What Is horizontal Reservation : जब भी सरकारी नौकरी या कॉलेज एडमिशन की बात आती है, तो आरक्षण (Reservation) शब्द सबसे ज्यादा चर्चा में रहता है. आपने अक्सर SC, ST और OBC आरक्षण के बारे में सुना होगा, जिसे हम वर्टिकल रिजर्वेशन कहते हैं. लेकिन क्या आपने कभी 'हॉरिजॉन्टल रिजर्वेशन' (Horizontal Reservation) के बारे में सुना है? चलिए, आज इसे बिल्कुल आसान भाषा में समझते हैं ताकि एक आम आदमी भी समझ सके इस आरक्षण का पूरा खेल क्या है.
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क्या है हॉरिजॉन्टल रिजर्वेशन?इसे एक उदाहरण से समझिए. मान लीजिए सरकार ने SC, ST और OBC के लिए अलग-अलग 'डिब्बे' (Categories) बना दिए हैं. इसे कहते हैं वर्टिकल रिजर्वेशन. अब इन डिब्बों के अंदर भी कुछ खास लोगों के लिए सीटें फिक्स कर दी जाती हैं, जैसे- महिलाएं, दिव्यांग (Handicapped), पूर्व सैनिक.
जब एक ही कैटेगरी के अंदर कुछ खास ग्रुप्स को अलग से आरक्षण दिया जाता है, तो उसे हॉरिजॉन्टल (क्षैतिज) रिजर्वेशन कहते हैं. यानी यह आरक्षण 'सीधे' नहीं बल्कि 'आड़े' चलता है और हर कैटेगरी के अंदर अपनी जगह बनाता है.
यह काम कैसे करता है?
मान लीजिए किसी सरकारी विभाग में 100 सीटें निकली हैं.
नियम के मुताबिक:
- अगर महिलाओं के लिए 30% हॉरिजॉन्टल आरक्षण है, तो इसका मतलब यह नहीं कि उनके लिए अलग से 30 सीटें होंगी. बल्कि यह है कि जनरल कैटेगरी की सीटों में 30% महिलाएं होंगी, OBC की सीटों में 30% महिलाएं होंगी और इसी तरह SC/ST में भी.
- यानी हॉरिजॉन्टल आरक्षण किसी दूसरी कैटेगरी की सीट नहीं काटता, बल्कि अपनी ही कैटेगरी के भीतर उन लोगों को मौका देता है जिन्हें इसकी ज्यादा जरूरत है.
यह सामाजिक पिछड़ेपन के आधार पर होता है (जैसे जाति). यह एक-दूसरे से अलग होते हैं. एक व्यक्ति एक साथ दो वर्टिकल आरक्षण का लाभ नहीं ले सकता.
यह फिजिकल सिच्चयुशन या खास हालात के आधार पर होता है. यह वर्टिकल आरक्षण के अंदर काम करता है.
यह क्यों जरूरी है?भारत के संविधान के मुताबिक, समाज के हर तबके को बराबरी का मौका मिलना चाहिए. महिलाएं या दिव्यांग साथी अक्सर अपनी ही कैटेगरी के स्वस्थ पुरुषों से पिछड़ जाते हैं. ऐसे में हॉरिजॉन्टल रिजर्वेशन यह पक्का करता है कि इन खास ग्रुप्स को अपनी कैटेगरी के भीतर कॉम्पिटिशन करने में आसानी हो और सिस्टम में उनकी भागीदारी बनी रहे.