13 साल में IIT-JEE, अब AI रिसर्चर...कौन हैं बिहार के सत्यम कुमार, पढ़िए इनकी इंस्पायरिंग कहानी यहां

Satyam Kumar Success Story : बिहार के बक्सर जिले के एक छोटे गांव से निकलकर सत्यम कुमार ने कम उम्र में IIT-JEE पास कर अपनी पहचान बनाई. इन दिनों उनका फोकस AI और ब्रेन-कंप्यूटर इंटरफेस रिसर्च पर है और अमेरिका में मशीन लर्निंग सिस्टम्स पर काम कर रहे हैं.

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साल 2019 में सत्यम कुमार अमेरिका चले गए और टेक्सास यूनिवर्सिटी के ऑस्टिन में इलेक्ट्रिकल एंड कंप्यूटर इंजीनियरिंग में PhD शुरू की.

Indian AI Researcher Story: बिहार के एक छोटे से गांव से निकलकर अमेरिका की टॉप रिसर्च लैब्स तक पहुंचना आसान नहीं होता है, लेकिन सत्यम कुमार ने ऐसा कर दिखाया है. 20 जुलाई 1999 को बिहार के बक्सर जिले के बखोरापुर गांव में जन्मे सत्यम एक किसान परिवार से आते हैं. उनका सफर उस समय चर्चा में आया जब खबरें आईं कि उन्होंने महज 13 साल की उम्र में IIT-JEE जैसी कठिन परीक्षा पास कर ली. इसके बाद वह IIT कानपुर पहुंचे और देश के सबसे कठिन इंजीनियरिंग सिस्टम का हिस्सा बने. आइए जानते हैं उनके अमेरिकी रिसर्च लैब तक पहुंचने की कहानी..

IIT कानपुर से अमेरिका तक का सफर

सत्यम कुमार ने 2013 से 2018 के बीच IIT कानपुर से इलेक्ट्रिकल इंजीनियरिंग में बीटेक-एमटेक ड्यूल डिग्री पूरी की. इस दौरान उन्होंने सिर्फ क्लासरूम तक खुद को सीमित नहीं रखा, बल्कि रिसर्च और प्रैक्टिकल प्रोजेक्ट्स में भी एक्टिव रहे. उनका लिंक्डइन प्रोफाइल बताता है कि वह इंटेलीजेंट सिस्टम एंड स्लीप लेबोरेट्री से जुड़े रहे और रोबोटिक्स क्लब, IIT कानपुर जैसी स्टूडेंट एक्टिविटीज का भी हिस्सा बने. यहीं से उनका इंट्रेस्ट उन टेक्नोलॉजीज में बढ़ी, जो असली दुनिया की प्रॉब्लम्स सॉल्व कर सकती है.

रोबोटिक्स, स्कॉलरशिप और रिसर्च की शुरुआत

IIT के दिनों में सत्यम ने एम्फीबियन रोबोटिक्स जैसे इनोवेटिव प्रोजेक्ट्स पर काम किया. उनकी टीम ने 'टेककृति 2014' के ROBOPIRATES कॉम्पटिशन में सेकंड रनर-अप पोजीशन हासिल की. इसके अलावा उन्हें चारपाक छात्रवृत्ति (Charpak Scholarship 2016) के तहत फ्रांस में रिसर्च इंटर्नशिप का मौका मिला और गवर्नमेंट ऑफ इंडिया टीचिंग असिस्टेंट फेलोशिप (2017) भी मिली.

अमेरिका में PhD और ब्रेन-कंप्यूटर इंटरफेस रिसर्च

साल 2019 में सत्यम कुमार अमेरिका चले गए और टेक्सास यूनिवर्सिटी के ऑस्टिन में इलेक्ट्रिकल एंड कंप्यूटर इंजीनियरिंग में PhD शुरू की. उन्होंने सितंबर 2024 में अपनी डॉक्टरेट पूरी की और 24 सितंबर 2024 को थीसिस डिफेंड की. उनकी रिसर्च का फोकस AI और ब्रेन कंप्यूटर इंटरफेसेस (BCI) था. ये इस बात पर काम करता है कि हमारे दिमाग के सिग्नल्स को पढ़कर मशीनों को कैसे कंट्रोल किया जाए, जिसका इस्तेमाल फ्यूचर में रिहैबिलिटेशन और असिस्टिव टेक्नोलॉजी में हो सकता है.

ऐपल से जुड़ने के बाद बढ़ी चर्चा

इसके बाद सत्यम कुमार का नाम सोशल मीडिया पर तब छाया, जब उनके प्रोफाइल में Apple (स्विट्जरलैंड) में मशीन लर्निंग इंटर्न के तौर पर काम करने का जिक्र आया. इसी वजह से कई वायरल पोस्ट्स में उन्हे 'ऐपल एआई रिसर्चर' कहा गया. अक्टूबर 2024 तक उनका लिंक्डइन प्रोफाइल उन्हें टेक्सास इंस्ट्रूमेंट्स (USA) में मशीन लर्निंग सिस्टम्स रिसर्च इंजीनियर के तौर पर दिखाता है. ये उनके करियर का अगला कदम है, जहां वह एकेडमिक रिसर्च से निकलकर रीयल-वर्ल्ड मशीन लर्निंग सिस्टम्स पर काम कर रहे हैं.

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