Career tips : कभी-कभी रोज ऑफिस जाना, वही काम करना और शाम तक थककर घर लौटना एक बोझ जैसा लगने लगता है. कुछ लोगों को तो ये भी लगने लगता है कि उनकी नौकरी में अब ग्रोथ नहीं बची है. वहीं, एक तबके का काम करने से ही मन उठ जाता है. अगर आप भी इन सारी भावनाओं और उलझनों से इन दिनों गुजर रहे हैं, तो बता दें आपको करियर रिसेट करने की जरूरत है. जी हां, करियर को दोबारा कैसे प्लान करना है, इसके बारे में कंटेंट क्रिएटर अंकुर वारिकू ने अपने हाल के वीडियो में बताया है. उन्होंने 25 से 45 की उम्र में कैसे करियर रिसेट करना है, इसके बारे में डिटेल में बताया है. तो चलिए जानते हैं उन टिप्स के बारे में जो आपकी करियर को नई उंचाईयों तक ले जा सकता है...
क्यों आता है करियर बदलने का ख्याल?
कंटेंट क्रिएटर अंकुर वारिकू के मुताबिक, करियर बदलने या नई दिशा देने का फैसला अचानक नहीं आता. इसके पीछे आमतौर पर तीन बड़ी वजहें होती हैं, जो इस तरह हैं-
किसी भी नौकरी में बने रहने के पीछे सबसे बड़ा कारण सीखना और आगे बढ़ना होता है. ऐसे में जब व्यक्ति को लगता है कि उसकी ग्रोथ रुक गई है, तो काम में उत्साह कम होने लगता है.
इंडस्ट्री पर खतरा मंडरानादूसरी वजह इंडस्ट्री पर मंडरा रहा खतरा है. कई बार नई तकनीक या सरकारी नियम किसी पूरे सेक्टर को प्रभावित कर देते हैं. ऐसे में लोगों को अपने भविष्य को लेकर चिंता होने लगती है और वे नए ऑप्शन तलाशने लगने लगते हैं.
तीसरी और सबसे आम वजह काम में रुचि खत्म होना है. जो काम कभी सपना लगता था, वही समय के साथ बोझ जैसा महसूस होने लगता है.
उम्र के हिसाब से नौकरी बदलने की स्ट्रैटजी क्या होना चाहिएवारिकु (Warikoo) के अनुसार, करियर बदलने का फैसला उम्र और एक्सपीरिएंस को ध्यान में रखकर लेना चाहिए.
25 से 30 सालइस उम्र में लोगों के पास आमतौर पर 3 से 4 साल का एक्सपीरिएंस होता है. वे किसी एक फिल्ड में पूरी तरह स्टैब्लिश नहीं होते. इसलिए वे इंडस्ट्री और काम दोनों बदलकर एक्सपेरिमेंट्स कर सकते हैं. इस उम्र में फोकस ज्यादा से ज्यादा सीखने और ग्रोथ पर होना चाहिए.
वहीं, करीब 7 से 10 साल का अनुभव होने पर सावधानी जरूरी हो जाती है. इस उम्र में एक साथ सब कुछ बदलने की जगह केवल दो चीजों में बदलाव करना बेहतर होता है. उदाहरण के लिए, फंक्शन और जिम्मेदारी बदल सकते हैं, लेकिन इंडस्ट्री वही रख सकते हैं.
35 से 45 सालइस उम्र तक लोग अपने फिल्ड में बड़ी पहचान बना चुके होते हैं. इसलिए एक समय पर सिर्फ एक बदलाव करना बेहतर माना जाता है. पहले अपने फिल्ड में स्पेशलाइज्ड हो जाएं, उसके बाद दूसरे सेक्टर में जाने की संभावना बढ़ जाती है.
किन फिल्ड्स में करियर बदलना आसान और मुश्किल?
सेल्स, मार्केटिंग और कस्टमर सर्विस जैसे फिल्ड्स में करियर स्विच बाकियों कि तुलना में आसान माना जाता है. इसके बाद परफॉर्मेंस मार्केटिंग, मीडिया बाइंग, डेटा एनालिटिक्स, बिजनेस इंटेलिजेंस, ऑपरेशंस और प्रोजेक्ट मैनेजमेंट जैसे फिल्ड आते हैं.
वहीं AI, क्लाउड और कोडिंग जैसी टेक्नोलॉजी वाली भूमिकाओं में केवल डिग्री नहीं, बल्कि प्रोजेक्ट्स दिखाने पड़ते हैं. सबसे कठिन बदलाव मेडिकल, लॉ और चार्टर्ड अकाउंटेंसी जैसे पेशों में माना जाता है, क्योंकि इनमें लंबे समय की पढ़ाई और स्पेशलाइज्ड की जरूरत होती है.
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