UP Double Govt Job: उत्तर प्रदेश के बाराबंकी में फर्जी दस्तावेजों के सहारे दो अलग-अलग सरकारी विभागों में लंबे समय तक नौकरी करने का एक चौंकाने वाला मामला सामने आया है. करीब 33 सालों तक दोनों विभागों से वेतन और अन्य सुविधाएं लेने वाले आरोपी को अब अदालत ने सात वर्ष के कठोर कारावास की सजा सुनाई है. इसके साथ ही उस पर 30 हजार रुपये का अर्थदंड भी लगाया गया है. कई साल पहले आरोपी को पद से बर्खास्त कर दिया गया था, जिसके बाद अब कोर्ट का फैसला आया है.
साल 2009 में आया था मामला
मामला बाराबंकी और प्रतापगढ़ जिलों से जुड़ा हुआ है. अभियोजन पक्ष के अनुसार, 20 फरवरी 2009 को बाराबंकी शहर की आवास विकास कॉलोनी निवासी प्रभात सिंह ने पुलिस में शिकायत दर्ज कराई थी. अपनी तहरीर में उन्होंने आरोप लगाया था कि सतरिख थाना क्षेत्र के नरौली गांव निवासी जयप्रकाश सिंह ने कूटरचित और फर्जी दस्तावेजों के सहारे धोखाधड़ी कर दो अलग-अलग स्थानों पर सरकारी नौकरी हासिल कर ली है.
बिना बताए दो सरकारी नौकरी
शिकायत के बाद मामले की जांच शुरू की गई. इस दौरान जनसूचना अधिकार (RTI) के तहत मांगी गई जानकारी से पूरे मामले का खुलासा हुआ. जांच में पाया गया कि जयप्रकाश सिंह की नियुक्ति बाराबंकी जिले में बेसिक शिक्षा विभाग में जून 1993 में शिक्षक पद पर हुई थी. वहीं इससे पहले वह प्रतापगढ़ जिले में नॉन मेडिकल असिस्टेंट के पद पर 26 दिसंबर 1979 से कार्यरत थे.जांच में यह भी सामने आया कि आरोपी ने दोनों विभागों में एक साथ सेवा की और लंबे समय तक दोनों जगहों से वेतन और अन्य सरकारी सुविधाओं का लाभ उठाता रहा. इस दौरान उसने अपने सेवा अभिलेखों और दस्तावेजों में हेरफेर कर इस तथ्य को छिपाए रखा, जिससे लंबे समय तक यह मामला सामने नहीं आ पाया.
मामले के खुलासे के बाद पुलिस ने जांच कर आरोप पत्र कोर्ट में दाखिल किया. अदालत में सुनवाई के दौरान अभियोजन पक्ष ने दस्तावेजी साक्ष्य और गवाहों के आधार पर आरोपी के खिलाफ मजबूत तर्क दिए. सभी साक्ष्यों और दलीलों पर विचार करने के बाद मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट सुधा सिंह की अदालत ने आरोपी जयप्रकाश सिंह को दोषी करार दिया. अदालत ने उसे सात साल के कठोर कारावास की सजा सुनाने के साथ ही 30 हजार रुपये का जुर्माना भी लगाया है.
अदालत के इस फैसले को सरकारी सेवाओं में फर्जीवाड़ा और धोखाधड़ी के मामलों में एक सख्त संदेश के रूप में देखा जा रहा है. अधिकारियों का कहना है कि इस तरह के मामलों में दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी ताकि भविष्य में कोई भी व्यक्ति फर्जी दस्तावेजों के सहारे सरकारी व्यवस्था का दुरुपयोग न कर सके.
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