MBBS पास करने की जिद, 1998 और 2009 से पास नहीं हो पाए ये छात्र; फिर से रिजल्ट का इंतजार

Gorakhpur BRD Medical College: गोरखपुर मेडिकल कॉलेज के 2010 बैच वाले छात्र का रिजल्ट आने के बाद अब 1998 और 2009 बैच के स्टूडेंट्स भी अपने रिजल्ट का इंतजार कर रहे हैं.

विज्ञापन
Read Time: 3 mins
गोरखपुर मेडिकल कॉलेज के तीन छात्रों की कहानी
AI Generated Image

Gorakhpur BRD Medical College: गोरखपुर के बीआरडी मेडिकल कॉलेज में तीन छात्रों को एमबीबीएस की पढ़ाई पूरी करने में 15 से 20 साल लग गए हैं. इतना ही नहीं, इनमें से एक छात्र तो 1998 बैच का है. बाकी दो छात्र 2009 और 2010 बैच के हैं. हैरानी इस बात की है कि जब कोर्ट ने इनमें से एक छात्र का रिजल्ट जारी करने का आदेश दिया तो वो उसमें भी फेल हो गया. सभी ने बीआरडी मेडिकल कॉलेज में एमबीबीएस में एडमिशन लिया था, लेकिन कुछ परीक्षाओं में असफल रहे. समय बीतने के साथ उनके रिजल्ट दिशानिर्देशों और नियमों में अटक कर रह गए और उनकी पढ़ाई पूरी नहीं हो सकी. इन तीनों स्टूडेंट्स ने साल 2024 में भी एमबीबीएस फाइनल ईयर का एग्जाम दिया था. उसके बाद रिजल्ट जारी नहीं हुआ. 

कोर्ट के आदेश के बाद आया रिजल्ट

ये मामला उत्तर प्रदेश के गोरखपुर में स्थित बीआरडी(बाबा राघव दास) मेडिकल कॉलेज का है. इस कॉलेज के तीन एमबीबीएस स्टूडेंट्स का मामला काफी चर्चा में है. क्योंकि हाईकोर्ट के आदेश के बाद जब एक स्टूडेंट का एमबीबीएस रिजल्ट 15 साल बाद आया तो उसमें भी निराशा हाथ लगी. एमबीबीएस की पढ़ाई पूरी नहीं करने पर 2010 बैच के झंगहा के रहने वाले एक छात्र ने हाईकोर्ट में याचिका दायर की. कोर्ट के आदेश के बाद मेडिकल कॉलेज ने रिजल्ट दिया, लेकिन वे उसमें भी फेल हो गया. हालांकि अब स्टूडेंट को सप्लीमेंट्री एग्जाम में बैठने की परमिशन मिल गई है.

इसके अलावा अब 1998 और 2009 बैच के स्टूडेंट्स भी अपने रिजल्ट का इंतजार कर रहे हैं. इनके रिजल्ट को लेकर अभी आधिकारिक प्रक्रिया पूरी होनी बाकी है. BRD प्रशासन का कहना है कि उनका भी आदेश कराया जा रहा है, ताकि उन्हें भी सप्लीमेंट्री एग्जाम में बैठने का मौका मिलेगा.

क्या हैं मेडिकल के नियम?

NMC के मौजूदा नियमों के अनुसार, MBBS छात्रों को पहले साल की परीक्षा चार अटेंप्ट में पास करनी होती है और पूरा कोर्स 5.5 से 6 साल (पढ़ाई और इंटर्नशिप को मिलाकर) में पूरा करना होता है. हालांकि अधिकतम अवधि 10 साल तक है, इसके बाद रजिस्ट्रेश रद्द कर दिया जाता है.
इसमें 4.5 साल एमबीबीएस का एकेडमिक कोर्स होता है और फिर 1 साल की रोटेटिंग इंटर्नशिप शामिल है. लेकिन उत्तर प्रदेश के तीन स्टूडेंट्स 15-20 साल से एमबीबीएस में फंसे पड़े हैं. यह चौंकाने वाला मामला तब सामने आया जब एक स्टूडेंट ने लंबे समय से अटके एमबीबीएस रिजल्ट जारी करने को लेकर हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया.

कॉलेज प्रिंसिपल ने बताई पूरी कहानी 

बीआरडी मेडिकल कॉलेज के प्राचार्य डॉ. रामकुमार जायसवाल ने बताया कि पहले MCI थी (मेडिकल काउंसलिंग ऑफ इंडिया), जिसमें मेडिकल की पढ़ाई का समय निर्धारित नहीं था. इसी दौरान NMC नेशनल मेडिकल  कमीशन बन गई. उसमें गाइडलाइन जारी हुई कि फर्स्ट ईयर 4 साल में क्वालीफाई करना है. इसमें फर्स्ट, सेकेंड,थर्ड, सबका समय निर्धारित हो गया कि कितने समय में क्वालीफाई किया जाना चाहिए. टोटल एमबीबीएस की पढ़ाई 10 साल में कंप्लीट करनी है.

Advertisement

NMC की इस गाइडलाइन के तहत 2023 बैच तक के छात्र आते हैं, लेकिन ये तीनों छात्र इससे पहले के हैं. इसीलिए BRD प्रशासन को समझ नहीं आया कि कौन सी गाइडलाइन अपनाई जाए. इसके बाद विश्वविद्यालय प्रशासन ने भी NMC को ये मामला भेजा. इस पूरे प्रोसेस में वक्त लगा और इसी बीच कोर्ट ने आदेश जारी कर दिया. 

पेट्रोल-डीजल से एक महीने में कितना कमाती है सरकार? लगता है इतने तरह का टैक्स

Featured Video Of The Day
जय-जयश्रीराम...रामनवमी पर रामलला का भव्य सूर्य तिलक, जगमगाया ललाट, देखें VIDEO