Waiting List Rules : संघ लोक सेवा आयोग (UPSC) की परीक्षा पास करना लाखों युवाओं का सपना होता है. अक्सर मुख्य Main List के साथ-साथ एक रिजर्व लिस्ट (Reserve List) भी जारी की जाती है. हाल ही में आंध्र प्रदेश की सुजीता जैसी कई मिसालें सामने आई हैं, जिन्हें एक साल बाद रिजर्व लिस्ट के जरिए बुलावा आया . अगर आपका नाम भी रिजर्व लिस्ट में है, तो निराश होने की जरूरत नहीं है, क्योंकि यहां से भी अफसर बनने का रास्ता खुलता है.
क्या होती है UPSC रिजर्व लिस्ट?
आयोग मुख्य सूची के अलावा एक आरक्षित सूची तैयार करता है. इसमें कुल रिक्तियों के प्रत्येक वर्ग (Category) के लगभग 50% उम्मीदवारों को रखा जाता है . उदाहरण के लिए, यदि किसी कैटेगरी में 10 सीटें हैं, तो कम से कम 5 उम्मीदवारों को रिजर्व लिस्ट में जगह मिल सकती है .
रिजर्व लिस्ट से नौकरी कैसे मिलती है?
रिजर्व लिस्ट का एक्टिव होना पूरी तरह से मंत्रालयों की मांग पर निर्भर करता है. इसके पीछे मुख्य रूप से दो कारण होते हैं:
पद छोड़नाअगर मुख्य सूची का कोई उम्मीदवार जॉइन नहीं करता या किसी कारणवश पद खाली रह जाता है .
कैडर प्राथमिकताकई बार उम्मीदवार अपनी पसंद की सर्विस (जैसे IAS की जगह IPS मिलना) न मिलने पर पद छोड़ देते हैं, जिससे नीचे वाले उम्मीदवारों के लिए रास्ता साफ हो जाता है.
जब संबंधित मंत्रालय यूपीएससी से औपचारिक अनुरोध करता है, तब मेरिट के आधार पर रिजर्व लिस्ट से उम्मीदवारों को बुलाया जाता है .
चयन की शर्तें और अंक
रिजर्व लिस्ट में आने के लिए भी एक न्यूनतम योग्यता अंक निर्धारित हैं:
सामान्य (General/EWS): 100 में से कम से कम 50 अंक .
OBC: 45 अंक .
SC/ST/PwBD: 40 अंक .
कब तक रहती है इसकी वैलिडिटी?
रिजर्व लिस्ट की अपनी एक एक्सपायरी डेट होती है. यह लिस्ट सिफारिश पत्र जारी होने की तारीख से 2 साल तक वैध रहती है . हालांकि, यदि उसी पद के लिए अगली नई सेक्लेशन प्रोसेस पूरी हो जाती है, तो पुरानी रिजर्व लिस्ट अपने आप Null and Void हो जाती है .
कौन सी सर्विस और सीनियरिटी मिलेगी?
रिजर्व लिस्ट से चुने गए उम्मीदवारों को वही सर्विस मिलती है जो खाली रह गई हो. आपकी सीनियरिटी का निर्धारण संबंधित मंत्रालय या विभाग द्वारा किया जाता है . चयन के बाद उम्मीदवारों को जॉइनिंग फॉर्मेलिटीज के लिए सीधे उस मंत्रालय से संपर्क करना होता है जिसने वैकेंसी निकाली थी .