NEET में बार-बार पेपर लीक, लेकिन JEE में ठीक... इंजीनियरिंग और मेडिकल के एग्जाम में क्या है अंतर?

Why Neet Paper Leaks Not Jee Main. NEET UG में बार-बार पेपर लीक की खबरें सामने आती हैं, जबकि JEE Main में ऐसी घटनाएं कम देखने को मिलती हैं. दोनों परीक्षाओं के सिस्टम में आखिर क्या बड़ा फर्क है, चलिए आपको बताते हैं.

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NEET और JEE परीक्षा में क्या है बड़ा अंतर

Why Neet Paper Leaks Not Jee Main: देश की सबसे बड़ी मेडिकल एंट्रेंस परीक्षा NEET UG एक बार फिर विवादों में आ गई है. 2024 के बाद अब 2026 में भी पेपर लीक की खबरों ने लाखों छात्रों की टेंशन बढ़ा दी है. सोशल मीडिया पर वायरल हुए कथित पेपर के बाद परीक्षा तक रद्द करनी पड़ी. वहीं दूसरी तरफ JEE Main जैसी बड़ी परीक्षा में इस तरह की शिकायतें बहुत कम सुनने को मिलती हैं. ऐसे में छात्रों और पैरेंट्स के मन में यही सवाल उठ रहा है कि आखिर NEET में बार-बार गड़बड़ी क्यों होती है और JEE Main ज्यादा सुरक्षित कैसे रहती है.

ऑफलाइन परीक्षा से बढ़ता है रिस्क

NEET अभी भी ऑफलाइन मोड में कराई जाती है. इसमें लाखों पेपर पहले से छापे जाते हैं और उन्हें अलग-अलग शहरों तक पहुंचाया जाता है. इस दौरान पेपर कई जगहों से होकर गुजरते हैं. ऐसे में लीक का खतरा बढ़ जाता है. वहीं JEE Main पूरी तरह ऑनलाइन परीक्षा है. इसमें सवाल डिजिटल सिस्टम में सुरक्षित रहते हैं और परीक्षा शुरू होने से ठीक पहले ही स्क्रीन पर आते हैं. इसी वजह से पेपर पहले से बाहर आना आसान नहीं होता.

एक ही पेपर से बढ़ जाती है परेशानी

NEET पूरे देश में एक ही दिन और एक ही प्रश्नपत्र के साथ होती है. अगर कहीं भी पेपर लीक हो जाए तो उसका असर लाखों छात्रों पर पड़ सकता है. यही वजह है कि विवाद बड़ा बन जाता है. दूसरी तरफ JEE Main कई शिफ्ट में कराई जाती है. हर शिफ्ट में अलग सवाल पूछे जाते हैं. इसलिए अगर किसी एक सेंटर पर गड़बड़ी हो भी जाए तो पूरी परीक्षा प्रभावित नहीं होती.

NEET यूजी परीक्षा एक ही चरण में होती है, वहीं JEE में मेन्स के बाद Advanced परीक्षा भी होती है. इससे दोनों स्तर पर छात्रों की छंटनी हो जाती है और पेपर लीक की संभावना भी कम होती है. 

परीक्षा केंद्रों में भी बड़ा फर्क

NEET के लिए हजारों स्कूल और कॉलेज परीक्षा केंद्र बनाए जाते हैं. हर जगह सुरक्षा का स्तर एक जैसा नहीं होता. कई जगह निगरानी कमजोर भी रहती है. वहीं JEE Main चुनिंदा डिजिटल सेंटर पर होती है. वहां CCTV, बायोमेट्रिक और नेटवर्क मॉनिटरिंग जैसी सुविधाएं रहती हैं. इससे सुरक्षा ज्यादा मजबूत मानी जाती है.

क्या बदल सकता है NEET का सिस्टम?

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लगातार विवादों के बाद अब ये चर्चा तेज हो गई है कि NEET को भी ऑनलाइन या हाइब्रिड मोड में कराया जा सकता है. हालांकि इतनी बड़ी परीक्षा को पूरी तरह डिजिटल बनाना आसान नहीं होगा, क्योंकि कई इलाकों में अभी भी इंटरनेट और कंप्यूटर की सुविधा कमजोर है.

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