Success Story : कौन हैं देश की पहली महिला ब्लाइंड जज थान्या नाथन? जानिए यहां

थान्या नाथन ने केरल ज्यूडिशियल सर्विस परीक्षा 2025 में बाजी मारकर पूरे देश का ध्यान अपनी ओर खींचा है. वह न केवल केरल की पहली पूरी तरह से दृष्टिहीन (100% Visually Impaired) महिला जज बनने जा रही हैं, बल्कि उनकी यह जीत करोड़ों लोगों के लिए एक मिसाल है.

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थान्या की दिलचस्पी कानून में तब जगी जब वह 12वीं में थीं. उन्होंने कन्नूर यूनिवर्सिटी से LLB की पढ़ाई की.

First visually impaired woman of India : मुश्किलें तो सबके रास्ते में आती हैं, लेकिन इतिहास वही रचता है जो उन मुश्किलों को अपनी ताकत बना लेता है. इसका सबसे बड़ा उदाहरण हैं थान्या नाथन सी, जिन्होंने सिविल जज परीक्षा में टॉप करके देश की पहली महिला दृष्टिबाधित जज बनने का इतिहास रचा है. जी हां, थान्या ने यह साबित कर दिया कि मंजिल पाने के लिए आंखों की रोशनी नहीं, बल्कि सपनों में जान होनी चाहिए. उनकी सफलता की कहानी आज लाखों युवाओं के लिए प्रेरणा है, जो छोटी-छोटी मुश्किलों से हारकर अपना लक्ष्य बीच में छोड़ देते हैं. आइए आज के इस आर्टिकल में हम आपको बताते हैं थान्या नाथन की देश की पहली महिला दृष्टिबाधित जज बनने का सफर कैसा रहा किन चुनौतियों का सामना करना पड़ा.

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कौन हैं थान्या नाथन?

थान्या केरल के कन्नूर जिले के मांगड की रहने वाली हैं. 24 वर्षीय थान्या जन्म से ही देख नहीं सकती थीं, लेकिन उनकी उनके इरादे बचपन से ही फौलादी थे. उन्होंने अपनी शुरुआती पढ़ाई कन्नूर के मॉडल स्कूल फॉर द ब्लाइंड से की. इसके बाद उन्होंने हार नहीं मानी और सामान्य बच्चों के साथ मुख्यधारा के स्कूलों (जैसे मोराझा गवर्नमेंट हायर सेकेंडरी स्कूल) में पढ़ाई जारी रखी.

कानून की पढ़ाई में भी लहराया परचम

थान्या की दिलचस्पी कानून में तब जगी जब वह 12वीं में थीं. उन्होंने कन्नूर यूनिवर्सिटी से LLB की पढ़ाई की. सबसे दिलचस्प बात यह है कि वह अपने पूरे बैच में इकलौती ऐसी छात्रा थीं जो देख नहीं सकती थीं, फिर भी उन्होंने यूनिवर्सिटी में फर्स्ट रैंक अपने नाम करके लोगों को चौका दिया.

वकालत से जज बनने तक का सफर

LLB की पढ़ाई पूरी करने के बाद थान्या ने साल 2024 में एक वकील के तौर पर  कन्नूर के तालीपरंबा में सीनियर वकील के.जी. सुनील कुमार के पास काम सीखा. आपको बता दें कि थान्या वकालत के दौरान वह अपनी बहस के नोट्स ब्रेल लिपि में तैयार करती थीं.

बिना कोचिंग के हासिल की सफलता

थान्या ने जज बनने की परीक्षा पास करने के लिए किसी कोचिंग का सहारा नहीं लिया बल्कि सेल्फ स्टडी से इतनी बड़ी सफलता को हासिल किया.  थान्या ने खुद पर भरोसा किया और सिविल जज (जूनियर डिविजन), केरल ज्यूडिशल सर्विस, 2025 में बेंचमार्क डिसेबिलिटी वाले लोगो की मेरिट लिस्ट में पहला स्थान अपने नाम कर लिया. एक और बात थान्या ने यह सफलता अपनी नौकरी यानी वकालत करने के सा-साथ हासिल किया है. यानी उन्होंने नौकरी और पढ़ाई दोनों एक साथ मैनेज किया. 

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टेक्नोलॉजी बनी आंखें

थान्या की इस एतिहासिक सफलता में तकनीक एक वरदान साबित हुई है. थान्या अपनी पढ़ाई के लिए ब्रेल बुक्स (Braille Books), स्क्रीन-रीडिंग सॉफ्टवेयर (Screen Reading Software), वॉयस टू टेक्स्ट (बोलकर लिखने वाली) ऐप्स का सहारा लिया.

सुप्रीम कोर्ट का ऐतिहासिक फैसला और थान्या की जीत

थान्या की यह सफलता इसलिए भी अहम है क्योंकि मार्च 2025 में सुप्रीम कोर्ट ने एक बड़ा फैसला सुनाया था. कोर्ट ने कहा था कि पूरी तरह दृष्टिहीन उम्मीदवार भी जज बन सकते हैं और उन्हें उनकी दिव्यांगता के आधार पर अयोग्य नहीं ठहराया जा सकता. थान्या की मेहनत और इस फैसले ने मिलकर उनके जज बनने का रास्ता साफ कर दिया. थान्या अपनी सफलता का श्रेय अपनी मेहनत और लगन के साथ सुप्रीम कोर्ट के इस फैसले को भी देती हैं. 

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विदित हो कि नाथन केरल की पहली पूरी तरह से ब्लाइंड जज हैं और देश की दूसरी 100% ब्लाइंड जज हैं। इनसे पहले 2019 में राजस्थान के ब्रह्मानंद शर्मा भारत के पहले ब्लाइंड जज बननकर इतिहास रचा था.
 

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