भारत में कब हुई थी रविवार को पहली छुट्टी ? किस भारतीय की मांग पर हुआ था ये फैसला, यहां जानें  

नारायण मेघाजी लोकहांडे ने भारतीयों के लिए रविवार की छुट्टी के लिए 1881 से 1884 के बीच यह आंदोलन चलाया. इसके लिए उन्होंने सबसे पहले ब्रिटिश सरकार को एक ज्ञापन सौंपा. उसके

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नारायण मेघाजी लोकहांडे ने भारतीयों के लिए रविवार की छुट्टी के लिए 1881 से 1884 के बीच यह आंदोलन चलाया.

How was Sunday holiday implemented across India : भारत में अंग्रेजों ने 200 सालों तक राज किया. इस दौरान उन्होंने अपने ही नियम, कायदे-कानून से पूरे देश को चलाया और कई कड़े कानून भी भारतीयों पर थोपे. भारतीय अपने ही देश में गुलाम की जिंदगी जी रहे थे. सबसे ज्यादा लेबर क्लास को जुल्म सहना पड़ता था. बिना किसी छुट्टी के घंटों-घंटों काम करने से जिंदगी एक सजा बन गई थी. वहीं, ब्रिटिश गवर्नर जनरल लार्ड हार्डिज ने सबसे पहले 1843 में सरकारी दफ्तरों में रविवार की छुट्टी अनिवार्य की थी. लेकिन भारतीयों के लिए रविवार की छुट्टी के लिए लड़ने वाले नारायण मेघाजी लोकहांडे थे, जिन्हें देश का पहला ट्रेड यूनियन नेता माना जाता है. इन्होंने भारत में रविवार की छुट्टी लागू करवाने के लिए एक बड़ा आंदोलन चलाया था.

रविवार की छुट्टी के लिए चलाया आंदोलन?

नारायण मेघाजी लोकहांडे ने भारतीयों के लिए रविवार की छुट्टी के लिए 1881 से 1884 के बीच यह आंदोलन चलाया. इसके लिए उन्होंने सबसे पहले ब्रिटिश सरकार को एक ज्ञापन सौंपा. उसके बाद कई रैलियां निकालीं और फिर रविवार की छुट्टी को मंजूरी देने के लिए आंदोलन किया. लोकहांडे के आंदोलन ने पूरे देश के मजदूर संगठन को एक साथ ला दिया. ब्रिटिश राज में भारतीय मजदूर बिना छुट्टी के 12-12 घंटों से भी ज्यादा समय तक काम करते थे. लोकहांडे के आंदोलन के उग्र होने के चलते ब्रिटिश सरकार को उनके आगे झुकना पड़ा और ऐसे भारत में कई सेक्टर में रविवार का अवकाश लागू हुआ. उनके कड़े प्रयास से भारत में पहली बार रविवार की छुट्टी 10 जून 1890 में मिली थी. सबसे पहले सरकारी दफ्तर में इसे लागू किया गया. इसके बाद देश के तकरीबन सरकारी और निजी संस्थानों में रविवार की छुट्टी का नियम लागू होने लगा.

पूरे भारत में ऐसे लागू हुई रविवार की छुट्टी?

इसके बाद कई इंडस्ट्री ने भी रविवार की छुट्टी देना शुरू कर दिया. यह नियम स्कूल, पोस्ट ऑफिस, रेलवे और फिर प्राइवेट कंपनियों में लागू होने लगा और 20 वीं सदी की शुरुआत तक रविवार का अवकाश भारत के लिए स्थाई छुट्टी बन गया. बता दें, रविवार की छुट्टी का दिन लोगों के आराम, निजी काम, सामाजिक गतिविधियां और मेंटल पीस के लिए होता है. इस दिन को लोग रेस्ट डे के रूप मे एन्जॉय करते हैं.

इससे काम और पर्सनल लाइफ में एक सुखद बैलेंस बना रहता है. आज कई सरकारी और निजी संस्थानों में दो दिन (शनिवार-रविवार) का अवकाश भी मिलता है. 

 

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