीचे लाएं.
- इसे 5 से 10 बार दोहराएं. गति धीमी और नियंत्रित रखें.
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योग विशेषज्ञों का कहना है कि यह क्रिया फिजिकल स्ट्रेंथ के साथ मानसिक शांति भी प्रदान करती है. योग के इस अभ्यास को अपनाकर आप रोजमर्रा की थकान और कंधों की जकड़न से मुक्ति पा सकते हैं.