इंटरव्यू क्लियर, ऑफर लेटर भी हाथ में... फिर आखिरी वक्त पर क्यों गायब हो रहे कैंडिडेट, जानें क्या है पूरा मामला

अमेरिका में जॉब मार्केट का नया ट्रेंड कंपनियों के लिए चुनौती बन गया है, जहां कैंडिडेट इंटरव्यू या ऑफर मिलने के बाद बिना बताए गायब हो रहे हैं और हायरिंग प्रोसेस पर इसका सीधा असर पड़ रहा है.

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ऑनलाइन प्लेटफॉर्म्स की वजह से कैंडिडेट एक साथ कई जगह अप्लाई कर रहे हैं.

अच्छी नौकरी मिलना आज भी हर किसी का सपना है, लेकिन अब इस सफर में एक नया ट्विस्ट जुड़ गया है जो कंपनियों की नींद उड़ा रहा है. पहले कैंडिडेट इंटरव्यू और रिजल्ट को लेकर परेशान रहते थे, लेकिन अब हालात ऐसे हो गए हैं कि कंपनियां खुद असमंजस में हैं. वजह है 'कैंडिडेट घोस्टिंग' का बढ़ता ट्रेंड जहां कैंडिडेट इंटरव्यू देने और ऑफर मिलने के बाद भी बिना कोई जानकारी दिए अचानक गायब हो जाते हैं. अमेरिका के जॉब मार्केट में तेजी से बढ़ रहा ये ट्रेंड हायरिंग की पूरी प्रक्रिया को बदल रहा है और कंपनियों के लिए नई चुनौती बनता जा रहा है.

क्या है कैंडिडेट घोस्टिंग

कैंडिडेट घोस्टिंग का मतलब है कि उम्मीदवार जॉब प्रोसेस के किसी भी स्टेज पर अचानक संपर्क तोड़ दे. ये एप्लिकेशन भेजने के बाद, इंटरव्यू के बाद या ऑफर मिलने के बाद भी हो सकता है. कैंडिडेट न कोई जवाब देता है और न ही कोई अपडेट, बस अचानक गायब हो जाता है.

तेजी से बदल रहा जॉब मार्केट

आज का जॉब मार्केट काफी फास्ट हो चुका है. ऑनलाइन प्लेटफॉर्म्स की वजह से कैंडिडेट एक साथ कई जगह अप्लाई कर रहे हैं. ऐसे में कई बार उनके पास एक साथ कई ऑफर आ जाते हैं. सर्वे के मुताबिक 51% लोगों ने बेहतर ऑफर मिलने पर पहले वाले प्रोसेस को छोड़ दिया. यानी मौका मिला और फोकस बदल गया.

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हर स्टेज पर दिख रहा असर

ये ट्रेंड सिर्फ शुरुआती स्टेज तक लिमिटेड नहीं है. करीब 15% लोग एप्लिकेशन के बाद ही गायब हो जाते हैं. 13% इंटरव्यू के बाद जवाब देना बंद कर देते हैं. वहीं 8% कैंडिडेट ऐसे भी हैं जो ऑफर मिलने के बाद भी जॉइन नहीं करते. साफ है कि अब इंटरव्यू क्लियर करना जॉइनिंग की गारंटी नहीं है.

खराब एक्सपीरियंस भी बड़ी वजह

सिर्फ बेहतर ऑफर ही वजह नहीं है. 32% कैंडिडेट्स का कहना है कि उनकी दिलचस्पी ही खत्म हो गई. 23% लोगों ने खराब इंटरव्यू एक्सपीरियंस और कमजोर कम्युनिकेशन को जिम्मेदार ठहराया. वहीं कई लोगों को सैलरी और रोल पसंद नहीं आया. यानी अगर शुरुआत से चीजें साफ न हों, तो कैंडिडेट दूर हो जाता है.

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AI का रोल सीमित

दिलचस्प बात ये है कि AI इस ट्रेंड की मुख्य वजह नहीं है. सिर्फ 34% लोगों ने AI टूल्स का इस्तेमाल किया. यानी टेक्नोलॉजी मदद कर रही है, लेकिन घोस्टिंग का कारण कुछ और ही है. इस समस्या का हल काफी हद तक कंपनियों के हाथ में है. कैंडिडेट्स का मानना है कि साफ और समय पर कम्युनिकेशन सबसे जरूरी है. सैलरी, रोल और टाइमलाइन पहले ही क्लियर कर दी जाए तो भरोसा बना रहता है. इंटरव्यू के बाद आगे क्या होगा, ये बताना भी जरूरी है. यानी जितनी पारदर्शिता होगी, उतना ही ये ट्रेंड कम होगा.

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