Noida Protest: न्यूनतम मजदूरी में बढ़ोतरी को लेकर नोएडा के हजारों मजदूर सड़कों पर उतर आए हैं. हरियाणा सरकार की तरफ से न्यूनतम मजदूरी बढ़ाए जाने के बाद नोएडा के मजदूर भी अपनी सैलरी बढ़ाने की मांग कर रहे हैं. उनका कहना है कि उन्हें महीने के 10 से 11 हजार रुपये मिल रहे हैं, जो केंद्र सरकार के तय मानक से भी कम हैं. ऐसे में आइए जानते हैं कि ये पूरा मामला क्या है और मजदूरों को किस वजह से सड़कों पर उतरना पड़ा. साथ ही न्यूनतम मजदूरी के नियम भी जानेंगे.
फैक्ट्री मजदूरों को कितना वेतन मिल रहा है?
एनडीटीवी से बात करते हुए नोएडा की एक कंपनी में काम कर रहे मजदूर ने कहा, देहात में 500 से लेकर 600 रुपये मिल रहे हैं, लेकिन यहां नोएडा में 300 रुपये दिन का मिल रहा है. कम से कम 600 रुपये रोज का मिलना ही चाहिए. मजदूरों ने कहा कि मैनेजर गाली देकर काम करवाते हैं और महिलाओं को कई घंटों तक उठने नहीं दिया जाता है.
क्या हैं मजदूरों की मांगें?
- 10 से 11 हजार महीने का वेतन मिल रहा है, जिसे बढ़ाकर 20 हजार रुपये करने की मांग है.
- 8 घंटे का नियम है, लेकिन कंपनियां ओवरटाइम करवा रही हैं. इसका कोई पैसा नहीं दिया जाता है.
- सभी कंपनियों के लिए नियम बनाए जाने की मांग है कि वहां न्यूनतम मजदूरी कम से कम 600 रुपये हो.
- तमाम कंपनियों की तरफ से मजदूरी बढ़ाने के लिखित आश्वासन की मांग है.
हरियाणा और गुरुग्राम का उदाहरण क्यों?
नोएडा में मजदूरों के बीच उनकी रोजाना की मजदूरी बढ़ाने की चिंगारी अंदर ही अंदर काफी वक्त से सुलग रही थी, लेकिन हरियाणा सरकार के एक फैसले ने उस चिंगारी को हवा देकर आग बना दिया. दरअसल हरियाणा सरकार ने न्यूनतम मजदूरी में करीब 35 फीसदी का इजाफा किया और तमाम कंपनियों और फैक्ट्रियों को निर्देश जारी हुआ कि इसे प्राथमिकता पर लागू करें. सरकार ने बताया कि 1 अप्रैल 2026 से ये वेतन वृद्धि लागू होगी. यही वजह है कि नोएडा में प्रदर्शन करने वाले मजदूर गुरुग्राम और हरियाणा का उदाहरण दे रहे हैं.
- अनस्किल्ड कामगारों का वेतन हरियाणा में 11274.60 रुपये से बढ़कर 15220 रुपये होगा.
- सेमी-स्किल्ड कामगारों का वेतन 12430.18 रुपये से बढ़कर 16780.74 रुपये होगा.
- स्किल्ड कामगारों का वेतन 13704.31 रुपये से बढ़कर 18500.81 रुपये होगा.
न्यूनतम मजदूरी के क्या हैं नियम?
श्रम मंत्रालय के मुताबिक जब भी केंद्र सरकार मजदूरों की कम-से-कम मजदूरी (न्यूनतम दर) तय करेगी, तो वह 3 मुख्य बातों का ध्यान रखेगी.
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1. इलाका (Geographical Area): मजदूरी इस आधार पर तय होगी कि मजदूर कहां काम कर रहा है. जैसे- बड़ा शहर, छोटा कस्बा या गांव... अलग-अलग जगहों पर रहने का खर्च अलग होता है.
2. अनुभव (Experience): काम करने वाले को उस काम में कितना अनुभव (Experience) है, इस बात का भी ध्यान रखा जाएगा.
3. हुनर या कौशल (Skill Level): काम की कैटेगरी के हिसाब से मजदूरी अलग होगी. इसके लिए अलग-अलग चार कैटेगरी बनाई गई हैं. जिनमें-
अकुशल (Unskilled): जिन्हें किसी विशेष हुनर की जरूरत नहीं.
अर्ध-कुशल (Semi-skilled): जिन्हें थोड़ा बहुत काम आता है.
कुशल (Skilled): जो अपने काम में माहिर हैं.
अत्यधिक कुशल (Highly Skilled): जो बहुत ऊंचे स्तर का तकनीकी काम करते हैं.
केंद्र सरकार की बढ़ाई गई न्यूनतम मजदूरी
- अकुशल (Unskilled) - 783 रुपये प्रतिदन
- अर्ध-कुशल (Semi-skilled) - 868 रुपये प्रतिदन
- कुशल (Skilled) - 954 रुपये प्रतिदन
- अत्यधिक कुशल (Highly Skilled) - 1035 रुपये प्रतिदन