सिर्फ एक सही सवाल ने बदली किस्मत: IITian मेंटॉर की मदद से टेक प्रोफेशनल को मिला ₹25 लाख का रिमोट पैकेज

एक IITian मेंटॉर ने अपने मेंटी (mentee) को सिर्फ सलाह नहीं दी, बल्कि कंपनी से सीधे बातचीत कर उसकी सैलरी बढ़वाने में अहम भूमिका निभाई. लोकेशन नहीं, बल्कि स्किल और पोटेंशियल पर फोकस करने से 18 लाख का ऑफर बढ़कर 25 लाख सालाना हो गया.

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अमित शेखर का मानना है कि अगर कोई सीखने वाला रोज मेहनत कर रहा है, तो मेंटॉर को भी उतनी ही मजबूती से उसके लिए खड़ा होना चाहिए.

Success Story : कई बार करियर में सफलता सिर्फ डिग्री या स्किल से नहीं, बल्कि सही समय पर सही गाइडेंस से मिलती है. IIT गुवाहाटी के एक पूर्व छात्र और करियर स्ट्रैटेजिस्ट अमित शेखर ने यह साबित कर दिखाया. उन्होंने सिर्फ सलाह देने तक खुद को सीमित नहीं रखा, बल्कि अपने एक मेंटी (mentee) के लिए कंपनी के HR से सीधे बात कर उसकी सैलरी नेगोशिएशन में मदद की और नतीजा रहा 25 लाख सालाना का रिमोट जॉब ऑफर. जी हां, चलिए आइए जानते हैं आगे आर्टिकल में ये कैसे संभव हो पाया.

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मेंटॉरशिप जो सिर्फ सलाह नहीं, साथ भी देती है 

यह कहानी एक ऐसे युवा टेक प्रोफेशनल की है जो पहले ₹12 लाख सालाना के पैकेज पर काम कर रहा था. नई नौकरी के लिए उसने अपनी स्किल्स के आधार पर 28 लाख की उम्मीद जताई. लेकिन कंपनी की HR टीम ने सिर्फ 18 लाख का पैकेज ऑफर किया.

रिमोट जॉब के बहाने कम सैलरी का ऑफर 

HR का कहना था कि ये रिमोट जॉब है, इसलिए यह सैलरी बेंगलुरु जैसे महंगे शहर में 28 लाख की ऑन-साइट नौकरी के बराबर मानी जानी चाहिए. पहली नजर में यह जस्टीफिकेशन सही लग सकता था, लेकिन मेंटर अमित शेखर को लगा कि यह उम्मीदवार की असली क्षमता को नजरअंदाज कर रहा है.

स्किल, मेहनत और क्षमता पर फोकस 

शेखर ने खुद HR टीम से बात की. उन्होंने बताया कि उम्मीदवार ने पिछले छह महीनों में जबरदस्त अपस्किलिंग की थी. चारों इंटरव्यू राउंड में उसे बेहतरीन रेटिंग मिली थी. यहां तक कि कंपनी के CTO भी उसकी गहरी टेक्निकल समझ देखकर हैरान रह गए थे, खासकर यह जानकर कि उसके पास सिर्फ दो साल का एक्सपीरियंस है.

नतीजा पैकेज 18 लाख से बढ़कर 25 लाख 

जब बातचीत को लोकेशन की बजाय उम्मीदवार की परफॉर्मेंस, उसकी लर्निंग कैपेसिटी और फ्यूचर वैल्यू पर फोकस किया गया, तो कंपनी का नजरिया बदला. आखिरकार ऑफर बढ़ाकर ₹25 लाख सालाना कर दिया गया.

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असली मेंटर वही, जो साथ खड़ा रहे 

अमित शेखर का मानना है कि अगर कोई सीखने वाला रोज मेहनत कर रहा है, तो मेंटॉर को भी उतनी ही मजबूती से उसके लिए खड़ा होना चाहिए. सही मेंटॉरशिप करियर की दिशा बदल सकती है और यह कहानी इसी बात की मिसाल है.

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