IAS, IPS और IFS के 2800 से ज्यादा पद खाली, जानें किस राज्य में कितनी वैकेंसी

IAS के 1300 पद, IPS के 505 पद जबकि IFS के 1029 पद खाली पड़े हैं. सरकार के मुताबिक केंद्र सरकार के साथ-साथ अलग-अलग राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को मिलकर IAS के कुल स्वीकृत पदों की संख्या फिलहाल 6877 है. जबकि अभी 5577 पद ही भरे हुए हैं.

विज्ञापन
Read Time: 3 mins
उत्तर प्रदेश में आईएएस पदों की स्वीकृत संख्या 652 है, जिनमें सर्वाधिक 571 अधिकारी कार्यरत हैं.

इस बात पर लागतार मांग की जाती रही है कि देश में खाली पड़े सरकारी पदों को भरने के लिए सरकार को पहल करनी चाहिए. सरकार किसी पार्टी की भी रही हो, समय-समय पर ये राजनीतिक मुद्दा भी बनता रहा है.  प्रधानमंत्री के अधीन काम करने वाले कार्मिक मंत्रालय ने देश के सबसे प्रतिष्ठित तीन सरकारी अखिल भारतीय सेवाओं के बारे में आंकड़े साझा किए हैं. कार्मिक मंत्रालय में राज्य मंत्री डॉ जितेंद्र सिंह ने राज्यसभा में एक लिखित जवाब में तीनों अखिल भारतीय सेवाओं यानि IAS, IPS और IFS ( Indian Forest Service ) के खाली पड़े पदों के बारे में जानकारी दी.

IAS के 19 फीसदी पद हैं खाली

जवाब में बताया गया कि फिलहाल इन तीनों सेवाओं के 2834 पद खाली पड़े हैं. इसमें IAS के 1300 पद , IPS के 505 पद जबकि IFS के 1029 पद खाली पड़े हैं. सरकार के मुताबिक केंद्र सरकार के साथ-साथ अलग-अलग राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को मिलकर IAS के कुल स्वीकृत पदों की संख्या फ़िलहाल 6877 है. जबकि अभी 5577 पद ही भरे हुए हैं. इसका मतलब , IAS के करीब 19 फ़ीसदी पद खाली पड़े हैं. वहीं IPS के कुल स्वीकृत पदों की संख्या 5099 हैं जबकि केवल 4594 पद ही भरे हुए हैं. इसी तरह IFS के कुल स्वीकृत 3193 पदों की जगह 2164 पद ही भरे हुए हैं. 

  1. उत्तर प्रदेश में आईएएस पदों की स्वीकृत संख्या 652 है, जिनमें सर्वाधिक 571 अधिकारी कार्यरत हैं.
  2. मध्यप्रदेश में स्वीकृत संख्या 459 के मुकाबले 391 आईएएस अधिकारी कार्यरत हैं.
  3. महाराष्ट्र में स्वीकृत 435 पदों के मुकाबले 359 अधिकारी कार्यरत हैं.

लैटरल एंट्री नियम से 63 अधिकारियों की नियुक्ति

एक अन्य सवाल के जवाब में सरकार ने बताया कि 2018 से अबतक लैटरल एंट्री नियम से भी 63 अधिकारियों की नियुक्ति की जा चुकी है. सरकार ने बताया कि लैटरल एंट्री के ज़रिए संयुक्त सचिव , निदेशक और उपनिदेशक जैसे पदों पर भर्ती की गई है. इनमें सबसे ज़्यादा नियुक्तियां वित्त मंत्रालय के अलग-अलग विभागों में की गई है. 

आम तौर पर संयुक्त सचिव पद पर IAS या सिविल सेवा के अन्य कैडर से आए अधिकारियों की ही तैनाती की जाती है लेकिन पिछले कुछ सालों में लैटरल एंट्री के ज़रिए भी नियुक्तियां शुरू की गई हैं. IAS या केंद्रीय सिविल सेवा के अन्य कैडर के अधिकारियों की नियुक्ति जहां सिविल सेवा परीक्षा के ज़रिए होती है. वहीं लैटरल एंट्री के तहत विशेषज्ञ लोगों की नियुक्ति सिविल सेवा परीक्षा के बिना ही की जाती है. कई बार ये आरोप लगे हैं कि लैटरल एंट्री में आरक्षण का नियम लागू नहीं किया जाता है.

Featured Video Of The Day
Lucknow Hit And Run Case: 12वीं के छात्र ने स्विफ्ट कार से 6 लोगों को रौंदा, 6 साल के मासूम की मौत!
Topics mentioned in this article