UP बोर्ड में फेल होने का खतरा कम, नए मार्किंग सिस्टम से बदल जाएगा पूरा गणित

इस साल यूपी बोर्ड ने कॉपी चेक करने के तरीके में सुधार करते हुए “स्टेप मार्किंग सिस्टम” को लागू किया है. इसके तहत अब कॉपियों की चेकिंग डिजिटल माध्यम से की जा रही है, जिससे पारदर्शिता बढ़ेगी और गलतियों की संभावना कम होगी.

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यह सिस्टम केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (CBSE) के मूल्यांकन मॉडल की तरह काम करती है.

UP Board result 2026 : यूपी बोर्ड के छात्र इन दिनों अपने रिजल्ट का बेसब्री से इंतजार कर रहे हैं. उत्तर प्रदेश माध्यमिक शिक्षा परिषद (UPMSP) 25 अप्रैल, 2016 को बोर्ड परीक्षाओं के नतीजे जारी कर सकता है. इस बार बोर्ड ने कॉपी चेकिंग प्रोसेस में बड़ा बदलाव करते हुए स्टेप मार्किंग सिस्टम लागू किया है, जिससे छात्रों को काफी राहत मिलने की उम्मीद है. इस नए सिस्टम के जरिए कॉपियों की जांच ज्यादा पारदर्शी तरीके से की जा रही है. इससे छोटी गलतियों पर पूरे मार्क्स नहीं कटेंगे. आइए जानते हैं स्टेप मार्किंग सिस्टम आखिर है क्या - 

क्या है स्टेप मार्किंग सिस्टम?

इस साल यूपी बोर्ड ने कॉपी चेक करने के तरीके में सुधार करते हुए “स्टेप मार्किंग सिस्टम” को लागू किया है. इसके तहत अब कॉपियों की चेकिंग डिजिटल माध्यम से की जा रही है, जिससे पारदर्शिता बढ़ेगी और गलतियों की संभावना कम होगी. UP बोर्ड का यह नया स्टेप मार्किंग सिस्टम छात्रों के लिए राहत भरा कदम साबित हो सकता है. इससे न केवल चेकिंग में पारदर्शिता बढ़ेगी, बल्कि छात्रों के ज्ञान और मेहनत को भी सही तरीके से आंकने में मदद मिलेगी. इसके अलावा डिजिटल चेकिंग और बेहतर सिस्टम के कारण इस बार कॉपी चेकिंग का काम तेजी से पूरा किया गया है. यही वजह है कि बोर्ड तय समय से पहले ही रिजल्ट जारी करने की तैयारी में है.

क्या हैं स्टेप मार्किंग के फायदे?

स्टेप मार्किंग सिस्टम लागू होने से छात्रों को कई तरह के फायदे मिलेंगे, जो इस प्रकार हैं - 

  • अगर छात्र ने सही फॉर्मूला और प्रोसेस अपनाया है, तो उसे उसके लिए मार्क्स मिलेंगे
  • छोटी कैलकुलेशन की गलती होने पर पूरे नंबर नहीं कटेंगे.
  • छात्रों की समझ और प्रयास को सराहा जाएगा.
  • फेल होने की संभावना में कमी आएगी.
  • एक्सपर्ट्स के अनुसार, इस सिस्टम से पास फीसदी में करीब 15-20% तक बढ़ोतरी हो सकती है.

कैसे काम करता है यह सिस्टम?

यह सिस्टम केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (CBSE) के मूल्यांकन मॉडल की तरह काम करती है. इसमें हर सवाल को अलग-अलग स्टेप्स में बांटा जाता है. उदाहरण के लिए, अगर किसी सवाल के 5 नंबर हैं और छात्र ने उसमें से 3 स्टेप्स सही किए हैं, तो उसे 3 मार्क्स मिलेंगे, भले ही अंतिम जवाब गलत हो. यह नियम खासतौर पर गणित और साइंस जैसे सब्जेक्ट्स में लागू होगा, जहां प्रोसेस और फॉर्मूला का सही होना जरूरी होता है.

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