Rajasthan SI Recruitment 2021 Paper Leak: राजस्थान एसआई भर्ती 2021 एक ऐसी विवादित भर्ती जिसने ना केवल युवाओं बल्कि राजनेताओं को भी परेशान किया हुआ है. 2021 की इस भर्ती में बड़े स्तर पर फर्जीवाड़े और पेपर लीक के आरोप लगे. इन आरोपों के बाद तत्कालीन मुख्यमंत्री अशोक गहलोत की सरकार की जमकर आलोचना हुई. प्रदेश में युवाओं और बीजेपी नेताओं के नेतृत्व में कई प्रदर्शन हुए. इस मुद्दे ने इतना तूल पकड़ा कि 2023 के विधानसभा चुनाव में पेपर लीक बड़ा मुद्दा बना. भजनलाल शर्मा के नेतृत्व में बीजेपी सरकार पेपरलीक को रोकने और दोषियों पर कार्रवाई करने के वादे के साथ सत्ता में आई. लेकिन अब यह भर्ती बीजेपी सरकार के लिए भी परेशानी बन गई है.
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दरअसल, 4 अप्रैल को राजस्थान हाईकोर्ट की खंडपीठ ने भर्ती को रद्द रखने का फैसला बरकरार रखा है. इससे पहले 28 अगस्त, 2025 को हाईकोर्ट की एकलपीठ ने भर्ती रद्द करने का फैसला दिया था. इस फैसले को भर्ती से नौकरी लगे ट्रेनी एसआई अभ्यर्थियों ने चुनौती दी थी. इसके साथ ही सरकार ने भी एकलपीठ के फैसले को चुनौती दी थी. अब एक बार फिर चयनित ट्रेनी एसआई जो भर्ती रद्द करने के खिलाफ है, उन्होंने हाईकोर्ट के फैसले को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी है. उनकी सरकार से एक बार फिर मांग है कि भर्ती रद्द ना की जाए और सरकार भी इसके खिलाफ अपील लगाए.
असमंजस की स्थिति में सरकार
हालांकि, सरकार अब एक बार फिर असमंजस की स्थिति में है. क्योंकि एक ओर भर्ती में असफल अभ्यर्थी भर्ती रद्द करवाना चाहते हैं. सरकार में मंत्री किरोड़ी लाल मीणा भी भर्ती रद्द करने के पक्ष में ही है. उन्होंने गहलोत सरकार के खिलाफ इस मुद्दे पर खूब प्रदर्शन किया था. दूसरी ओर ट्रेनी एसआई और एक धड़ा चाहता है कि भर्ती रद्द ना हो, चयनित लोगों के साथ अन्याय न हो.
राजस्थान एसआई भर्ती 2021 से जुड़ी जानकारी
- साल 2021 में आयोजित हुई इस परीक्षा में करीब 7 लाख 97 हजार अभ्यर्थियों ने आवेदन किया था.
- परीक्षा तीन चरण में हुई थी. पहले चरण लिखित परीक्षा में 3 लाख 80 हजार अभ्यर्थी शामिल हुए थे. जिसमें से 20 हजार 359 अभ्यर्थी फिजिकल टेस्ट के लिए पास हुए थे.
- इसके बाद आखिरी चरण इंटरव्यू के लिए 3 हजार 291 अभ्यर्थी चयनित हुए थे. 1 जून 2023 को फाइनल रिजल्ट जारी किया गया था.
- इसके बाद 13 अगस्त, 2024 को भर्ती रद्द करने के लिए हाईकोर्ट में याचिका पहुंची थी.
- लंबी सुनवाई के बाद हाईकोर्ट ने पेपर रद्द किया है.
- अब मामला देश की सर्वोच्च अदालत की दहलीज पर पहुंच गया है.
ऐसा पहली बार नहीं है, जब सरकार असमंजस में दिख रही है. इससे पहले एकलपीठ के फैसले को चुनौती देने में भी सरकार ने ढाई महीने से ज्यादा का समय लिया था. नियमों के मुताबिक, किसी फैसले को 60 दिनों के भीतर चुनौती देनी होती है. तब सरकार ने प्रार्थना पत्र लगाकर यह याचिका दायर की थी. अब सरकार एक बार फिर कश्मकश में नजर आ रही है.
एसआई भर्ती 2021 के लिए 3 फरवरी, 2021 को नोटिफिकेशन जारी हुआ. भर्ती में कुल 859 पद थे. इसके लिए 13 से 15 सितंबर 2021 को भर्ती परीक्षा आयोजित हुई. लेकिन तभी से भर्ती में फर्जीवाड़े के आरोप लगने लगे. आरोप लगा कि पहले दिन 13 सितंबर को बीकानेर के रामसहाय सीनियर सेकेंडरी स्कूल से तुलछाराम कालेर और सौरभ कालेर ने पेपर लीक किया. उसी दिन पाली और बीकानेर में इस मामले में रिपोर्ट भी दर्ज हुई. हालांकि परीक्षा स्थगित नहीं की गई.
कौन था पेपरलीक का मास्टरमाइंड?
वहीं, 14 - 15 सितंबर की परीक्षा से पहले पेपरलीक के मास्टरमाइंड पंकज चौधरी उर्फ यूनीक भांभू और जगदीश विश्नोई ने जयपुर से पेपरलीक कर दिया. जगदीश विश्नोई पेपरलीक गैंग का मुख्य सरगना है. जगदीश ने यूनीक भांभू को जयपुर की बाल भारती स्कूल हसनपुरा सोडाला में पर्यवेक्षक के रूप में लगवाया. वह पेपर आने से पहले ही टीचर राजेंद्र यादव और स्कूल के प्रिंसिपल राजेश की मिलीभगत से स्ट्रांग रूम की एक कोटरी में छिप गया. इसके बाद वहां से पेपरलीक कर दिया.
Jagdish Vishnoi
जगदीश विश्नोई पेपरलीक गैंग का सरगना है. वह खुद 2007 में पेपरलीक कर थर्ड ग्रेड टीचर बना. 2005 में फर्जी बीएड की डिग्री ली. उसके खिलाफ कई पेपरलीक व नकल करवाने के मामले दर्ज है. फरवरी 2024 में उसकी गिरफ्तारी हुई. हालांकि, 19 जनवरी 2026 को हाईकोर्ट से जमानत मिलने के बाद वह जेल से बाहर आ गया. वहीं, यूनिक भांभू पेपर के बाद विदेश भाग गया, अभी भी फरार है.
नेताओं तक पहुंची पेपर लीक की जांच
इस पेपर लीक के आरोपों की आंच आरपीएससी के अध्यक्ष, सदस्यों और कई नेताओं तक भी पहुंची. मामले में आरपीएससी के सदस्यों रामूराम राईका और बाबूलाल कटारा की गिरफ्तारी हुई. रामूराम राईका पर बेटे-बेटी को परीक्षा से 6 दिन पहले हस्तलिखित पेपर उपलब्ध करवाने का आरोप है. उसे पेपर बाबूलाल कटारा के जरिए प्राप्त हुआ. इंटरव्यू के समय उनका सदस्य कार्यकाल समाप्त हो चुका था, लेकिन चेयरमैन संजय श्रोत्रिय व अन्य सदस्यों से मिलीभगत कर बेटे-बेटी को अच्छे मार्क्स दिलाए.
वहीं, एसओजी की जांच के मुताबिक, बाबूलाल कटारा ने परीक्षा से 35 दिन पहले ही अपने घर पर तीनों दिन के प्रश्न और उत्तर अपने भांजे विजय डामोर से एक रजिस्टर में उतरवाए. इसे बाद में कई लोगों तक पहुंचाया. एकलपीठ ने अपने फैसले में आरपीएससी की कार्यप्रणाली पर भी सवाल उठाए थे.