संघ लोक सेवा आयोग (UPSC) की सिविल सेवा परीक्षा 2024 (UPSC CSE 2024) में ऑल इंडिया रैंक 1 हासिल करने वाली शक्ति दुबे को उत्तर प्रदेश कैडर आवंटित किया गया है और उनकी पहली फील्ड पोस्टिंग मुरादाबाद जिले में है. शक्ति दुबे असिस्टेंट मजिस्ट्रेट और असिस्टेंट कलेक्टर (प्रशिक्षण के तहत) के रूप में कार्य करेंगी. दरअसल UPSC सिविल सेवा परीक्षा पास करने के बाद भारतीय प्रशासनिक सेवा (IAS) के लिए चुने वाले उम्मीदवारों को सबसे पहले Training करनी होती है. अधिकारी को असिस्टेंट कलेक्टर (अंडर ट्रेनिंग) के रूप में नियुक्त किया जाता है और इस दौरान वो जिला प्रशासन के कामकाज को करीब से समझते हैं.
SDM की क्या होती है जिम्मेदारी
ट्रेनिंग पूरी होने के बाद मिलने वाली पहली फील्ड पोस्टिंग के दौरान सब डिविजनल मजिस्ट्रेट (SDM), असिस्टेंट कलेक्टर या जॉइंट मजिस्ट्रेट के पद पर काम करना होता है. इस दौरान जिले के एक हिस्से की जिम्मेदारी दी जाती है.
एक IAS अधिकारी लगभग 3 से 5 साल तक काम करने के बाद पहला प्रमोशन मिलता है और एडिशनल डिस्ट्रिक्ट मजिस्ट्रेट (ADM) या किसी शहर में म्यूनिसिपल कमिश्नर का पद सौंपा जाता है. इस दौरान प्रशासनिक कामों में कलेक्टर की मदद करनी होती है
कब तक बनते हैं डीएम
UPSC क्लियर करने के बाद IAS अधिकारी को डीएम (जिला मजिस्ट्रेट/कलेक्टर) बनने में काफी साल लग जाते हैं. डीएम बनने से पहले कई पदों पर काम करना पड़ता है. आमतौर पर किसी को भी डीएम बनने में आराम से 8 से 10 साल का समय लग जाता है.
राज्य-स्तरीय प्रमोशन
- अपर ज़िला मजिस्ट्रेट (ADM)
- ज़िला मजिस्ट्रेट (DM) / कलेक्टर
- मंडलीय आयुक्त (Divisional Commissioner)
- सचिव, प्रधान सचिव, और अंततः राज्य के मुख्य सचिव
केंद्र सरकार के पद
- उप सचिव
- निदेशक
- संयुक्त सचिव
- अपर सचिव
- भारत सरकार में सचिव
| LBSNAA और जिला प्रशिक्षण | करीब दो साल काम करना होता है |
| एसडीएम (SDM) के रूप में कार्य | 1-3 साल साल तक |
| एडिशनल डिस्ट्रिक्ट मजिस्ट्रेट (ADM) या उप सचिव पद | 3-6 साल तक काम करना पड़ता है |
| डीएम (District Magistrate) | 8 से 10 साल के बाद मिलता है |
डीएम बनना कई सारी चीजों पर निर्भर होता है, जैसे Cadres और प्रदर्शन पर. छोटे राज्यों या केंद्र शासित प्रदेशों में 4 से 6 साल में भी डीएम बन सकते हैं, जबकि उत्तर प्रदेश जैसे बड़े राज्यों में काफी समय लगता है.