शादी से मुकर जाने पर कब हो सकती है जेल? जानें क्या कहता है कानून

Law False Marriage : शादी का वादा करके बाद में मुकर जाना हर बार अपराध नहीं होता है, लेकिन अगर शुरुआत से ही धोखा देने का इरादा था और उसी आधार पर शारीरिक संबंध बनाए गए, तो नए कानून के तहत केस दर्ज हो सकता है और जेल जाने की नौबत आ सकती है.

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सुप्रीम कोर्ट पहले भी कह चुका है (जैसे प्रमोद सूर्यभान पवार vs महाराष्ट्र राज्य केस) कि हर टूटा हुआ वादा अपराध नहीं होता है.

Legal Action on False Marriage Promise: आजकल रिश्ते जितनी जल्दी बनते हैं, उतनी ही जल्दी टूट भी जा रहे हैं. आए दिन कहीं न कहीं शादी से मुकर जाने की घटनाएं सामने आती रहती हैं. पुलिस थाने और कोर्ट में कई ऐसे मामलों की हर दिन सुनवाई होती है. ऐसे में एक सवाल हर किसी के मन में होता है कि अगर किसी ने शादी का वादा किया और बाद में मुकर गया, तो क्या-क्या सजा मिल सकती है और जेल कब जाना पड़ सकता है. क्या हर टूटे हुए रिश्ते में केस बन सकता है या फिर कानून सिर्फ उन मामलों में सख्त है जहां सच में धोखा हुआ है. आइए जानते हैं क्या कहता है कानून.

पहले क्या होता था

पहले ऐसे मामलों को अक्सर IPC (Indian Penal Code) के तहत देखा जाता था. इस तरह के केस धारा 375 में देखे जाते थे.अगर किसी लड़की ने ये कहा कि उसने शादी के वादे पर शारीरिक संबंध बनाए और बाद में लड़का मुकर गया, तो केस कई बार रेप की धारा में चला जाता था. कोर्ट को ये तय करना पड़ता था कि क्या सहमति सच में थी या धोखे से ली गई थी. यहीं से असली उलझन शुरू होती थी.

अब कानून में क्या बदला है

अब नया कानून BNS (Bharatiya Nyaya Sanhita) लागू हो चुका है. इसमें धारा 69 जोड़ी गई है. इस धारा में साफ कहा गया है कि अगर कोई व्यक्ति नौकरी, प्रमोशन या शादी का झूठा वादा करके शारीरिक संबंध बनाता है, तो यह अपराध माना जाएगा. ऐसे मामलों में जेल की सजा हो सकती है, लेकिन ध्यान रहे कि इसे रेप के बराबर नहीं माना गया है यानी कानून ने एक अलग कैटेगरी बना दी है.

क्या हर बार रिश्ता टूटने पर सजा हो सकती है

सुप्रीम कोर्ट पहले भी कह चुका है (जैसे प्रमोद सूर्यभान पवार vs महाराष्ट्र राज्य केस) कि हर टूटा हुआ वादा अपराध नहीं होता है. अगर किसी ने सच्चे मन से शादी का इरादा किया, रिश्ता चला, लेकिन बाद में परिवार के विरोध, आपसी झगड़े या किसी और वजह से रिश्ता टूट गया, तो ये अपराध नहीं है. लेकिन अगर शुरुआत से ही शादी का कोई इरादा नहीं था, सिर्फ बहलाने के लिए वादा किया गया था, तब मामला आपराधिक बन सकता है और जेल जाने की नौबत आ सकती है.

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कोर्ट कैसे तय करता है कि क्या सच है क्या नहीं

यहां से मामला पेचीदा हो जाता है. पुलिस और कोर्ट को मैसेज, चैट, कॉल रिकॉर्ड, गवाह सब देखना पड़ता है. ये समझना आसान नहीं होता कि रिश्ता सच में टूटा या प्लान बनाकर धोखा दिया गया. ऐसे केसेज में सुनवाई में लंबा समय लग सकता है.

क्या हर ब्रेकअप पर केस हो सकता है

कानून के मुताबिक, ऐसा नहीं है. हर ब्रेकअप अपराध नहीं है. रिश्ते टूटना जिंदगी का हिस्सा है, लेकिन अगर कोई व्यक्ति जानबूझकर शादी का झूठा सपना दिखाकर शारीरिक संबंध बनाता है, तो मामला गंभीर हो सकता है. फिर भी, कुछ लोग डर जताते हैं कि इस धारा का गलत इस्तेमाल भी हो सकता है, क्योंकि आरोप लगते ही पुलिस केस, पूछताछ और कोर्ट की प्रक्रिया शुरू हो जाती है.

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