UPSC Result: यूपीएससी सिविल सेवा परीक्षा 2025 में बिहार के वैशाली (बिदुपुर) के उज्ज्वल प्रियांक ने अखिल भारतीय स्तर पर 10वीं रैंक हासिल कर पूरे राज्य का नाम रोशन किया है. हालांकि, उनकी इस शानदार सफलता के बावजूद उनके पिता संजीव कुमार, जो खुद एक इंजीनियर हैं, पूरी तरह संतुष्ट नहीं हैं. उनका मानना है कि उज्ज्वल बचपन से ही हर स्कूल और कॉलेज परीक्षा में 'नंबर वन' रहा है, इसलिए उसे यूपीएससी में भी पहला स्थान (Rank 1) हासिल करना चाहिए था. पिता इस कमी का श्रेय अपनी श्रद्धा के अनुसार ग्रह-नक्षत्रों और पूजा-पाठ में रही किसी कमी को दे रहे हैं.
10वीं रैंक के बाद भी खुश नहीं पिता
यूपीएससी के नतीजे आते ही देशभर में जश्न का माहौल है, इसी बीच बिहार के वैशाली से एक ऐसी खबर आई है जो सबको हैरान कर रही है. बिदुपुर के लाल उज्ज्वल प्रियांक ने देश की सबसे कठिन परीक्षा में 10वीं रैंक हासिल की है. पूरे जिले में मिठाइयां बंट रही हैं, लेकिन उज्ज्वल के घर में उनके पिता इस सफलता से पूरी तरह खुश नहीं हैं. आखिर क्यों एक पिता अपने बेटे की ऑल इंडिया 10वीं रैंक को भी कम मान रहे हैं?
वैशाली जिले के बिदुपुर गांव आज सुर्खियों में है. वजह है गांव के बेटे उज्ज्वल प्रियांक की ऐतिहासिक सफलता. उज्ज्वल ने अपने तीसरे प्रयास में यूपीएससी 2025 की परीक्षा में 10वां स्थान हासिल कर मिसाल कायम की है. उज्ज्वल शुरू से ही मेधावी रहे है, चाहे दसवीं में 10 CGPA हो या 12वीं में 96 प्रतिशत अंक, वे हमेशा टॉपर रहे हैं.
पिता ने बताया क्यों नहीं हैं खुश
उज्जवल के पिता ने एनडीटीवी से बात करते हुए कहा, "हम लोगों को था ही कि मिनिमम IAS तो होना चाहिए. हम उतने खुश नहीं हैं, जितने होने चाहिए. हम लोगों की इच्छा थी कि वो टॉप करे, उसने जहां भी पढ़ाई की है, वहां टॉप किया था. कोई भी एग्जाम में वो अच्छी रैंक ला सकता था. वो जितने दिन सिविल सर्विस की तैयारी कर रहा था, उसके साथ मैं ज्योतिषाचार्य की तैयारी कर रहा था. हम दोनों ने 2023 से पढ़ाई शुरू की थी. जब मैंने 2024 में कुंडली चेक करवाई तो पता चला कि बृहस्पति दूषित है. इसके बाद मैंने अनुष्ठान से सभी ग्रहों को सही कराया. मेरे ग्रह के दोष से ही उसे बाधा हो रही थी."
बेटे को नंबर-1 देखने की चाह
उज्ज्वल के घर पर बधाई देने वालों कर ताता लगा है और जहां दुनिया उज्ज्वल को बधाइयां दे रही है, वहीं उनके पिता संजीव कुमार, जो पेशे से इंजीनियर हैं, कुछ मायूस नजर आ रहे हैं. उनका कहना है कि उनका बेटा बचपन से ही हर जगह नंबर वन रहा है, इसलिए उन्हें उम्मीद थी कि वह यूपीएससी में भी टॉपर (Rank 1) बनेगा. पिता की नजर में यह 10वीं रैंक नंबर वन की रेस में थोड़ी पीछे रह गई है. इतना ही नहीं, वे इसके पीछे मेहनत की कमी नहीं, बल्कि ग्रह-नक्षत्रों और पूजा-पाठ में रही किसी सूक्ष्म कमी को जिम्मेदार मान रहे हैं.
एक तरफ जहां हजारों छात्र यूपीएससी की लिस्ट में नाम आने को ही जीवन की सबसे बड़ी उपलब्धि मानते हैं, वहीं उज्ज्वल के पिता की यह "हाई एक्सपेक्टेशन" चर्चा का विषय बनी हुई है. हालांकि, उज्ज्वल खुद अपनी सफलता का श्रेय अपनी कड़ी मेहनत और भगवान द्वारकाधीश में अपनी अटूट आस्था को देते हैं.
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