इस देश में भारतीय युवाओं की बढ़ी डिमांड, इंजीनियर से लेकर बढ़ई तक के लिए नौकरी, Visa कर लीजिए रेडी

Jobs in Gerrmany : जर्मनी में लाखों नौकरियां खाली हैं और वर्कर्स की भारी कमी है. ऐसे में भारतीय युवाओं के लिए वहां काम करने के मौके तेजी से बढ़ रहे हैं.

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दिलचस्प बात ये है कि सिर्फ हाई स्किल जॉब्स ही नहीं, बल्कि कसाई, बढ़ई, बेकरी वर्कर और मैकेनिक जैसे कामों में भी लोगों की कमी है.

Job for Indians in Germany : यूरोप की सबसे बड़ी इकॉनमी इन दिनों एक अनोखी चुनौती का सामना कर रही है. जर्मनी में नौकरी के मौके तो लाखों की संख्या में मौजूद हैं, लेकिन उन्हें भरने के लिए पर्याप्त लोग नहीं मिल रहे. कंपनियां लगातार वर्कर्स की तलाश में हैं और कई सेक्टर में काम रुकने तक की नौबत आ रही है. ऐसे में जर्मनी की नजर अब भारत के युवाओं पर टिक गई है, जहां स्किल्ड और मेहनती टैलेंट की कोई कमी नहीं है. यही वजह है कि भारतीय युवाओं के लिए वहां काम करने के मौके तेजी से बढ़ते दिख रहे हैं.

क्यों हो रही है वर्कर्स की कमी

जर्मनी की आबादी तेजी से बूढ़ी हो रही है. जन्म दर कम है और बड़ी संख्या में लोग रिटायर हो रहे हैं. इसके चलते काम करने वाली युवा आबादी घटती जा रही है. नतीजा ये है कि खाली पद बढ़ते जा रहे हैं और उन्हें भरने के लिए लोग नहीं मिल पा रहे हैं. इससे वर्कफोर्स में बड़ा गैप बन गया है.

किन सेक्टर में ज्यादा मौके

जर्मनी को हर साल करीब 2.88 लाख विदेशी कामगारों की जरूरत पड़ रही है. हेल्थकेयर, इंजीनियरिंग, आईटी और मैन्युफैक्चरिंग जैसे सेक्टर में भारी कमी है. अस्पतालों को नर्स और केयरगिवर्स चाहिए, इंडस्ट्री को इंजीनियर और टेक्नीशियन, जबकि डिजिटल सेक्टर आईटी प्रोफेशनल्स की तलाश में है.

भारत बना बड़ा टैलेंट हब

इस कमी को पूरा करने के लिए जर्मनी अब भारत को एक बड़े टैलेंट सोर्स के तौर पर देख रहा है. भारत में बड़ी संख्या में युवा और स्किल्ड प्रोफेशनल्स मौजूद हैं. यही कारण है कि भारतीयों के लिए वीजा नियम भी आसान किए जा रहे हैं, जिससे ज्यादा लोग वहां जाकर काम कर सकें.

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वीजा नियम हुए आसान

अब स्किल्ड वर्कर्स के लिए वीजा कोटा 20 हजार से बढ़ाकर 90 हजार कर दिया गया है. पहले जहां वीजा में 9 महीने तक लगते थे, अब ये प्रक्रिया घटकर करीब दो हफ्ते रह गई है. 2024 में लॉन्च हुआ ऑपर्च्युनिटी कार्ड भी युवाओं के लिए बड़ा मौका है, जिससे वो एक साल तक जर्मनी जाकर नौकरी ढूंढ सकते हैं और पार्ट टाइम काम भी कर सकते हैं.

पारंपरिक कामों में भी मौके

दिलचस्प बात ये है कि सिर्फ हाई स्किल जॉब्स ही नहीं, बल्कि कसाई, बढ़ई, बेकरी वर्कर और मैकेनिक जैसे कामों में भी लोगों की कमी है. स्थानीय युवा इन कामों में कम दिलचस्पी दिखा रहे हैं, जिससे विदेशियों के लिए मौके और बढ़ गए हैं. कुल मिलाकर, जर्मनी की ये स्थिति भारत के युवाओं के लिए सुनहरा मौका बनकर सामने आई है. जहां एक तरफ जर्मनी को वर्कर्स की जरूरत है, वहीं भारत के पास युवा टैलेंट की भरमार है. आने वाले समय में ये ट्रेंड और तेजी पकड़ सकता है.

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