बिहार में शिक्षक बनने की तैयारी कर रहे युवाओं के लिए हाल ही में एक बड़ी खबर सामने आई है. खबर यह है कि अब राज्य सरकार अपनी अलग से शिक्षक पात्रता परीक्षा यानी बीटीईटी या राज्य स्तरीय टीईटी आयोजित नहीं करेगी. इस फैसले के बाद सोशल मीडिया और कोचिंग संस्थानों में तरह-तरह की चर्चाएं शुरू हो गईं. कुछ लोगों ने यह भी कहना शुरू कर दिया कि अब बिहार में बिना टीईटी के ही शिक्षक बन जाएंगे. लेकिन सच्चाई इससे थोड़ी अलग है और इसे साफ तौर पर समझना जरूरी है.
अब नहीं कराया जाएगा TET
दरअसल, बिहार सरकार ने यह तय किया है कि अब राज्य स्तर पर अलग से टीचर एलिजिबिलिटी टेस्ट नहीं कराया जाएगा. पहले स्थिति यह थी कि शिक्षक भर्ती के लिए उम्मीदवार के पास या तो बिहार की बीटीईटी या फिर केंद्र सरकार की सीटीईटी की पात्रता होनी चाहिए. दोनों परीक्षाएं मान्य थीं. अब सरकार राज्य वाली परीक्षा को बंद कर केवल केंद्रीय शिक्षक पात्रता परीक्षा यानी सीटीईटी को मान्य रखेगी.
क्यों लिया गया फैसला?
सरकार के इस फैसले के पीछे कई कारण बताए जा रहे हैं. एक कारण यह माना जा रहा है कि अलग-अलग परीक्षाओं से प्रक्रिया जटिल हो जाती थी और कई बार विवाद भी खड़े होते थे. अलग से राज्य परीक्षा कराने में समय और संसाधन भी ज्यादा लगते थे. अब यदि सिर्फ सीटीईटी को मान्यता दी जाएगी तो प्रक्रिया एकरूप हो जाएगी और पात्रता को लेकर भ्रम की स्थिति भी कम होगी.
कैसे होती है परीक्षा?
शिक्षक भर्ती की मुख्य परीक्षा और चयन प्रक्रिया पहले की तरह ही अलग से होगी. पात्रता परीक्षा केवल यह तय करती है कि उम्मीदवार आवेदन करने योग्य है या नहीं. अंतिम चयन लिखित परीक्षा, मेरिट और अन्य नियमों के आधार पर ही किया जाएगा. कुल मिलाकर स्थिति साफ है कि बिहार में शिक्षक बनने के लिए अब भी पात्रता परीक्षा पास करना जरूरी है. केवल राज्य की बीटीईटी नहीं होगी, बल्कि केंद्रीय सीटीईटी ही मान्य रहेगी. इसलिए अभ्यर्थियों को भ्रम में आने की जरूरत नहीं है. जिन्हें शिक्षक बनना है, उन्हें सीटीईटी पर ध्यान केंद्रित करना होगा और आगे आने वाली भर्ती परीक्षाओं की तैयारी जारी रखनी होगी.