भारत में वर्किंग आवर्स को लेकर अक्सर बहस होती रहती हैं. Infosys के संस्थापक एन. आर. नारायण मूर्ति ने कुछ समय पहले ऐसा बयान दिया था जिसको लेकर काफी बहस हुई थी. दरअसल उन्होंने युवाओं को हफ्ते में 70 घंटे काम करने की सलाह दी थी. इसी तरह से एस. एन. सुब्रमण्यम जो कि L&T के चेयरमैन हैं, उन्होंने कर्मचारियों को हफ्ते में 90 घंटे काम (औसतन 13 घंटे प्रतिदिन) करने का सुझाव दिया था. साथ ही रविवार को भी काम करने की बात कही थी. भारत में ऐसी कई नौकरियां हैं, जहां वर्किंग आवर्स काफी लंबे होते हैं. अधिक देर तक काम करने से कर्मचारियों की सेहत पर बुरा असर पड़ता है.
प्राइवेट के साथ-साथ ऐसी कई सरकारी नौकरियां भी हैं, जहां पर कर्मचारी लंबे समय तक काम करने पर मजबूर हैं. 2025 ग्लोबल लाइफ-वर्क बैलेंस इंडेक्स में 60 देशों में भारत 42वें स्थान पर था. यानी भारत में वर्किंग कल्चर अन्य देशों की तुलना में बेहद ही खराब है.
राहुल गांधी ने कुछ समय पहले लोको पायलटों की कार्य स्थितियों को लेकर सवाल उठाए थे. उन्होंने मांग की थी कि लोको पायलटों को पर्याप्त आराम और सुविधाएं दी जाए. उनसे तय समय से अधिक काम न लिया जाए. राहुल गांधी ने नई दिल्ली रेलवे स्टेशन पर लोको पायलटों से मुलाकात भी की थी और उनकी समस्याएं सुनीं थी. अपर्याप्त आराम, काम के अधिक घंटे, भर्ती में कमी से बोझ सहित कई समस्याओं का जिक्र लोको पायलटों ने राहुल गांधी से किया था.
इन सेक्टर में भी अधिक वर्किंग आवर्स से परेशान हैं कर्मचारी
IT और टेक- आईटी पेशेवर औसतन 50 घंटे से अधिक प्रति सप्ताह काम कर रहे हैं.
रेजिडेंट डॉक्टर्स- डॉक्टर्स खासकर रेजिडेंट डॉक्टर्स औसत डॉक्टर हफ्ते में 70 घंटे से अधिक काम करते हैं. कई रेजिडेंट डॉक्टर्स 36 घंटे की लगातार शिफ्ट भी करने पर मजबूर हैं. ये मामला सुप्रीम कोर्ट भी पहुंच था.
पुलिस कर्मचारी: कानून व्यवस्था बनाए रखने के लिए पुलिस कर्मी दिन रात काम करते हैं. कई बार तो उन्हें 12 घंटे से भी अधिक समय तक ड्यूटी करनी पड़ती है.
गिग वर्कर्स: कई गिग वर्कर्स यानी Delivery Partners को प्रतिदिन 12-14 घंटे काम करना पड़ता है, जो की साफ तौर पर श्रम अधिकारों का उल्लंघन है.
पायलट्स: भारत में पायलट की नौकरी करना भी एक चुनौतीपुर्ण काम है. भारत की कई ऐसी एयरलाइंस हैं, जहां पर पायलट की कमी है. जिसके कारण कंपनी के साथ जुड़े पायलट्स को कई बार अधिक काम करना पड़ जाता है.
वर्किंग आवर्स को लेकर क्या कहता है भारत का कानून
भारतीय श्रम कानून (Labor Laws) साफ तौर पर वर्किंग आवर्स का जिक्र है. काननू के अनुसार, साप्ताहिक कार्य सीमा अधिकतम 48 घंटे से अधिक नहीं हो सकती है. प्रतिदिन 8-12 घंटे या प्रति सप्ताह 48 घंटे से अधिक काम करने पर कर्मचारी को ओवरटाइम देने का प्रावधान है. दो शिफ्टों के बीच कम से कम 12 घंटे का निरंतर आराम कर्मचारी के लिए होना चाहिए.