Noida Labour Protest: उत्तर प्रदेश के नोएडा में पिछले दिनों हजारों मजदूर सड़कों पर उतर आए. फैक्ट्रियों और कंपनियों में काम करने वाले इन मजदूरों का कहना था कि उनसे कई घंटों तक काम करवाया जाता है, लेकिन सैलरी के नाम पर महज 300 रुपये रोजाना का पैसा मिलता है. इस प्रदर्शन के दौरान हिंसा भी हुई और कई जगह पुलिस की मजदूरों के साथ झड़प देखी गई. लंबे बवाल के बाद आखिरकार यूपी सरकार ने मजदूरों का पैसा बढ़ाने का ऐलान किया और हर फैक्ट्री या कंपनी को भी इसे लेकर निर्देश जारी हुआ. अब नोएडा की तमाम कंपनियों के बाहर बैनर लगे हैं, जिनमें बताया गया है कि अकुशल, अर्धकुशल और कुशल कर्मचारियों को कितना पैसा दिया जाएगा. ऐसे में हम आपको बताएंगे कि किस कैटेगरी में कौन से लोग आते हैं और इनकी सैलरी में कितना अंतर है.
इन चीजों से तय होती है न्यूनतम मजदूरी
सरकार की तरफ से मजदूरी या फिर सैलरी के लिए लेबर कोड बनाया गया है. इसमें बताया गया है कि न्यूनतम मजदूरी कैसे तय होगी और इसके लिए किन बातों का ध्यान रखा जाना चाहिए. इसके मुताबिक इसके लिए तीन पैमाने होते हैं.
- सबसे पहला इलाका यानी Geographical Area होता है, जिसमें मजदूरी इस आधार पर तय होती है कि मजदूर कहां काम कर रहा है. जैसे- बड़े शहरों, छोटे कस्बों या फिर गांव में रहने के खर्चे के हिसाब से मजदूरी तय की जा सकती है.
- दूसरा पैमाना अनुभव को माना गया है. मजदूरी या सैलरी देते हुए इस बात का भी ध्यान रखा जाना जरूरी है कि काम करने वाले को कितना अनुभव है.
- तीसरा पैमाना स्किल यानी हुनर का होता है. इसमें अलग-अलग कैटेगरी के हिसाब से मजदूरी तय की जाती है. इसकी चार कैटेगरी बनाई गई हैं, जिनके हिसाब से सैलरी का स्केल तय होता है.
चार तरह की कैटेगरी
अकुशल (Unskilled): ये ऐसे लोग होते हैं, जिन्हें किसी खास हुनर की जरूरत नहीं होती है. इसमें दिहाड़ी मजदूर और बाकी छोटा-मोटा काम करने वाले लोग आते हैं.
अर्ध-कुशल (Semi-skilled): अर्ध कुशल वो लोग होते हैं, जिन्हें उस काम की थोड़ी बहुत जानकारी होती है. ये लोग पूरी तरह से काम में महारथ नहीं रखते हैं.
कुशल (Skilled): इस कैटेगरी में वो लोग आते हैं, जो अपने काम में बिल्कुल माहिर होते हैं. यानी जिस मशीन चलाने वाले को उसे पूरी तरह से ऑपरेट करना आता हो, वो कुशल माना जाएगा.
अत्यधिक कुशल (Highly Skilled): इसमें वो लोग आते हैं जो टेक्निकल काम में माहिर होते हैं.
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सैलरी में कितना अंतर?
हर राज्य में इन सभी कैटेगरी में काम करने वालों की सैलरी अलग हो सकती है. हाल ही में हरियाणा सरकार ने सभी की मजदूरी में करीब 33 फीसदी की बढ़ोतरी की थी, जिसके बाद नोएडा में भी सैलरी बढ़ाने को लेकर प्रदर्शन शुरू हो गया. आमतौर पर अकुशल कामगारों की सैलरी 12 से 15 हजार के बीच होती है. वहीं अर्ध-कुशल की सैलरी करीब 17 हजार तक हो सकती है. वहीं कुशल कामगारों को 20 से 22 हजार रुपये तक मिलते हैं.
केंद्र सरकार ने क्या तय किया है पैमाना?
अकुशल (Unskilled) - 783 रुपये प्रतिदिन, (20,358 महीना)
अर्ध-कुशल (Semi-skilled) - 868 रुपये प्रतिदिन, (22,568 महीना)
कुशल (Skilled) - 954 रुपये प्रतिदिन, (24,804 महीना)
अत्यधिक कुशल (Highly Skilled) - 1035 रुपये प्रतिदन, (26,910 महीना)
फैक्ट्रियों में कैसे तय होती है कैटेगरी?
नोएडा के कारोबारी और NEA के मीडिया प्रभारी सुधीर श्रीवास्तव से हमने पूछा कि वो कैसे अकुशल, अर्धकुशल और कुशल कामगारों के बीच अंतर तय करते हैं. उनकी कंपनी इलेक्ट्रिक वायर बनाती है. उन्होंने कहा, अनस्किल्ड लेबर उसे कहा जाता है जो सहायक के तौर पर काम करता है मसलन एक सामान उठाना ले जाना. गारमेंट की फैक्ट्री में एक मशीन से दूसरे मशीन तक कपड़े पहुंचा देना या पैकिंग का काम कर देना अकुशल मजदूरों का काम होता है. जबकि सेमी स्किल्ड गारमेंट की फैक्ट्री में धागे को काटना, बटन टांकना, निशान मापना जैसे काम करते हैं यानी ये फाइनल काम नहीं करते हैं.