ज्यादा ब्लीडिंग, हाई ब्लड प्रेशर... बीकानेर के PBM अस्पताल में डिलीवरी के बाद प्रसूताओं की मौत की क्या वजह? Part-3

डिलीवरी के बाद महिलाओं की मौत और उनकी सेहत को लेकर NDTV की पड़ताल में बीकानेर के PBM अस्पताल में अलग पैटर्न सामने आए हैं.

ज्यादा ब्लीडिंग, हाई ब्लड प्रेशर... बीकानेर के PBM अस्पताल में डिलीवरी के बाद प्रसूताओं की मौत की क्या वजह? Part-3
बीकानेर के PBM अस्पताल में डिलीवरी के बाद प्रसूताओं की मौत की क्या वजह?

कमला पहले से ही डायबिटीज की मरीज थी, जिसके कारण डिलीवरी के समय उसकी हालत और खराब हो गई. डॉक्टरों ने उसे बार-बार तीसरा बच्चा न करने को कहा था. पर वह नहीं मानी और सिजेरियन डिलीवरी के बाद कमला की हालत ज्यादा ही बिगड़ गई. उसके होंठ सूख गए थे और चेहरा पर भी काफी सूजन आ गई थी. कमला की ननद ने कहा, "उन्हें उल्टी हो रही थी, इसलिए डॉक्टर उन्हें दूसरे वार्ड में ले गए. उन्हें डायलिसिस पर रखा गया." कमला तो इस मुश्किल दौर से बच गई, लेकिन बीकानेर के PBM अस्पताल में बच्चे को जन्म देने वाली शारदा की किस्मत ऐसी नहीं थी.

राजस्थान के सरकारी अस्पतालों में बीते दिनों डिलीवरी के बाद प्रसूताओं की मौत या उनकी बिगड़ी तबीयत को लेकर NDTV ने पड़ताल की. एनडीटीवी की पड़ताल के पहले पार्ट में कोटा के न्यू मेडिकल कॉलेज अस्पताल में बड़ी खामियां उजागर हुईं और दूसरे पार्ट ने जोधपुर के पावटा अस्पताल  में महिलाओं को दी जाने वाली IV ड्रिप की क्वालिटी पर सवाल उठाए गए, वहीं तीसरा हिस्सा बीकानेर के PBM अस्पताल में महिलाओं की डिलीवरी के मौत और अचानक से उनकी बिगड़ी हालत पर आधारित है.

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शारदा उन महिलाओं में से एक हैं, जिनकी बीकानेर के PBM अस्पताल में डिलीवरी के बाद मौत हो गई. शारदा के नवजात बच्चे को सबसे पहले उसकी मौसी सुनीता ने दूध पिलाया. अब बच्चे को उसके पिता के परिवार की देखरेख में सौंप दिया गया है. मौत से पहले शारदा को कुछ समय के लिए दिखना बंद हो गया था. ऐसा तब हुआ जब किडनी फेल होने की वजह से उनकी डायलिसिस चल रही थी. उनकी बहन सुनीता ने कहा, "जब उन्हें भर्ती कराया गया, तो वह ठीक लग रही थीं. उनका सी-सेक्शन हुआ और बेटे का जन्म हुआ. फिर उन्हें कंपकंपी होने लगी और वह बीमार पड़ गईं."

कमला की सास नवजात शिशु को चुप कराती हुईं.

कमला की सास नवजात शिशु को चुप कराती हुईं.

PBM अस्पताल के डॉक्टरों के मुताबिक, उन्हें डिलीवरी के बाद बहुत ज़्यादा ब्लीडिंग (पोस्टपार्टम हैमरेज) हुई थी. शारदा के अलावा पीबीएम अस्पताल में 20 साल की प्रीति भी थीं, जिनकी जान चली गई. प्रीती छह महीने की गर्भवती थीं और उन्हें नागौर से रेफर किया गया था. डॉक्टरों ने बताया कि प्रीति को पहले से ही गंभीर हाइपरटेंशन और एक्लेम्पसिया (अचानक दौरे पड़ना) की समस्या थी और वह गंभीर रीनल फेलियर की स्थिति में चली गई थीं.

सुनीता अपनी बहन शारदा की तस्वीर दिखाई हुई.

सुनीता अपनी बहन शारदा की तस्वीर दिखाई हुई.

शारदा के लक्षणों के बारे में एक सीनियर डॉक्टर ने कहा, "उन्हें जो दौरे पड़े, वे हाई ब्लड प्रेशर की वजह से दिमाग में हुए बदलावों से जुड़े थे. उन्हें कॉर्टिकल वेन थ्रॉम्बोसिस या HELLP सिंड्रोम (हीमोलिसिस, लिवर एंजाइम का बढ़ना और प्लेटलेट काउंट कम होना) हो गया था. ऐसे मामलों में दिमाग के पिछले हिस्से में सूजन आ सकती है, जिससे कुछ समय के लिए अंधापन हो सकता है. हालांकि, यह हमेशा के लिए अंधापन नहीं था, बल्कि यह उस बीमारी का एक लक्षण था."

इन मामलों में दवाओं की रिपोर्ट का इंतज़ार है, ताकि पूरी स्थिति साफ़ हो सके, लेकिन NDTV ने उस समय भर्ती कुछ महिलाओं के मेडिकल रिकॉर्ड देखे, जिनमें सेप्सिस का ज़िक्र था.

एक डॉक्टर ने कहा, "सेप्सिस (इंफेक्शन) किसी भी मरीज़ को हो सकता है. यह भर्ती होने के समय मरीज में पहले से मौजूद हो सकता है या अस्पताल में भी हो सकता है" फ़िलहाल, दिल्ली और जोधपुर एम्स की एक एक्सपर्ट टीम इस मामले की जांच कर रही है. प्रसूताओं की मौतों और बिगड़ती सेहत के अलावा NDTV की पड़ताल में अस्पताल के इंफ्रास्ट्रक्चर भी काफी खराब स्थिति में मिले. अस्पताल के रास्तों पर पान के दाग थे और ड्रेनेज के छेद खुले हुए थे. गंदगी के बारे में पूछे जाने पर एक सीनियर अधिकारी ने नाम न बताने की शर्त पर कहा कि रिव्यू कमेटी ने अस्पताल में इंफेक्शन-कंट्रोल के लिए सख़्त उपाय करने की सलाह दी है. 

बीकानेर के PBM अस्पताल के कुछ गलियारों में पान के दाग देखे जा सकते हैं.

बीकानेर के PBM अस्पताल के कुछ गलियारों में पान के दाग देखे जा सकते हैं.

बीकानेर में डिलीवरी के बाद महिलाओं की मौत और उनके कंप्लीकेशन के मामले कोटा और जोधपुर में सामने आए मामलों से अलग थे. ये मामले कम समय में नहीं, बल्कि लगभग तीन हफ़्ते (मई के मध्य से जून के पहले हफ़्ते तक) में सामने आए. इसलिए डॉक्टरों का कहना है कि ये किसी एक ही वजह से जुड़े मामले नहीं हैं. उन्होंने यह भी बताया कि मामलों में कोई एक पैटर्न नहीं दिखा. सभी महिलाओं का सी-सेक्शन नहीं हुआ था. उनमें सिर्फ एक ही बात सामान्य थी कि वे सभी गर्भवती थीं.

सीनियर डॉक्टरों और जांचकर्ताओं का कहना है कि उसी समय इलाज करा रही छह महिलाओं में से हर एक की मेडिकल हिस्ट्री और जोखिम के कारण अलग-अलग थे. एक महिला छह महीने की गर्भवती थी और उसे हाई ब्लड प्रेशर की समस्या थी, जबकि दूसरी को डायबिटीज़ थी और कुछ अन्य में गंभीर एनीमिया (खून की कमी) थी. डॉक्टर ने बताया कि ज़्यादातर मरीज़ों को दूसरे अस्पतालों से यहां भेजा गया था और उन्हें पहले से ही 'हाई-रिस्क' की कैटेगरी में रखा गया था. उनकी स्थितियों में गर्भावस्था के कारण होने वाला गंभीर हाई ब्लड प्रेशर और डिलीवरी के बाद ज्यादा ब्लीडिंग (Postpartum Haemorrhage) से लेकर पहले से मौजूद डायबिटीज़, किडनी की बीमारी और गर्भावस्था से जुड़ी अन्य गंभीर समस्याएं शामिल थीं. डॉक्टरों का कहना है कि पीबीएम अस्पताल के सभी 06 मरीजों की ब्लड कल्चर रिपोर्ट में कोई बैक्टीरियल ग्रोथ नहीं मिली.

डॉक्टरों का तर्क है कि कई मरीज़ों में 'एक्यूट किडनी इंजरी' (अचानक किडनी खराब होना) की दिक्कत कई मेडिकल कंडीशन के कारण हो सकती है, इनमें बहुत ज़्यादा खून बहना, इंफेक्शन, डिहाइड्रेशन, हाई ब्लड प्रेशर और पहले से मौजूद बीमारियां शामिल हैं.

अस्पताल की इंटरनल जांच कमेटी ने निष्कर्ष निकाला कि अब तक कोई एक समान कारण सामने नहीं आया है. हालांकि, डॉक्टरों का मानना ​​है कि पहले से मौजूद बीमारियां, गंभीर एनीमिया, डिहाइड्रेशन, पोषण की कमी, अत्यधिक गर्मी और अन्य क्लिनिकल कारक महिलाओं की हालत बिगड़ने का कारण हो सकते हैं. 

अस्पताल के एक अन्य डॉक्टर ने कहा, "यह सब मई और जून के महीनों में हुआ. गर्मी बहुत ज्यादा थी और इन महिलाओं में पहले से मौजूद बीमारियों के अलावा गंभीर डिहाइड्रेशन भी था. डॉक्टर के अनुसार, एक्यूट रीनल फेलियर (अचानक किडनी फेल होना) के कई कारण हो सकते हैं,- जैसे डिलीवरी के बाद ज्यादा ब्लीडिंग, हाई ब्लड प्रेशर, डिहाइड्रेशन. ये सभी मामले सिर्फ़ किडनी फेलियर के नहीं थे, बल्कि मल्टी-ऑर्गन फेलियर (कई अंगों का एक साथ काम करना बंद कर देना) के थे.

डॉक्टर ने आगे कहा कि प्रसूताओं की क्लिनिकल कंडीशन अलग-अलग थी. जिन दवाओं की जांच की गई, उन्हें सील कर दिया गया है. हम उस समय पड़ रही भयंकर गर्मी को भी नजरअंदाज नहीं कर सकते हैं. सूत्रों का कहना है कि पिछले साल मई और जून के बीच इसी समय के दौरान डिलीवरी के बाद कम से कम चार-पांच महिलाओं की मौत की वजह हीटवेव और डिहाइड्रेशन थी.

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जब इन महिलाओं की डिलीवरी से पहले और बाद की कंडीशन के बारे में पूछा गया, तो एक सीनियर डॉक्टर ने कहा, "हीटवेव के दौरान ये महिलाएं गंभीर रूप से डिहाइड्रेटेड हालत में आती हैं. मरीज की देखरेख एक ज़रूरी प्रोटोकॉल है. हालांकि, यह समझना होगा कि इनमें से ज़्यादातर मामले रेफरल वाले होते हैं और इलाज करने वाले डॉक्टरों को उनकी क्लिनिकल हिस्ट्री के बारे में पूरी जानकारी नहीं होती. जब डिहाइड्रेशन का पता चलता है, तो उन्हें ज़रूरी देखभाल दी जाती है, लेकिन यह भी ध्यान रखना चाहिए कि ये सरकारी अस्पताल है, जहां कमजोर आर्थिक पृष्ठभूमि वाले मरीजों का भारी बोझ होता है. इसके कई कारण हैं. हमारे पास ज़्यादातर जटिल मामले ही आते हैं."

इंटरनल कमेटी ने बताया कि बीकानेर के PBM अस्पताल के मामलों में अब तक कुछ भी असामान्य नहीं पाया गया है. इस अस्पताल में एक महीने में 1,000 से ज़्यादा डिलीवरी होती हैं. राजस्थान के स्वास्थ्य मंत्री गजेंद्र सिंह खिंवसर ने भी इस बात पर ज़ोर दिया कि बीकानेर में जिन महिलाओं में गंभीर जटिलताएं देखी गईं, वे अस्पताल पहुंचने पर पहले से ही गंभीर रूप से बीमार थीं. महिलाओं में जटिलताएं आने के बाद मंत्री ने बीकानेर का दौरा किया था.

एक महिला (तारा) अपने माता-पिता के साथ रहने के लिए नागौर गई थी, जहां भीषण गर्मी के कारण उसकी तबीयत बिगड़ गई. उस समय तापमान 47 से 48 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच रहा था. उसे गंभीर दिक्कतें हुई और फिर उसे वेंटिलेटर पर रखा गया. जब तारा को बीकानेर रेफर किया गया, तो उसकी हालत और भी बिगड़ चुकी थी. उसे फिर से वेंटिलेटर पर रखना पड़ा. तारा बच गई और उसे अस्पताल से छुट्टी दे दी गई.

गजेंद्र सिंह खींवसर

चिकित्सा एवं स्वास्थ्य मंत्री, राजस्थान सरकार

मंत्री ने कहा कि बीकानेर में भर्ती कराई गई महिलाएं हाई-रिस्क रेफरल थीं और उन्हें कई गंभीर मेडिकल समस्याएं थीं. वहां आने वाली महिलाएं पहले से ही गंभीर हालत में थीं. वे सामान्य डिलीवरी के लिए नहीं आई थीं. उन्होंने यह भी कहा कि इन घटनाओं को राज्य में माताओं की सेहत से जुड़े कुल नतीजों के संदर्भ में देखा जाना चाहिए. 

मंत्री ने कहा, "राज्य के कुल रिकॉर्ड को देखिए. एक लाख डिलीवरी में (सामान्य और सिजेरियन दोनों शामिल) मातृ मृत्यु दर प्रति लाख 48 है, जो राष्ट्रीय औसत से बहुत कम है."

PBM अस्पताल में इमरती नाम की एक और महिला जिसे बच्चे के जन्म के बाद अधिक ब्लीडिंग (PPH) के कारण दिक्कतें हुई थीं, उसे किडनी फेलियर की गंभीर परेशानी का सामना करना पड़ा. इसकी असल वजह की अभी जांच चल रही है. जब NDTV ने अस्पताल का दौरा किया, तब इमरती भी अस्पताल में भर्ती मिली. एक डॉक्टर ने कहा, "हमें शक है कि उसे गंभीर डिहाइड्रेशन (शरीर में पानी की भारी कमी) हो गया था. उसके भाई लेकम ने कहा, "हम यहां खुशी के लिए आते हैं, लेकिन दुख लेकर लौटते हैं. 26 दिन हो गए हैं." 

इस बीच परिवार अस्पताल के फर्श पर बैठे नवजातों को चुप कराते उम्मीद कर रहे हैं कि जिन महिलाओं ने बच्चे को जन्म दिया है, वे जल्द ही ठीक होकर घर आएंगी. अस्पताल से छुट्टी मिलने के बाद 19 साल की रहीला काफी कमजोर हो गई है और अभी घर पर है. वह कहती है कि मैंने बच्चे को जन्म दिया और फिर मेरी तबीयत बिगड़ गई. उसके बाद मुझे कुछ भी याद नहीं है.

अस्पताल से छुट्टी मिलने के बाद घर पर मौजूद रहीला

अस्पताल से छुट्टी मिलने के बाद घर पर मौजूद रहीला

उनके पति आकिब ने बताया कि डिलीवरी के बाद करीब छह घंटे तक रहीला ठीक लग रही थीं, लेकिन फिर उन्हें ब्लीडिंग होने लगी. हालांकि, डॉक्टरों का कहना था कि रहीला को एनीमिया (खून की कमी) था. उनके पास ही उनका नवजात बच्चा सो रहा है. आकिब कमरे में आने वाले हर व्यक्ति से पहले सैनिटाइज़ करने के लिए कहते हैं, उन्हें डर है कि कहीं उनकी पत्नी को इन्फेक्शन न हो जाए.

(हर्षा कुमारी सिंह के इनपुट के साथ)