Student Visa : अगर आप या आपके परिवार में कोई इस साल अमेरिका जाकर पढ़ाई करने का सपना देख रहा था, तो यह खबर आपके लिए बहुत जरूरी है. ताजा आंकड़ों के मुताबिक, जून और जुलाई 2025 के दौरान भारतीय छात्रों को मिलने वाले अमेरिकी F-1 वीजा में 69 प्रतिशत की जबरदस्त गिरावट आई है.यानी जहां पिछले साल हजारों छात्र उड़ान भर रहे थे, इस साल उनकी संख्या सिमट कर एक-तिहाई से भी कम रह गई है.
क्या कहते हैं सरकारी आंकड़े?अमेरिकी विदेश विभाग के डेटा के अनुसार, जून और जुलाई 2024 में 41,336 भारतीय छात्रों को वीजा मिला था. लेकिन 2025 के इन्हीं महीनों में यह संख्या गिरकर सिर्फ 12,776 रह गई है. बता दें कि जून-जुलाई का समय छात्रों के लिए सबसे खास होता है क्योंकि अगस्त-सितंबर से वहां का मुख्य 'फॉल सेमेस्टर' शुरू होता है.
इस गिरावट के पीछे डोनाल्ड ट्रंप प्रशासन की नई और सख्त नीतियां मानी जा रही हैं. जानकारों का कहना है कि इसके पीछे कई बड़े कारण हैं:
सोशल मीडिया की जांचअब वीजा के लिए आपके पिछले 5 साल के सोशल मीडिया अकाउंट्स की जानकारी मांगी जा रही है. एम्बेसी ने छात्रों से अपनी प्रोफाइल 'पब्लिक' रखने को कहा है, ताकि वे बारीकी से जांच कर सकें.
मई 2025 के आखिर में अमेरिका ने कुछ हफ्तों के लिए वीजा इंटरव्यू रोक दिए थे, जिससे पेंडिंग केस बढ़ गए.
फंडिंग में कटौतीकई बड़ी यूनिवर्सिटीज जैसे हार्वर्ड और स्टैनफोर्ड में रिसर्च बजट कम कर दिया गया है, जिससे विदेशी छात्रों के लिए मौके कम हो गए हैं.
ओल्ड पॉलिसीज में बदलाव और पढ़ाई के बाद मिलने वाले वर्क परमिट (OPT) को लेकर चल रही चर्चाओं ने भी छात्रों को डरा दिया है.
चीन से भी पिछड़ा भारत?दिलचस्प बात यह है कि पिछले कुछ सालों से भारतीय छात्र, चीनी छात्रों के मुकाबले ज्यादा वीजा पा रहे थे. लेकिन 2025 में पासा पलट गया है. इस साल जून-जुलाई में चीन के 17,025 छात्रों को वीजा मिला, जो भारत की संख्या से काफी ज्यादा है.
विदेशी छात्र अमेरिकी अर्थव्यवस्था में हर साल लगभग 43 बिलियन डॉलर (करीब 3.6 लाख करोड़ रुपये) का योगदान देते हैं. भारतीय छात्र वहां की यूनिवर्सिटीज के लिए कमाई का बड़ा जरिया हैं. अगर छात्रों की संख्या इसी तरह गिरती रही, तो वहां के मास्टर और पीएचडी प्रोग्राम्स पर बुरा असर पड़ सकता है.