भारत की नर्सें क्यों छोड़ रही हैं देश? जापान बन रहा है नया ड्रीम जॉब डेस्टिनेशन

जापान में तेजी से बुज़ुर्ग होती आबादी के कारण हेल्थकेयर और केयरगिविंग सेक्टर में स्टाफ की भारी कमी है. इसी जरूरत को पूरा करने के लिए जापान सरकार ने SSW वीजा शुरू किया है, जिसके तहत भारतीय नर्सों और केयरगिवर्स को नौकरी के अवसर मिल रहे हैं.

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भारत और जापान मिलकर नर्सों और केयरगिवर्स को तैयार कर रहे हैं.

Indian Nurses Japan Jobs: भारत की बड़ी संख्या में नर्स और केयरगिवर अब विदेश में नौकरी के नए ऑप्शन ढूंढ रही हैं. कुछ सालों में जापान ऐसा देश बनकर सामने आया है, जहां भारतीय हेल्थकेयर वर्कर्स की मांग तेजी से बढ़ी है. इसकी सबसे बड़ी वजह जापान की तेजी से बूढ़ी होती आबादी और केयर स्टाफ की भारी कमी है. जापान में बुज़ुर्गों की संख्या लगातार बढ़ रही है, लेकिन उन्हें संभालने वाले लोग कम होते जा रहे हैं. इसी कमी को पूरा करने के लिए जापान सरकार ने विदेशों से वर्कर्स बुलाने का फैसला किया है.

भारतीय नर्सों के लिए स्पेशल वीजा

जापान ने 2019 में SSW वीजा (Specified Skilled Worker Visa) शुरू किया. यह एक सरकारी और बेहतरीन तरीका है, जिसके जरिए विदेशों से केयरगिवर और अन्य स्किल्ड वर्कर्स को जापान में काम करने की अनुमति मिलती है. इस वीजा के लिए कैंडिडेट को जापानी भाषा का बेसिक नॉलेज होना चाहिए. एक भाषा टेस्ट (JLPT N4 या JFT-Basic) पास करना होता है. केयर सेक्टर से जुड़ा स्किल टेस्ट देना होता है. अगर ये शर्तें पूरी हो जाएं, तो जापान में केयरगिवर के तौर पर नौकरी मिल सकती है.

भारतीय नर्सों के लिए मौके कैसे बढ़े

2024 में मेघालय की 27 नर्सों ने जापानी भाषा सीखी और जापान में केयर सेक्टर की नौकरी हासिल की. ये सब एक राज्य-सपोर्टेड प्रोग्राम के तहत हुआ. इनमें से कई नर्सों को वीजा मिल चुका है और कुछ ने जापान में काम भी शुरू कर दिया है. इससे साफ है कि अगर ट्रेनिंग सही हो, तो ये तरीका अच्छा है.

भारत और जापान की पार्टनरशिप

भारत और जापान मिलकर नर्सों और केयरगिवर्स को तैयार कर रहे हैं. कई राज्य सरकारें और स्किल डेवलपमेंट संस्थान जापानी भाषा और केयर ट्रेनिंग पर जोर दे रहे हैं. 2025 के इंडिया-जापान समिट में दोनों देशों ने तय किया कि अगले पांच सालों में 50,000 से ज्यादा भारतीय स्किल्ड वर्कर्स जापान भेजे जाएंगे. इसमें नर्सिंग और केयरगिविंग अहम सेक्टर हैं.

जापानी भाषा क्यों जरूरी है

जापान में काम करने और रहने के लिए भाषा बहुत अहम है. इसी वजह से भारत में जापानी भाषा सीखने वालों की संख्या तेजी से बढ़ी है. 2024 तक 50,000 से ज्यादा भारतीय जापानी सीख रहे थे. कई कैंडिडेट मानते हैं कि भाषा सीखना मुश्किल है, लेकिन नौकरी पाने के लिए ये जरूरी कदम है.

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