'एक ट्रक दवाएं, 10 हजार सैनिटरी पैड...', जंतर-मंतर पर खाना ही नहीं, मेडिकल मदद की भी आई बाढ़- ग्राउंड रिपोर्ट
जंतर-मंतर पर मौजूद वॉलंटियर डॉक्टरों का कहना है कि कई दिनों तक खुले में रहने के बाद प्रोटेस्टर्स गले में खराश, सिरदर्द, बुखार और डिहाइड्रेशन यानी शरीर में पानी की कमी से परेशान हो रहे हैं.
दिल्ली के जंतर-मंतर पर हजारों लोगों की भीड़ है. विरोध और नारों के बीच ऐसा लग रहा है कि लोग सुध-बुध खो बैठे हैं. प्रदर्शनकारी इतना ज़्यादा मगन हैं कि वे अपना ख़याल रखना भूल जा रहे हैं. ऐसे में बहुत से प्रोटेस्टर्स को सेहत से जुड़ी दिक़्क़तें हो रही हैं. इनमें तेज़ गर्मी, ज़्यादा उमस और भीड़-भाड़ वाली स्थिति की वजह से वायरल इन्फेक्शन, डिहाइड्रेशन और दूसरी बीमारियां शामिल हैं. प्रोटेस्ट साइट पर मौजूद वॉलंटियर डॉक्टरों का कहना है कि प्रदर्शनकारी कई दिनों तक खुले में रहने के बाद गले में खराश, सिरदर्द, बुखार और डिहाइड्रेशन यानी शरीर में पानी की कमी से परेशान हैं. खुले में सोने और सही वक़्त पर खाना और आराम न मिल पाने की वजह से स्थिति और ज़्यादा ख़राब हो गई है.
पुलिस की लाठीचार्ज में घायल हुए कई प्रदर्शनकारियों का इलाज इन कैंपों में किया जा रहा है. जंतर-मंतर आकर प्रदर्शनकारियों का ट्रीटमेंट करने वाले कुछ डॉक्टरों से हमने बात की.

क्लास छोड़कर जंतर-मंतर पर मौजूद
दिल्ली की रहने वाली नीट एस्पिरेंट सृष्टि NDTV के साथ बातचीत में कहती हैं, "मैं पांच दिनों से लगातार यहां पर आ रही हूं. मैंने इसके बारे में अपने पेरेंट्स को बताया, उन्होंने हमारा हौसला बढ़ाया. यहां पर अभी एक लड़की बेहोश हो गई थी, हमने उन्हें ओआरएस पिलाया और दवाइयां दीं."
वे आगे बताती हैं, "मेरी क्लासेज छूट रही हैं लेकिन मैं यहां पर लोगों की हेल्प करने आ रही हूं. हमें यहां पर आने वाले लोगों से मोटिवेशन मिल रहा है. यह हमारा देश है और यहां पर आकर लोगों की मदद करना हमारी ज़िम्मदारी है."

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कई शहरों से हेल्प करने आए डॉक्टर्स
वॉलंटियरी ऑर्गनाइजेश 'मेडिकल सर्विस सेंटर' के लिए काम करने वाले एमबीबीएस फाइनल इयर के स्टूडेंट अलीश सैफ़ी 22 जुलाई से जंतर-मंतर पर मौजूद हैं. वे कहते हैं, "हमने घायल लोगों के लिए मेडिकल कैंप लगाया है. अभी हमारे साथ 10 से 15 डॉक्टर्स काम कर रहे हैं. कोई चेन्नई से आया है, तो असम का है, तो कोई मध्य प्रदेश से आगर लोगों की मदद कर रहा है. किसी से कहा नहीं गया है, सभी खुद आए हुए हैं और काम कर रहे हैं.

'ख़ुद का हॉस्पिटल छोड़कर आया'
महाराष्ट्र के रायगढ़ ज़िले के खोपोली से डॉक्टर रियाज़ पठान अपनी प्राइवेट हॉस्पिटल छोड़कर लोगों की मदद करने जंतर-मंतर आए हैं. वे यहां पर ज़रूरतमंंद लोगों को फर्स्ट एड ट्रीटमेंट दे रहे हैं. डॉ. रियाज़ कहते हैं, "मैंने सोचा कि यह ऐतिहासिक प्रोटेस्ट है, मुझे भी इसका हिस्सा बनना चाहिए. जब अभिजीत दीपके और सोनम वांगचुक ने ऐलान कर दिया कि हम संसद की तरफ मार्च कर रहे हैं, तो मैं अपना ख़ुद का हॉस्पिटल छोड़कर दिल्ली आ गया. मुझे पता था कि यहां पर डॉक्टर्स की ज़रूरत पडे़गी."
वे आगे बताते हैं, "मैं यहां पर 19 जुलाई को आया. जब पुलिस लाठीचार्ज कर रही थी, तो मैं फर्स्ट-एड किट लेकर घूम रहा था. मैं घायल प्रदर्शकारियों को दवाइयां लगा रहा था और इलाज कर रहा था. अगले दिन हमारे पास क़रीब एक हज़ार मरीज आए और हमने उनको फर्स्ट-एड ट्रीटमेंट दिया."

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कहां से आ रहीं दवाइयां?
डॉक्टर रियाज़ बताते हैं कि मेडिकल कैंप में मौजूद यह दवाइयां प्रोटेस्ट में आने वाले लोग डोनेट कर रहे हैं. हमारे पास जितनी दवाइयां और मेडिकल किट है, सारी डोनेशन में मिली हैं. आप अगर आधे घंटे यहां पर रुकेंगे, तो देखेंगे कि लोग बैगों में भर-भर के दवाइयां लाकर दे रहे हैं.
"हमारे पास ज़रूरत से ज़्यादा दवाइयां आई हैं. एक ट्रक दवाइयां आई हैं. दस हज़ार से ज़्यादा सैनिटरी पैड्स डोनेशन में आया है. पार्सल के ज़रिए भी दवाइयां आ रही हैं. लोग केरल, हैदराबाद और कोलकाता जैसे शहरों से भेज रहे हैं."
अलीश सैफ़ी बताते हैं कि पहले दिन हम तीन डॉक्टर एक टेबल और ज़रूरी दवाइयों के तीन बॉक्स लेकर आए थे. इसके बाद हमारे साथ डॉक्टर्स जुड़ने लगे और लोग दवाइयां भी भेजने लगे.

सबसे ज़्यादा किस दवाई की ज़रूरत पड़ रही?
डॉ. रियाज़ बताते हैं कि प्रोटेस्ट साइट पर बहुत ज़्यादा भीड़ और उमस है. ऐसे में डिहाइड्रेशन की दिक़्क़त सबसे ज़्यादा होती है. लोगों को सबसे ज़्यादा ओआरएस की ज़रूरत पड़ रही है, हम उन्हें लिक्विड और पाउडर ओआरएस दे रहे हैं. इसके अलावा पेन किलर टैबलेट और स्प्रे की ज़रूरत पड़ रही है. हमारे पास ओआरएस, पेन किलर्स, मास्क, वाइप्स, ओइनमेंट्स और फर्स्ट एड ट्रीटमेंट के हर सामान मौजूद हैं. हर रोज़ हज़ार से ज़्यादा लोग दवाइयां लेने आते हैं.
दिल्ली के साउथ एक्सटेंशन की रहने वाली छात्रा रमीशा 12वीं क्लास में पढ़ती हैं और नीट एग्जाम की तैयारी कर रही हैं. वे मेडिकल सर्विस सेंटर के साथ जुड़ी हैं, जिसका कैंप जंतर-मंतर पर लगा हुआ है.
रमीशा कहती हैं, "मैं यहां पर लोगों की मदद करने आई हूं. ज़्यादा नारे लगाने की वजह से लोगों का गला ख़राब हो रहा है. सिरदर्द हो रहा है. हम उनको दवाइयां दे रहे हैं. हमें यहां पर डॉक्टर बने बिना लोगों की मदद करने का मौक़ा मिल रहा है. हमें यहां पर काम करके पढ़ने के लिए भी मोटिवेशन मिल रहा है."

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'दुनिया का सबसे अनोखा आंदोलन'
डॉक्यर रियाज़ के मुताबिक़, जंतर-मंतर पर चल रहा विरोध प्रदर्शन दुनिया का सबसे अनोखा आंदोलन है, जो अपने आप में ऐतिहासिक है. वे कहते हैं, "मुझे बहुत अच्छा लग रहा है कि मैं यहां पर सेवा दे पा रहा हूं. मैं आने वाली जेनरेशन और अपने बच्चों को बता पाऊंगा हूं कि इस आंदोलन में शामिल था. जैसे आज़ादी की लड़ाई में हम लोग हिस्सा नहीं ले पाए और हमें ऐसा लगता है कि हम क्यों नहीं थे. यह प्रोटेस्ट जब तक चलेगा, जब तक मैं यहां पर मौजूद रहूंगा. हम छत्रपति शिवाजी महराज के मावले हैं.
डॉक्टर अलीश सैफ़ी आगे बताते हैं, "हममें से कोई सफदरजंग, AIIMS, तो कोई बाबा साहेब अंबेडकर हॉस्पिटल में जॉब करता है. हम यहां पर रोटेशनली आते हैं. मेडिकल कैंप 24 घंटे खुला रहता है. कई लोग ऐसे हैं, जो दो दिनों तक सोए नहीं हैं और मेडिकल कैंप में आक काम कर रहे हैं. वे सिर्फ लोगों की सेवा करना चाहते हैं.
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