युद्ध का तरीका तेजी से बदल रहा है. अब लड़ाई सिर्फ बंदूक और सैनिकों तक सीमित नहीं रही, बल्कि ड्रोन, टेक्नोलॉजी और फास्ट एक्शन लेना भी उतना ही अहम हो गया है. इन्हीं जरूरतों को देखते हुए भारतीय सेना ने एक नई और मॉर्डन यूनिट तैयार की है. जिसे भैरव बटालियन का नाम दिया गया है. ये कोई आम बटालियन नहीं, बल्कि सेना के सबसे बेहतरीन और चुने हुए जवानों की ताकत है. जिन्हें बेहद कठिन ट्रेनिंग देकर चीन और पाकिस्तान सीमा पर तैनाती के लिए तैयार किया जाता है.
भैरव बटालियन क्या है?
भैरव बटालियन भारतीय सेना की एक नई तरह की यूनिट है. जिसे भविष्य के युद्धों को ध्यान में रखकर बनाया गया है. इसका नाम भगवान शिव के रौद्र रूप ‘भैरव' पर रखा गया है. जो दुश्मनों के लिए काल माने जाते हैं. इस बटालियन का मुख्य उद्देश्य सीमाओं पर किसी भी खतरे का तुरंत और इफेक्टिव जवाब देना है.
कहां और क्यों है तैनाती?
भैरव बटालियन को खासतौर पर चीन और पाकिस्तान से लगी संवेदनशील सीमाओं पर तैनात करने के लिए तैयार किया गया है. यहां हालात कभी भी बिगड़ सकते हैं. ऐसे में ऐसी फोर्स की जरूरत होती है जो बिना देर किए ऑपरेशन शुरू कर सके.
भर्ती और सिलेक्शन प्रक्रिया कैसी होती है?
इस बटालियन में सीधी भर्ती नहीं होती. इसके लिए भारतीय सेना के मौजूदा जवानों में से ही सबसे फिट, मानसिक रूप से मजबूत और अनुभवी सैनिकों को चुना जाता है. इनमें कई जवान ऐसे होते हैं, जिनके पास पैरा कमांडो जैसी स्पेशल फोर्सेज का एक्सपीरियंस और कौशल होता है. यानी ये भी एक तरह की स्पेशल फोर्स है.
ट्रेनिंग क्यों मानी जाती है सबसे खतरनाक?
भैरव बटालियन की ट्रेनिंग सामान्य पैदल सेना से कहीं ज्यादा चैलेंजिंग होती है. जवानों को मल्टी डोमेन ऑपरेशन, आर्टिलरी सपोर्ट और एयर डिफेंस जैसी मॉर्डन वॉर टेक्नीक की ट्रेनिंग दी जाती है. इसके साथ ही हर सैनिक को ड्रोन ऑपरेशन सिखाया जाता है. ताकि वो दुश्मन के ड्रोन हमलों का जवाब दे सकें और खुद भी ड्रोन से निगरानी और हमला कर सकें.
क्विक एक्शन और नाइट ऑपरेशन में माहिर
ये जवान सरप्राइज अटैक, सप्लाई लाइन तोड़ने और रात के अंधेरे में ऑपरेशन करने में पूरी तरह सक्षम होते हैं. नाइट विजन डिवाइस और आधुनिक हथियार इन्हें और भी घातक बनाते हैं.
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