10 लाख की नौकरी छोड़ जर्मनी पहुंची 26 साल की भारतीय छात्रा, बताया हर महीने का खर्च

अकेले रहने पर खाना बनाना, कपड़े धोना और सरकारी कागजात से जुड़े काम सब खुद संभालने पड़ते हैं. उसके मुताबिक शुरुआत में यह आसान नहीं होता, लेकिन धीरे-धीरे आदत हो जाती है और आत्मविश्वास भी बढ़ता है. अलग-अलग देशों के लोगों से मिलना भी उसके लिए काफी अहम अनुभव रहा.

विज्ञापन
Read Time: 4 mins
छात्रा ने बताया कि भले ही वह पब्लिक यूनिवर्सिटी में पढ़ रही है, लेकिन इंटरनेशनल स्टूडेंट्स को हर सेमेस्टर करीब 1.5 लाख रुपए ट्यूशन फीस देनी पड़ती है.

Education expenses in Germany : भारत में अच्छी सैलरी वाली नौकरी छोड़कर विदेश पढ़ने जाना सुनने में जितना आसान लगता है, जमीन पर उतना ही चुनौती भरा होता है. जर्मनी में पढ़ रही एक 26 साल की भारतीय छात्रा ने अपनी मासिक कमाई, खर्च और वहां की जिंदगी के अनुभव साझा कर इसी सच्चाई पर रोशनी डाली है. यह छात्रा जर्मनी के यूनिवर्सिटी ऑफ हीडलबर्ग में साउथ एशिया में MA कर रही है. उसने बताया कि भारत में वह करीब 10 लाख रुपए सालाना कमा रही थी, लेकिन बेहतर अकादमिक मौके के लिए उसने नौकरी छोड़ने का फैसला लिया. उसके मुताबिक पढ़ाई और रिसर्च के अवसर अच्छे हैं, लेकिन खर्च संभालने के लिए बहुत सोच-समझकर चलना पड़ता है.

पार्ट टाइम काम से चल रहा गुजारा

छात्रा ने बताया कि वह अभी एक गिफ्ट और यादगार चीजें बेचने वाली दुकान में पार्ट टाइम काम करती है. वहां उसे जर्मनी का तय न्यूनतम वेतन मिलता है, जो 13 यूरो प्रति घंटा है. भारतीय करेंसी में यह करीब 1400 रुपए प्रति घंटा बैठता है. हर महीने उसका किराया 450 यूरो यानी लगभग 49,000 रुपए है. पूरे जर्मनी में ट्राम, बस और रीजनल ट्रेन में चलने वाला पब्लिक ट्रांसपोर्ट पास 45 यूरो यानी करीब 4,800 रुपए महीना पड़ता है.

हेल्थ इंश्योरेंस पर करीब 145 यूरो यानी लगभग 15,500 रुपए खर्च होते हैं. राशन पर वह हर महीने 80 से 100 यूरो यानी करीब 8,500 से 10,000 रुपए खर्च करती है. बाहर खाने पर 50 से 60 यूरो यानी लगभग 5,300 से 6,500 रुपए लगते हैं. मोबाइल रिचार्ज पर करीब 10 यूरो यानी लगभग 1,000 रुपए खर्च होते हैं. इन सबको जोड़ें तो उसका कुल मासिक खर्च करीब 800 यूरो यानी लगभग 85,000 रुपए बैठता है.

पब्लिक यूनिवर्सिटी में भी देनी पड़ती है फीस

छात्रा ने बताया कि भले ही वह पब्लिक यूनिवर्सिटी में पढ़ रही है, लेकिन इंटरनेशनल स्टूडेंट्स को हर सेमेस्टर करीब 1.5 लाख रुपए ट्यूशन फीस देनी पड़ती है. जर्मनी जाने के लिए ब्लॉक्ड अकाउंट रखना भी जरूरी होता है. उसने बताया कि एक साल के लिए उसे करीब 12 लाख रुपए जमा कराने पड़े. यह रकम हर महीने करीब 1 लाख रुपए के रूप में मिलती है ताकि रहने का खर्च चल सके. दो साल में कुल खर्च करीब 30 लाख रुपए तक पहुंच जाता है. इसमें लगभग 24 लाख रुपए रहने-खाने जैसे खर्चों पर और करीब 6 लाख रुपए चार सेमेस्टर की फीस पर लगते हैं.

फायदे और मुश्किलें दोनों हैं यहां

छात्रा ने कहा कि उसे अपने फैसले पर कोई पछतावा नहीं है. जर्मनी की साफ हवा और पानी, पैदल चलने लायक शहर, पब्लिक स्पेस और म्यूजियम उसे बहुत पसंद आए. उसने खास तौर पर यहां के वर्क-लाइफ बैलेंस की तारीफ की और कहा कि लोग इसे सच में मानते हैं. हालांकि मौसम कभी-कभी मुश्किल हो जाता है. गर्मियों में तापमान 38 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच जाता है, जबकि सर्दियों में यह गिरकर माइनस 10 डिग्री तक चला जाता है.

अकेले रहने पर खाना बनाना, कपड़े धोना और सरकारी कागजात से जुड़े काम सब खुद संभालने पड़ते हैं. उसके मुताबिक शुरुआत में यह आसान नहीं होता, लेकिन धीरे-धीरे आदत हो जाती है और आत्मविश्वास भी बढ़ता है. अलग-अलग देशों के लोगों से मिलना भी उसके लिए काफी अहम अनुभव रहा.

Advertisement

रेसिज्म है, मगर ज्यादा नहीं

रेसिज्म के सवाल पर छात्रा ने कहा कि अनुभव अलग-अलग हो सकते हैं. ज्यादातर लोग शालीन रहते हैं, लेकिन कुछ बुजुर्ग लोगों का व्यवहार रूखा लगता है. उसने कहा कि अब वह इसे नजरअंदाज कर देती है. करीब 10 लाख सालाना की नौकरी छोड़ने और लगभग 30 लाख रुपए खर्च करने के बाद भी छात्रा का कहना है कि पढ़ाई, एक्सपोजर और व्यक्तिगत आजादी के लिहाज से जर्मनी जाना उसके लिए सही फैसला साबित हुआ है.

यह भी पढ़ें- भारत में कहां सबसे सस्ती है पढ़ाई? देख लीजिए पूरी लिस्ट

Featured Video Of The Day
Dubai Under Attack: ईरान के ड्रोन हमले से हिली दुबई की इमारतें, Sheikh Zayed Road पर सायरन की गूंज
Topics mentioned in this article