दुनिया को मिल गया दूसरा आइंस्टीन! 30 साल की इस लड़की को मुंह मांगी सैलरी देने के लिए तैयार हैं कंपनियां

साबरीना गोंजालेज पास्टरस्की एक ऐसी साइंटिस्ट हैं, जिनकी कहानी पूरी दुनिया को हैरान करती है. बचपन में घर के गैरेज से प्लेन बनाने वाली यह लड़की आज फिजिक्स और स्पेस रिसर्च की दुनिया का बड़ा नाम बन चुकी है.

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इस लड़की का दिमाग आइंस्टीन जैसा

Next Einstein Girl: क्या आपने कभी सोचा है कि कोई बच्ची अपने घर के गैरेज में खड़े होकर जहाज बना दे और फिर उसी जहाज को खुद उड़ाए भी. यह कोई फिल्म की कहानी नहीं है, बल्कि हकीकत है. इस लड़की का नाम साबरीना गोंजालेज पास्टरस्की है. आज दुनिया की बड़ी-बड़ी कंपनियां, रिसर्च इंस्टीट्यूट और नामी यूनिवर्सिटीज इस लड़की को अपने साथ काम करते देखना चाहती हैं. लोग इन्हें 'अगली आइंस्टीन' कहते हैं, हालांकि साबरीना खुद इस टैग से थोड़ा असहज महसूस करती हैं.

गैरेज से शुरू हुई उड़ान की कहानी

साबरीना का जन्म 3 जून 1993 को अमेरिका के शिकागो शहर में हुआ. उनके पैरेंट्स पेशे से वकील थे. पिता को इंजीनियरिंग की भी अच्छी नॉलेज थी. घर का माहौल पढ़ाई और सोचने-समझने वाला था. बचपन से ही साबरीना को मशीन, उड़ान और आसमान से जुड़े सवाल परेशान करते थे. जब वह सिर्फ 9 साल की थीं, तब पहली बार हवाई जहाज में बैठीं. वहीं से उनके मन में उड़ान को लेकर गहरी दिलचस्पी पैदा हो गई.

10वें जन्मदिन पर उनके पिता और दादा ने उन्हें एक छोटी सा प्लेन गिफ्ट किया. यही पल उनकी जिंदगी का टर्निंग पॉइंट बन गया. 12 साल की उम्र में उन्होंने अपने घर के गैरेज में खुद का प्लेन बनाना शुरू किया और 16 साल की होते-होते उसी प्लेन को खुद उड़ाया. इतनी कम उम्र में ऐसा कर दिखाना पूरी दुनिया के लिए हैरानी की बात थी.

हार्वर्ड ने मना किया, MIT ने पहचान लिया

जब कॉलेज में एडमिशन की बारी आई, तो कहानी थोड़ी दिलचस्प हो गई. साबरीना ने हार्वर्ड और MIT जैसी टॉप यूनिवर्सिटीज़ में अप्लाई किया. हार्वर्ड ने उन्हें रिजेक्ट कर दिया और MIT ने वेटलिस्ट में डाल दिया. आमतौर पर यहीं कई लोग हार मान लेते हैं. लेकिन जैसे ही MIT के प्रोफेसरों को पता चला कि साबरीना खुद का प्लेन बना चुकी हैं और उसे उड़ा भी चुकी हैं, उनका नजरिया बदल गया.

आखिरकार MIT ने उन्हें एडमिशन दे दिया. यही फैसला आगे चलकर इतिहास बन गया. जहां उन्होंने नासा में इंटर्नशिप की, कई अवॉर्ड जीते और फिर एयरोस्पेस छोड़कर फिजिक्स जैसे टफ सब्जेक्ट को चुना. उन्होंने 5.0 GPA के साथ टॉप किया. MIT के फिजिक्स प्रोग्राम में दशकों बाद कोई महिला टॉपर बनी थी. तभी से लोग कहने लगे कि इस लड़की का दिमाग आइंस्टीन जैसा है.

करोड़ों का ऑफर ठुकराया, 27 साल में बनीं प्रोफेसर

साबरीना को फोर्ब्स 30 अंडर 30 जैसे बड़े सम्मान मिले. एक नामी यूनिवर्सिटी ने उन्हें करीब 1.1 मिलियन डॉलर का ऑफर दिया, लेकिन उन्होंने यह ऑफर ठुकरा दिया. उनका कहना था कि वह सिर्फ पैसे के लिए नहीं, बल्कि सही सवालों के जवाब ढूंढने के लिए काम करना चाहती हैं. महज 27 साल की उम्र में वह दुनिया के मशहूर रिसर्च इंस्टीट्यूट में फिजिक्स प्रोफेसर बन गईं, जो रिकॉर्ड है.

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